शमी की पूर्व पत्नी हसीन जहां की गुहार: 4 लाख मासिक गुजारा भत्ता ‘काफी नहीं’, सुप्रीम कोर्ट ने पूछा—क्या इतना कम है?
शमी की पूर्व पत्नी हसीन जहां की गुहार: 4 लाख मासिक गुजारा भत्ता ‘काफी नहीं’, सुप्रीम कोर्ट ने पूछा—क्या इतना कम है?
भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी और उनकी पूर्व पत्नी हसीन जहां के बीच लंबे समय से चला आ रहा गुजारा भत्ता विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने हसीन जहां की याचिका पर शमी और पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी करते हुए कड़ी टिप्पणी की है। बेंच ने जहां ने पूछा, “क्या हर महीने 4 लाख रुपये काफी नहीं हैं?”408738 कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को “काफी उदार” बताया, लेकिन फिर भी दोनों पक्षों से चार हफ्तों में जवाब मांगा। अगली सुनवाई दिसंबर में होगी। हसीन ने 4 लाख के गुजारा भत्ते को अपर्याप्त बताते हुए 10 लाख मासिक की मांग की है, जो शमी की कमाई (7 करोड़ से अधिक सालाना) को देखते हुए उचित है, उनका दावा है।
यह विवाद 2018 से चल रहा है, जब हसीन ने शमी पर घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न और मैच फिक्सिंग के आरोप लगाए थे। एफआईआर के बाद बीसीसीआई ने शमी को क्लीन चिट दी, लेकिन वैवाहिक विवाद कोर्ट पहुंच गया। शुरुआत में ट्रायल कोर्ट ने हसीन को 50,000 और बेटी को 80,000 मासिक गुजारा भत्ता दिया था। जुलाई 2025 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने इसे बढ़ाकर हसीन को 1.5 लाख और बेटी को 2.5 लाख (कुल 4 लाख) कर दिया। हसीन के वकील इम्तियाज अहमद ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि हसीन की मासिक आय सिर्फ 16,000 है, जबकि खर्च 6 लाख से अधिक। उन्होंने शमी के विलासपूर्ण जीवनशैली का हवाला देते हुए कहा कि बेटी को पिता जैसी सुविधाएं मिलनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सुनवाई के दौरान हसीन के वकील से सवाल किया, “4 लाख मासिक ‘बहुत ज्यादा’ नहीं है?” बेंच ने नोटिस जारी कर शमी से चार हफ्तों में जवाब मांगा, जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार को भी शामिल किया। हसीन की याचिका में शमी पर कई महीनों से भुगतान न करने का भी आरोप है। शमी ने पहले इंटरव्यू में शादी को “जीवन की सबसे बड़ी गलती” बताया था, लेकिन कोर्ट में चुप्पी साध रखी है।
आम आदमी पार्टी और क्रिकेट जगत में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। पूर्वी बंगाल फुटबॉल क्लब की पूर्व खिलाड़ी हसीन ने कहा कि शमी की कमाई से बेटी का भविष्य सुरक्षित होना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला गुजारा भत्ता तय करने के मानदंडों को प्रभावित करेगा, जहां पति की आय और पत्नी की जरूरतों का बैलेंस जरूरी है। शमी, जो हाल ही में चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में भारत की जीत के हीरो बने, अब व्यक्तिगत जंग लड़ रहे हैं। फिलहाल, दोनों पक्षों के जवाब का इंतजार है, जो दिसंबर में कोर्ट में पेश होंगे।
