इस्तांबुल में पाक-अफगान वार्ता का दूसरा दौर शुरू: ‘खुले युद्ध’ की धमकी के बीच शांति की उम्मीद, दोहा युद्धविराम को मजबूत करने पर फोकस
इस्तांबुल में पाक-अफगान वार्ता का दूसरा दौर शुरू: ‘खुले युद्ध’ की धमकी के बीच शांति की उम्मीद, दोहा युद्धविराम को मजबूत करने पर फोकस
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा तनाव को कम करने के लिए इस्तांबुल में शनिवार (25 अक्टूबर) को शुरू हुए वार्ता के दूसरे दौर ने क्षेत्रीय शांति की नई उम्मीद जगाई है। तुर्की की मेजबानी में हो रही इस बैठक में दोनों पक्षों ने दोहा युद्धविराम को लंबे समय तक लागू करने के लिए ठोस तंत्र विकसित करने पर चर्चा की। हालांकि, बैठक से ठीक पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने विफलता पर “खुले युद्ध” की चेतावनी जारी की, जिससे तनाव का ग्राफ ऊंचा रहा। वार्ता रविवार (26 अक्टूबर) तक चलेगी, और इसके नतीजे सीमा पर स्थिरता ला सकते हैं।
दोहा से इस्तांबुल: युद्धविराम की राह पर कदम
पिछले हफ्ते कतर के दोहा में हुई पहली वार्ता में दोनों देशों ने तत्काल युद्धविराम पर सहमति जताई थी, जो अब तक बरकरार है। रविवार को दोहा में पाकिस्तानी रक्षा मंत्री आसिफ और अफगान रक्षा मंत्री मुल्ला मोहम्मद याकूब ने हस्ताक्षर किए थे, जिसमें दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ शत्रुतापूर्ण कार्रवाई न करने का वादा किया। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर हुसैन अंद्राबी ने कहा, “दोहा समझौता फलदायी रहा। पिछले चार-पांच दिनों में कोई बड़ा आतंकी हमला नहीं हुआ। इस्तांबुल में हम एक ठोस निगरानी तंत्र स्थापित करना चाहते हैं।”
इस्लामाबाद के अनुसार, यह तंत्र अफगान मिट्टी से पाकिस्तान पर हमलों को रोकने के लिए इंटेलिजेंस शेयरिंग और संयुक्त निगरानी पर केंद्रित होगा। अफगान प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व गृह मंत्रालय के उपमंत्री हाजी नजीब कर रहे हैं, जिसमें अनस हक्कानी (गृह मंत्री के भाई) और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। पाकिस्तानी पक्ष में सुरक्षा अधिकारी हैं, जो क्रॉस-बॉर्डर आतंकवाद पर जोर दे रहे हैं। तुर्की ने मध्यस्थता की सराहना की है और कहा कि यह क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
आसिफ की धमकी: ‘अगर समझौता न हुआ, तो खुली जंग’
बैठक से पहले पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सियालकोट से टेलीविजन पर कहा, “अफगानिस्तान शांति चाहता है, लेकिन अगर इस्तांबुल में समझौता न हुआ, तो हमारे पास उनका साथ खुला युद्ध लड़ने का विकल्प है।”
यह बयान दोहा युद्धविराम के बावजूद आया, जो 2021 में तालिबान के काबुल पर कब्जे के बाद सबसे घातक सीमा संघर्ष के बाद था। इस्लामाबाद अफगानिस्तान पर टीटीपी (पाकिस्तानी तालिबान) जैसे समूहों को शरण देने का आरोप लगाता है, जबकि काबुल पाकिस्तानी हवाई हमलों को संप्रभुता का उल्लंघन बताता है।
आसिफ ने कहा, “युद्धविराम अब तक पालन हो रहा है, लेकिन लंबे समय के लिए तंत्र जरूरी है।” सोशल मीडिया पर X (पूर्व ट्विटर) पर यह बयान वायरल हो गया, जहां यूजर्स ने इसे “कूटनीति या युद्ध की धमकी” करार दिया। एक यूजर ने लिखा, “यह कूटनीति है या काउंटडाउन?”
सीमा संघर्ष का पृष्ठभूमि: 2021 के बाद सबसे घातक
इस महीने की शुरुआत में काबुल में विस्फोटों के बाद तनाव भड़का, जिसे अफगानिस्तान ने पाकिस्तान का काम बताया। जवाब में अफगान सेना ने सीमा पर हमला किया, तो पाकिस्तान ने “सटीक हवाई हमले” किए। 2,611 किमी लंबी डुरंड लाइन पर संघर्ष में दर्जनों सैनिक और नागरिक मारे गए, और प्रमुख सीमा क्रॉसिंग बंद हो गए। व्यापार रुका, और अफगान शरणार्थी पाकिस्तान से लौटे। कतर और तुर्की की मध्यस्थता से दोहा युद्धविराम हुआ, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि टीटीपी जैसे समूहों पर कार्रवाई न होने से समस्या बरकरार है।
इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के विश्लेषक इब्राहीम बहिस ने कहा, “इस्तांबुल में इंटेलिजेंस शेयरिंग पर सहमति बनेगी, जो पाकिस्तान को एकतरफा हमलों से रोकेगी।” अफगानिस्तान के लिए प्राथमिकता क्षेत्रीय अखंडता है, जबकि पाकिस्तान आतंकवाद रोकने पर जोर दे रहा है।
नतीजों की उम्मीद: स्थिरता या नया संकट?
वार्ता रविवार को समाप्त होगी, और इसके बाद निगरानी तंत्र पर अमल होगा। पाकिस्तान ने कहा कि अगर टीटीपी पर कार्रवाई हुई, तो सीमा खुल जाएगी। भारत ने भी चिंता जताई है, क्योंकि यह क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित करता है। क्या यह बातचीत युद्धविराम को स्थायी बनाएगी, या आसिफ की धमकी हकीकत बनेगी? नतीजे जल्द सामने आ सकते हैं।
