अन्तर्राष्ट्रीय

रूस की खतरनाक न्यूक्लियर पनडुब्बी ‘खबरोवस्क’ का लॉन्च: अमेरिका-नाटो में चिंता की लहर, ‘पोसीडॉन’ ड्रोन से बढ़ा वैश्विक खतरा

रूस की खतरनाक न्यूक्लियर पनडुब्बी ‘खबरोवस्क’ का लॉन्च: अमेरिका-नाटो में चिंता की लहर, ‘पोसीडॉन’ ड्रोन से बढ़ा वैश्विक खतरा

रूस ने अपनी सबसे उन्नत और घातक न्यूक्लियर पनडुब्बी खबरोवस्क (Khabarovsk) का सफल लॉन्च कर दिया, जो साइबेरियन शहर सेवरोडविंस्क के सेवमाश शिपयार्ड में शनिवार (1 नवंबर) को संपन्न हुआ। रक्षा मंत्रालय ने इसे “राष्ट्रीय हितों की रक्षा का महत्वपूर्ण कदम” बताया, लेकिन अमेरिका और नाटो ने इसे “चिंताजनक विकास” करार देते हुए अपनी नौसेना की निगरानी तेज कर दी है। यह पनडुब्बी प्रोजेक्ट 09851 का हिस्सा है, जो न्यूक्लियर-पावर्ड ‘पोसीडॉन’ गिगा-टॉरपीडो ड्रोन को कैरी करने में सक्षम है—एक ऐसा हथियार जो महाद्वीपीय दूरी तय कर तटीय शहरों या शिप्स को मेगाटन थर्मोन्यूक्लियर हमले से नष्ट कर सकता है। नौसेना कमांडर एडमिरल अलेक्जेंडर मोइसेव ने चैंपेन की बोतल तोड़कर लॉन्च किया, जबकि रक्षा मंत्री अंद्रेई बेलूसोव ने कहा, “यह पनडुब्बी आधुनिक हथियारों और रोबोटिक सिस्टम से लैस है, जो रूस की समुद्री सीमाओं को अजेय बनाएगी।”

लॉन्च समारोह और पनडुब्बी की क्षमताएं

समारोह में रूसी नौसेना के उच्च अधिकारी मौजूद थे, जहां पनडुब्बी को डॉक से रोल आउट किया गया। खबरोवस्क एक ‘हैवी न्यूक्लियर-पावर्ड मिसाइल क्रूजर’ है, जिसकी लंबाई 110 मीटर और विस्थापन 10,000 टन से अधिक है। न्यूक्लियर रिएक्टर से चलने वाली यह पनडुब्बी अनलिमिटेड रेंज और गहराई तक गोता लगा सकती है। मुख्य हथियार पोसीडॉन—एक स्वायत्त न्यूक्लियर टॉरपीडो—जो हाइपरसोनिक स्पीड (100 नॉट्स) से हमला करता है और पारंपरिक सबमरीन हंटिंग सिस्टम से बच सकता है। रूस का दावा है कि यह ‘पोस्ट-डूम्सडे’ हथियार है, जो किसी भी हमले का जवाब दे सकता है। प्रोजेक्ट 2014 में शुरू हुआ था, और 2019 में कील रखी गई—यह बोरे-क्लास का उन्नत संस्करण है।

अमेरिका-नाटो की चिंता: ‘आक्रामक विस्तार’

अमेरिकी पेंटागन ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “रूस का यह लॉन्च यूक्रेन युद्ध के बीच नौसेना विस्तार का संकेत है। पोसीडॉन जैसी क्षमता वैश्विक स्थिरता को खतरे में डालती है।” यूएस नेवी ने अटलांटिक और आर्कटिक में अपनी सबमरीन फ्लीट की पेट्रोलिंग बढ़ा दी। नाटो महासचिव जेन्स स्टोल्टेनबर्ग ने कहा, “यह यूरो-अटलांटिक सुरक्षा के लिए खतरा है। हम अपनी रक्षा रणनीति को अपडेट करेंगे।” यूके और फ्रांस ने भी चिंता जताई, क्योंकि यह पनडुब्बी ब्लैक सी, बैरेंट्स सी या प्रशांत महासागर में तैनात हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रूस की ‘एंटी-एक्सेस/एरिया डिनायल’ (A2/AD) क्षमता को दोगुना कर देगी।

यह लॉन्च रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच रूसी सैन्य आधुनिकीकरण का हिस्सा है, जो पश्चिमी देशों को सतर्क कर रहा है। रूस ने इसे “रक्षात्मक” बताया, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि यह शीत युद्ध जैसी तनाव बढ़ा सकता है।

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