राजनीति

बिहार चुनाव में वक्फ बिल पर गरमाई सियासत, RJD के बयान पर लेफ्ट-कांग्रेस का समर्थन

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बीच वक्फ (संशोधन) बिल मुद्दा गरमाता जा रहा है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव ने रविवार को कटिहार की जनसभा में धमाकेदार बयान देते हुए कहा, “हमारी सरकार बनी तो वक्फ बोर्ड बिल को कूड़ेदान में फेंक देंगे।” यह बयान अप्रैल 2025 में संसद द्वारा पारित वक्फ (संशोधन) कानून-2024 पर सीधा हमला था, जिसे एनडीए सरकार ने मुस्लिम समुदाय के हितों के लिए पारदर्शी बताया था। तेजस्वी का यह रुख सीमांचल के मुस्लिम बहुल इलाकों में वोटरों को एकजुट करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जहां 2020 में AIMIM के उदय से महागठबंधन को नुकसान हुआ था।

इससे पहले शनिवार को खगड़िया में RJD के एमएलसी कारी शोएब ने तेजस्वी के मंच से ऐलान किया था, “तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री बने तो वक्फ बिल समेत सभी विवादास्पद कानून फाड़ देंगे।” शोएब ने इसे मुस्लिम समाज की जमीनों पर “डाका” रोकने का वादा बताया। तेजस्वी ने मंच पर चुप्पी साधी, लेकिन रविवार को खुद आगे बढ़ते हुए कहा, “यह चुनाव संविधान और भाईचारे की रक्षा की लड़ाई है। मेरे पिता लालू प्रसाद ने कभी सांप्रदायिक ताकतों से समझौता नहीं किया।” उनका यह बयान किशनगंज और कटिहार जैसे जिलों में गूंजा, जहां मुस्लिम वोटर 40% से अधिक हैं।

तेजस्वी के बयान को तुरंत कांग्रेस और वाम दलों का समर्थन मिला। कांग्रेस नेता शक्ति सिंह गोहिल ने कहा, “वक्फ बिल असंवैधानिक है। यह मुस्लिम महिलाओं और पिछड़ों के अधिकारों पर हमला है। महागठबंधन इसे रद्द करेगा।” CPI(M) के बिहार सचिव मल्हार ने इसे “भाजपा की बांटने वाली राजनीति” बताते हुए समर्थन जताया। लेफ्ट पार्टियों ने इसे “लोकतंत्र बचाओ” अभियान से जोड़ा। NDTV को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में तेजस्वी ने दोहराया, “भाजपा संविधान विरोधी है। बिहार के लोग होशियार हैं, वे बांटने वालों को जवाब देंगे।”

एनडीए ने कड़ा पलटवार किया। BJP सांसद मनोज तिवारी ने कहा, “RJD गुमराह कर रही है। वक्फ बिल संसद में पारित होता है, विधानसभा में नहीं। ये अपराधियों का राज चाहते हैं।” JDU ने इसे “वोटबैंक की राजनीति” करार दिया। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में बिल के गैर-मुस्लिम सदस्यों वाले प्रावधान पर रोक लगाई थी, लेकिन अन्य हिस्सों को बरकरार रखा। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह मुद्दा सीमांचल में ओवैसी फैक्टर को कमजोर करेगा, लेकिन पूरे बिहार में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण बढ़ा सकता है।

महागठबंधन में RJD-कांग्रेस-लेफ्ट की एकजुटता दिख रही है, लेकिन नौ सीटों पर फ्रेंडली फाइट से तनाव है। तेजस्वी ने रोजगार वादों के साथ वक्फ को जोड़कर मुस्लिम-यादव गठजोड़ मजबूत करने की कोशिश की। चुनाव आयोग ने 20 अक्टूबर से सात चरणों में मतदान का ऐलान किया है। क्या वक्फ मुद्दा महागठबंधन को फायदा देगा या एनडीए का हथियार बनेगा? नतीजे 5 दिसंबर को।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *