Tuesday, June 30, 2026
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नक्सल छाया से आजाद मुंगेर: 20 साल बाद भीमबांध में मतदान, SP हत्याकांड की यादें ताजा—लोकतंत्र की जीत!

नक्सल छाया से आजाद मुंगेर: 20 साल बाद भीमबांध में मतदान, SP हत्याकांड की यादें ताजा—लोकतंत्र की जीत!

बिहार के नक्सल प्रभावित मुंगेर जिले के भीमबांध इलाके में 20 साल बाद लोकतंत्र की बहार छा गई। 2005 में तत्कालीन SP सी. सुरेंद्र बाबू और सात पुलिसकर्मियों की क्रूर हत्या के बाद बंद पड़े सात पोलिंग बूथ आज दोबारा खुले, और तीन विधानसभा सीटों—मुंगेर, जमालपुर और तारापुर—पर शांतिपूर्ण वोटिंग हुई। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की भारी तैनाती के बीच सुबह से ही लंबी कतारें लग गईं, और ग्रामीणों का उत्साह देखते ही बन रहा था। “अब वोट डालना आसान हो गया, घर के दरवाजे पर ही लोकतंत्र आ गया,” एक बुजुर्ग मतदाता ने खुशी से कहा।

2005 की वह काली घटना आज भी इलाके वालों के जेहन में ताजा है। नक्सलियों ने SP सुरेंद्र बाबू के काफिले पर हमला बोल दिया था, जिसमें आठ जवान शहीद हो गए। उसके बाद सुरक्षा कारणों से भीमबांध के ये बूथ बंद कर दिए गए, और मतदाताओं को दूर-दराज के केंद्रों पर जाना पड़ता था। लेकिन इस बार चुनाव आयोग ने विशेष अभियान चलाया। डीआईजी मुंगेर ने बताया, “300 से ज्यादा CAPF जवान तैनात थे। ड्रोन निगरानी और वेबकैमिंग से पारदर्शिता सुनिश्चित की गई। वोटिंग 68% रही, जो रिकॉर्ड है।” भीमबांध के ग्रामीण, जो ज्यादातर आदिवासी समुदाय से हैं, ने कहा कि सड़कें बनीं, बिजली आई, और अब वोटिंग से भविष्य संवारेंगे।

मुंगेर जिले की तीनों सीटों पर NDA और महागठबंधन के बीच कड़ी टक्कर है। जमालपुर में BJP के रामचंद्र मंडल और RJD के अजय मंडल आमने-सामने हैं, जबकि तारापुर में JDU की उम्मीदें मजबूत हैं। नक्सलवाद की छाया से मुक्ति के बाद इलाके में विकास की गति तेज हुई है—स्कूल बने, स्वास्थ्य केंद्र खुले। एक महिला मतदाता ने कहा, “पहले डर था, अब बेटियां भी वोट डाल रही हैं।” चुनाव आयोग के अनुसार, पहले चरण में कुल 62% वोटिंग हुई, लेकिन नक्सल क्षेत्रों में यह आंकड़ा प्रेरणादायक है।

यह घटना बिहार के नक्सल-मुक्ति अभियान की सफलता का प्रतीक है। 2010 से अब तक मुंगेर में 90% नक्सली प्रभाव खत्म हो चुका है। पीएम मोदी ने ट्वीट किया, “नक्सलवाद के अंधेरे से निकलकर बिहार उजाले की ओर। वोटिंग की बधाई!” RJD नेता तेजस्वी यादव ने इसे NDA का प्रचार बताया, लेकिन ग्रामीणों का कहना है, “वोट से ही बदलाव आएगा।” क्या ये बूथ NDA की झोली भरेंगे? 10 नवंबर के नतीजे बताएंगे। फिलहाल, भीमबांध की हवा में खुशी का संगीत गूंज रहा है—लोकतंत्र जिंदाबाद!

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