काशी जगमगाएगी 25 लाख दीयों से: देव दीपावली पर 3D मैपिंग, लेजर शो और दिव्य आरती का भव्य नजारा, 3-5 नवंबर तक धूम
काशी जगमगाएगी 25 लाख दीयों से: देव दीपावली पर 3D मैपिंग, लेजर शो और दिव्य आरती का भव्य नजारा, 3-5 नवंबर तक धूम
काशी विश्वनाथ की नगरी वाराणसी एक बार फिर आस्था और रोशनी के सागर में डूबने को तैयार है। कार्तिक पूर्णिमा (5 नवंबर 2025) पर मनाए जाने वाले देव दीपावली महोत्सव को भव्य बनाने के लिए प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। इस बार 84 घाटों पर 25 लाख दीयों की रोशनी से गंगा तट जगमगाएगा, जबकि चेत सिंह घाट और गंगा द्वार घाट पर अत्याधुनिक 3D प्रोजेक्शन मैपिंग और लेजर शो का आयोजन होगा। ये शो काशी की धार्मिक, आध्यात्मिक और पौराणिक इतिहास को जीवंत करेंगे, जिसमें शिव और गंगा की कथाएं प्रमुख होंगी। पर्यटन विभाग ने इसे ‘देवों की दिवाली’ के रूप में दुनिया भर के पर्यटकों को आमंत्रित किया है, और अनुमान है कि 10 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचेंगे।
देव दीपावली 2025: तिथि और मुख्य आकर्षण
– तिथि: 3 से 5 नवंबर 2025 (कार्तिक शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी से पूर्णिमा तक)।
– दीयों का भव्य प्रदर्शन: 25 लाख पारंपरिक मिट्टी के दीये 84 घाटों पर सजेगें, जिसमें 3 लाख से अधिक गाय के गोबर से बने पर्यावरण-अनुकूल दीये शामिल होंगे। ये दीये गंगा जल पर तैरेंगे, जो रात के अंधेरे को दिव्य प्रकाश से भर देंगे।
– 3D प्रोजेक्शन मैपिंग और लेजर शो: चेत सिंह घाट पर 24 हाई-पावर प्रोजेक्टर्स से 25 मिनट का शो, जो संतान धर्म की कथाओं, गंगा अवतरण और काशी के इतिहास को दर्शाएगा। शो का समय: शाम 5:30, 7:00, 8:00 और 8:45 बजे (चार बार दैनिक)। गंगा द्वार घाट पर भी समान आयोजन होगा।
– दिव्य आरती: दशाश्वमेध घाट पर गंगा महाआरती का भव्य स्वरूप, जिसमें 100 से अधिक ब्राह्मणों की भागीदारी होगी। ग्रीन फायरक्रैकर्स शो गंगा तट को और रंगीन बना देगा।
– अन्य कार्यक्रम: सांस्कृतिक संगीत, भजन-कीर्तन, और पर्यटन मंत्रालय के तहत विशेष प्रदर्शन। नमो घाट का उद्घाटन भी होगा।
वाराणसी के डीएम कौशल राज शर्मा ने बताया, “यह आयोजन काशी को वैश्विक पटल पर चमकाने का प्रयास है। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इको-फ्रेंडली दीये और ग्रीन फायरक्रैकर्स का उपयोग किया जाएगा। सुरक्षा के लिए 5,000 पुलिसकर्मी तैनात होंगे।” पर्यटन विभाग ने कहा कि 2024 में 21 लाख दीयों से जगमगाई काशी ने रिकॉर्ड 10 लाख पर्यटकों को आकर्षित किया था; 2025 में यह संख्या और बढ़ेगी।
धार्मिक महत्व: देवों की दिवाली
देव दीपावली भगवान शिव के त्रिपुरासुर पर विजय का प्रतीक है। मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा पर देवता गंगा स्नान के लिए काशी आते हैं। इस दिन दीपदान से पाप नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। काशी में यह पर्व 1985 से पंचगंगा घाट से शुरू हुआ, जो अब पूरे तट पर फैल चुका है।
यह महोत्सव न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि पर्यटन को बढ़ावा देने वाला भी। क्या आप भी काशी पहुंचकर इस दिव्य नजारे का हिस्सा बनेंगे?
