ED की बड़ी कार्रवाई: अनिल अंबानी के खिलाफ 7500 करोड़ की संपत्ति कुर्क, पूछताछ के लिए समन
ED की बड़ी कार्रवाई: अनिल अंबानी के खिलाफ 7500 करोड़ की संपत्ति कुर्क, पूछताछ के लिए समन
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) के प्रमोटर अनिल अंबानी के खिलाफ मनी लॉन्डरिंग का शिकंजा कस दिया है। मंगलवार को एजेंसी ने 7,500 करोड़ रुपये कीमत की संपत्तियां कुर्क करने का आदेश जारी किया, जिसमें मुंबई और अन्य शहरों में स्थित लग्जरी अपार्टमेंट्स, कमर्शियल प्रॉपर्टीज और शेयर्स शामिल हैं। इसके साथ ही अनिल अंबानी को पूछताऊच के लिए ED मुख्यालय बुलाया गया है, जहां वे कल सुबह पेश होंगे। यह कार्रवाई RCom के 35,000 करोड़ रुपये के बैंक लोन डिफॉल्ट मामले से जुड़ी है, जिसे ED ने PMLA (Prevention of Money Laundering Act) के तहत जांच में बदल दिया है।
मामला 2019 से चला आ रहा है, जब RCom ने SBI, HDFC बैंक और अन्य लेंडर्स से लिए गए लोन चुकाने में चूक की। ED का आरोप है कि अनिल अंबानी ने जानबूझकर फंड्स को ग्रुप कंपनियों में ट्रांसफर कर डिफॉल्ट किया, जिससे बैंकिंग सिस्टम को नुकसान पहुंचा। कुर्क की गई संपत्तियों में मुंबई के पॉश इलाके वर्ली में अंबानी का फ्लैगशिप अपार्टमेंट और दिल्ली-बेंगलुरु की प्रॉपर्टीज प्रमुख हैं। ED ने कहा कि ये एसेट्स ‘प्रॉसीड्स ऑफ क्राइम’ हैं, जो लॉन्डर्ड मनी से खरीदे गए। अनिल अंबानी पर 1,500 करोड़ रुपये के पर्सनल गारंटी पर भी सवाल उठे हैं, जो उन्होंने लोन के लिए दिए थे।
अनिल अंबानी, जो कभी भारत के सबसे अमीर भाइयों में शुमार थे, हाल के वर्षों में कर्ज के बोझ तले दबे रहे हैं। 2022 में RCom के दिवालिया होने के बाद वे पर्सनल गारंटी मामलों में फंसे, लेकिन अदालतों ने कुछ राहत दी। फिर भी, ED की यह कार्रवाई उनके लिए नया झटका है। रिलायंस ग्रुप के एक प्रवक्ता ने कहा, “हम ED के फैसले का सम्मान करते हैं और पूर्ण सहयोग करेंगे। यह मामला जटिल कॉर्पोरेट रिस्ट्रक्चरिंग से जुड़ा है, न कि किसी गलत इरादे से।” अंबानी परिवार के करीबी स्रोतों का कहना है कि अनिल जी पहले से ही NCLT (National Company Law Tribunal) में अपील की तैयारी कर रहे हैं, जहां वे कुर्की को चुनौती देंगे।
यह एक्शन कॉरपोरेट जगत में हलचल मचा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ED की सख्ती से बड़े डिफॉल्टर्स पर दबाव बढ़ेगा, खासकर जब RBI ने हाल ही में पर्सनल गारंटीज को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। अनिल अंबानी की अनुपस्थिति में पूछताछ उनके बेटे और RCom डायरेक्टर्स संभालेंगे, लेकिन ED को शक है कि फंड्स का ट्रेल ग्रुप की अन्य इकाइयों—जैसे रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर—में छिपा है। पिछले साल ED ने इसी मामले में RCom के 1,200 करोड़ के एसेट्स कुर्क किए थे, जो अब 7500 करोड़ तक पहुंच गया है।
अंबानी ब्रदर्स की कहानी हमेशा से हाई-प्रोफाइल रही है। मुकेश अंबानी की Jio ने टेलीकॉम में क्रांति लाई, तो अनिल का RCom डूब गया। क्या यह ED का एक्शन अनिल की कमबैक को रोकेगा? फिलहाल, पूछताछ के नतीजे इंतजार कराएंगे। कॉरपोरेट इंडिया में यह चेतावनी साफ है: डिफॉल्ट का खामियाजा भरना ही पड़ेगा।
