कनाडा का सख्त रुख: भारतीय छात्रों के वीजा 80% रिजेक्ट, दो साल में आवेदन 78% गिरे – अब जर्मनी बनेगा नया फेवरेट?
कनाडा का सख्त रुख: भारतीय छात्रों के वीजा 80% रिजेक्ट, दो साल में आवेदन 78% गिरे – अब जर्मनी बनेगा नया फेवरेट?
कनाडा, जो कभी भारतीय छात्रों का सबसे पसंदीदा स्टडी डेस्टिनेशन था, अब लगातार उनके वीजा रिजेक्ट कर रहा है। 2025 में अब तक 80% भारतीय स्टूडेंट वीजा एप्लीकेशन्स को ठुकरा दिया गया, जो पिछले दशक का सबसे ऊंचा रिजेक्शन रेट है। IRCC (इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज एंड सिटिजनशिप कनाडा) के डेटा से साफ है कि अगस्त 2025 में 74% भारतीय आवेदनों को नकारा गया, जबकि 2023 में यह आंकड़ा सिर्फ 32% था। सबसे चौंकाने वाली बात: दो साल में भारतीय आवेदन 78% घटकर महज 4,515 रह गए, जो 2023 के 20,900 से काफी कम है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव हाउसिंग क्राइसिस, फ्रॉड कंट्रोल और भारत-कनाडा तनाव का नतीजा है, जिससे छात्र अब जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और यूके की ओर रुख कर रहे हैं।
कनाडा की फॉरेन अफेयर्स मिनिस्टर एनीता आनंद ने अक्टूबर 2025 में भारत दौरे के दौरान कहा, “हम भारतीय छात्रों का स्वागत करना चाहते हैं, लेकिन इमिग्रेशन सिस्टम की अखंडता को बचाना जरूरी है।” लेकिन आंकड़े कुछ और ही बयान कर रहे हैं – जनवरी से जून 2025 में स्टडी परमिट्स 70% गिरकर 36,417 रह गए, जबकि 2024 में यह 1,25,034 था। कुल मिलाकर, कनाडा ने 2025 के लिए 4.37 लाख स्टडी परमिट्स का कोटा तय किया, जो 2024 से 10% कम है।
रिजेक्शन के पीछे क्या हैं मुख्य कारण?
कनाडा सरकार ने 2024 से ही इंटरनेशनल स्टूडेंट्स पर सख्ती बढ़ा दी है, जो 2025 में चरम पर पहुंच गई। मुख्य वजहें:
फाइनेंशियल और लैंग्वेज रिक्वायरमेंट्स टाइट: न्यूनतम फाइनेंशियल प्रूफ CA$20,635 (करीब 13 लाख रुपये) कर दिया गया। IELTS जैसे टेस्ट्स में सख्त स्कोरिंग।
प्रोविंशियल अटेस्टेशन लेटर (PAL): हर एप्लीकेंट को प्रांत स्तर का PAL लेना जरूरी, जो ब्यूरोक्रेटिक हर्डल बढ़ाता है।
फ्रॉड कंट्रोल: फर्जी एडमिशन लेटर्स और एजेंट्स के केस बढ़े। जालंधर के एजेंट बृजेश मिश्रा जैसे मामलों ने IRCC को अलर्ट कर दिया।
हाउसिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रेशर: तेजी से बढ़ते स्टूडेंट्स से हाउसिंग क्राइसिस पैदा हुआ, जिसे कंट्रोल करने के लिए 40% कटौती की गई।
डिप्लोमैटिक टेंशन: 2023 के जस्टिन ट्रूडो के आरोपों से भारत-कनाडा रिश्ते खराब हुए, हालांकि जून 2025 में पीएम मोदी के कनाडा दौरे से थोड़ी राहत मिली।
ग्लोबल रिजेक्शन रेट 40% रहने के बावजूद, भारतीयों के लिए 74-80% है, जबकि चाइनीज एप्लीकेंट्स का सिर्फ 24%। इंडियन हाई कमीशन ने कहा कि वे रिजेक्शन्स से अवगत हैं, लेकिन परमिट जारी करना कनाडा का अधिकार है।
आवेदनों में 80% गिरावट: छात्रों पर क्या असर?
दो साल (2023-2025) में भारतीय आवेदन 20,900 से घटकर 4,515 हो गए, यानी 78% की गिरावट। इससे कनाडाई यूनिवर्सिटीज में भारतीय एनरोलमेंट 50% तक गिरा, जो अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। छात्रों के लिए यह सिर्फ वीजा नहीं, बल्कि PR (परमानेंट रेसिडेंसी) का सपना टूटने जैसा है। परिवार लाखों रुपये IELTS, एप्लीकेशन और कोर्सेज पर खर्च करते हैं, फिर रिजेक्शन से निराशा।
वैकल्पिक डेस्टिनेशन्स: जर्मनी टॉप पर, ऑस्ट्रेलिया-यूके भी पॉपुलर
भारतीय छात्र अब कनाडा से दूर हो रहे हैं। 2025 में जर्मनी सबसे पॉपुलर बन गया, जहां फ्री एजुकेशन और जॉब ऑपर्चुनिटीज आकर्षित कर रही हैं। ऑस्ट्रेलिया में 20% और यूके में 15% भारतीय वीजा अप्रूवल बढ़े। कुल विदेश जाने वाले भारतीय छात्रों में कनाडा का शेयर 9% रह गया।
एक्सपर्ट्स की सलाह: मजबूत एप्लीकेशन से बढ़ाएं चांस
यूनिवर्सिटी लिविंग के फाउंडर सौरभ अरोड़ा कहते हैं, “यह कोर्स करेक्शन है, न कि बंदी। फाइनेंशियल क्रेडिबिलिटी और अकादमिक प्रूफ मजबूत रखें।” KC ग्लोबेड के कमल छाबड़ा सुझाते हैं: फ्रॉड एजेंट्स से बचें, ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स यूज करें। अगर रिजेक्ट हो, तो अपील करें या अल्टरनेटिव कंट्री चुनें।
यह बदलाव भारतीय स्टूडेंट्स के लिए चेतावनी है – अब प्लानिंग पहले से ज्यादा स्मार्ट होनी चाहिए। कनाडा अभी भी वैल्यूएबल है, लेकिन विकल्पों पर नजर रखें। अपडेट्स के लिए बने रहें!
