धर्म

अक्षय नवमी 31 अक्टूबर को, सूर्योदय से सूर्यास्त तक रहेगा पुण्यकाल

अक्षय नवमी 31 अक्टूबर को, सूर्योदय से सूर्यास्त तक रहेगा पुण्यकाल

आंवले के पेड़ की पूजा, दान-पुण्य से मिलता है अक्षय फल

हिंदू पंचांग के अनुसार अक्षय नवमी इस वर्ष 31 अक्टूबर 2025 (शुक्रवार) को मनाई जाएगी। इसे आंवला नवमी या कुश्मांड नवमी भी कहते हैं। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पड़ने वाली यह तिथि सूर्योदय से सूर्यास्त तक अक्षय पुण्य प्रदान करती है।

तिथि-मुहूर्त:

– नवमी तिथि प्रारंभ: 30 अक्टूबर, दोपहर 2:45 बजे

– नवमी तिथि समाप्त: 31 अक्टूबर, दोपहर 3:12 बजे

– पूजा का शुभ मुहूर्त: सूर्योदय (सुबह 6:30 बजे) से सूर्यास्त (शाम 5:45 बजे) तक

– ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:30 से 5:15 बजे (विशेष पूजा के लिए)

परंपरा और महत्व:

1. आंवले की पूजा: घर के पास आंवले का पेड़ न हो तो घर में आंवला लाकर पूजा करें। पेड़ को दूध, जल, फूल चढ़ाएं। परिक्रमा करें। मान्यता है कि इससे पितरों को अक्षय तृप्ति मिलती है।

2. दान-पुण्य: आंवला, फल, अनाज, वस्त्र दान करें। ब्राह्मण भोजन कराएं।

3. व्रत-उपवास: कई लोग फलाहार या निर्जला व्रत रखते हैं।

4. मथुरा-वृंदावन में विशेष: यहां यम द्वितीया के बाद गोवर्धन पूजा के साथ अक्षय नवमी मनाई जाती है।

धार्मिक मान्यता:

पौराणिक कथा के अनुसार, सत्ययुग में इस दिन भगवान विष्णु ने आंवले के पेड़ के नीचे विश्राम किया था। पितृ दोष निवारण और सौभाग्य के लिए यह तिथि उत्तम मानी जाती है। वैज्ञानिक दृष्टि से आंवला विटामिन-C का भंडार है, इस दिन सेवन स्वास्थ्यवर्धक।

क्या न करें:

– पेड़ काटना, आंवला तोड़ना वर्जित।

– कलह, क्रोध से बचें।

संदेश: ज्योतिषी पंडित कहते हैं, “यह तिथि क्षय रहित है। छोटा सा दान भी अक्षय फल देता है।” देशभर में मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होगी।

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