कक्षा 3 से शुरू होगी AI की पढ़ाई: NCERT किताबें दिसंबर 2025 तक तैयार, 2026-27 से लागू
कक्षा 3 से शुरू होगी AI की पढ़ाई: NCERT किताबें दिसंबर 2025 तक तैयार, 2026-27 से लागू
भारत की शिक्षा प्रणाली में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। शिक्षा मंत्रालय ने घोषणा की है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग (CT) को स्कूली पाठ्यक्रम में कक्षा 3 से शामिल किया जाएगा। यह कदम शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगा, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और स्कूल शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा (NCF SE) 2023 के अनुरूप है। इसका उद्देश्य बच्चों को डिजिटल दुनिया के लिए तैयार करना है, ताकि वे AI के नैतिक उपयोग और समस्या-समाधान की क्षमता सीख सकें।
घोषणा का बैकग्राउंड
30 अक्टूबर 2025 को शिक्षा मंत्रालय ने यह फैसला लिया, जो 29 अक्टूबर को हुई स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन के बाद आया। इस बैठक में CBSE, NCERT, केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS), नवोदय विद्यालय समिति (NVS) और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि शामिल थे। केंद्रीय शिक्षा सचिव संजय कुमार ने कहा कि AI को “बेसिक यूनिवर्सल स्किल” की तरह देखा जाएगा, जो हर बच्चे के लिए जरूरी है। CBSE ने IIT मद्रास के प्रोफेसर कार्तिक रमन की अगुवाई में एक विशेषज्ञ समिति गठित की है, जो AI और CT पाठ्यक्रम विकसित करेगी।
NCERT की किताबें और सामग्री
तैयारी का समय: दिसंबर 2025 तक NCERT द्वारा टेक्स्टबुक, हैंडबुक और डिजिटल रिसोर्सेज (वीडियो-बेस्ड लर्निंग मटेरियल) तैयार हो जाएंगे।
समावेशी दृष्टिकोण: पाठ्यक्रम NCF SE 2023 के तहत डिजाइन किया जाएगा, जिसमें समय आवंटन और संसाधनों का एकीकरण शामिल है। यह सभी स्कूलों (सरकारी, निजी, CBSE, राज्य बोर्ड) में लागू होगा।
फोकस एरिया: कक्षा 3 से शुरू होकर उच्च कक्षाओं तक बढ़ेगा। शुरुआती स्तर पर बेसिक कॉन्सेप्ट्स जैसे पैटर्न रिकग्निशन, लॉजिकल थिंकिंग और AI के सरल एथिकल पहलू सिखाए जाएंगे।
शिक्षकों की ट्रेनिंग और लागू करने की योजना
शिक्षकों को NISHTHA प्रोग्राम के तहत ग्रेड-स्पेसिफिक ट्रेनिंग दी जाएगी, जो समयबद्ध होगी। NCERT के वीडियो रिसोर्स और हैंडबुक शिक्षकों को सपोर्ट करेंगे। CBSE-NCERT के बीच एक कोऑर्डिनेशन कमिटी बनाई गई है, जो क्वालिटी कंट्रोल और स्मूथ इंटीग्रेशन सुनिश्चित करेगी। शिक्षा मंत्रालय की संयुक्त सचिव प्राची पांडे ने जोर दिया कि टाइमलाइन्स का सख्ती से पालन किया जाएगा।
महत्व और प्रभाव
यह कदम भारत को टेक्नोलॉजी-ड्रिवन फ्यूचर के लिए तैयार करेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि AI शिक्षा से बच्चे न सिर्फ तकनीकी स्किल्स सीखेंगे, बल्कि डेटा प्राइवेसी, बायस और सस्टेनेबल यूज जैसे नैतिक मुद्दों पर भी जागरूक होंगे। हालांकि, चुनौतियां भी हैं—कई स्कूलों में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है, जिसे दूर करने की जरूरत है। नेचरनर्चर के को-फाउंडर अक्षल अग्रवाल ने इसे “प्रोग्रेसिव स्टेप” बताया, लेकिन इंप्लीमेंटेशन पर फोकस की सलाह दी।
यह पहल NEP 2020 की दिशा में एक मील का पत्थर है, जो भारत को ग्लोबल AI लीडर बनाने की दौड़ में आगे ले जाएगी। अगर आप पैरेंट्स या टीचर्स हैं, तो NCERT की वेबसाइट पर अपडेट्स चेक करें।
