उत्तराखंड

आदि कैलाश यात्रा पर अस्थायी रोक: अल्ट्रा मैराथन के कारण यात्रियों की एंट्री बैन, राज्य स्थापना दिवस तक रहेगी बंद

आदि कैलाश यात्रा पर अस्थायी रोक: अल्ट्रा मैराथन के कारण यात्रियों की एंट्री बैन, राज्य स्थापना दिवस तक रहेगी बंद

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित आदि कैलाश धाम की यात्रा पर अचानक ब्रेक लग गया है। जिला प्रशासन ने गुंजी क्षेत्र में आयोजित होने वाले ‘आदि कैलाश अल्ट्रा मैराथन’ के कारण यात्रियों के लिए इनरलाइन परमिट जारी करने पर रोक लगा दी है। यह फैसला 24 अक्टूबर से प्रभावी हो गया है और उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस (9 नवंबर 2025) तक चलेगा। इस बीच, मैराथन इवेंट को सफलतापूर्वक संपन्न करने के लिए क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित और व्यवस्थित रखा जाएगा। श्रद्धालुओं को निराशा हुई है, लेकिन प्रशासन का कहना है कि यह कदम सुरक्षा और आयोजन की सुगमता के लिए जरूरी है।

आदि कैलाश अल्ट्रा मैराथन एक एडवेंचर स्पोर्ट इवेंट है, जो 14,000 फीट की ऊंचाई पर गुंजी से शुरू होकर आदि कैलाश की ओर जाती है। यह इवेंट पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित किया जा रहा है, जिसमें सैकड़ों रनर्स देश-विदेश से हिस्सा लेंगे। जिला मजिस्ट्रेट विनोद गोस्वामी ने बताया, “मैराथन के दौरान यात्रा मार्ग पर भारी भीड़ और ट्रैफिक का दबाव पड़ सकता है, जो यात्रियों की सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा करेगा। इसलिए, परमिट सिस्टम को अस्थायी रूप से सस्पेंड कर दिया गया है। इवेंट समाप्त होने के बाद 10 नवंबर से यात्रा फिर पटरी पर लौट आएगी।” इस साल मई से शुरू हुई यात्रा में अब तक 23,532 से अधिक श्रद्धालु आदि कैलाश के दर्शन कर चुके हैं।

घटना की जानकारी देते हुए धारचूला के एसडीएम जीतेंद्र वर्मा ने कहा कि मैराथन के आयोजन के लिए गुंजी शिविर और आसपास के क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा, मेडिकल सुविधाएं और ट्रैक क्लियरिंग की व्यवस्था की जा रही है। “यात्रियों की संख्या बढ़ रही थी, लेकिन इवेंट के कारण मार्ग पर अतिरिक्त दबाव न पड़े, इसके लिए यह कदम उठाया गया।” पर्यटन विभाग ने भी पुष्टि की कि यह रोक अस्थायी है और विंटर टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए आदि कैलाश को अभी भी प्रमुख डेस्टिनेशन माना जा रहा है।

आदि कैलाश, जो पंच कैलाश में दूसरा सबसे पवित्र स्थल है, तिब्बत सीमा के पास स्थित है। यहां का मार्ग धारचूला से तवाघाट, गुंजी होते हुए जोलिंगकॉन्ग तक जाता है, जहां से पैदल दर्शन होते हैं। मानसून के बाद भूस्खलन की आशंका को देखते हुए पहले ही जुलाई में परमिट बंद किए गए थे, लेकिन अब यह नया फैसला मैराथन से जुड़ा है। कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) ने प्रभावित यात्रियों को रिफंड या डेट चेंज का विकल्प दिया है।

यह फैसला श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसे ‘अनावश्यक’ बताया, जबकि कुछ ने सुरक्षा को प्राथमिकता देने की सराहना की। क्या मैराथन के बाद यात्रा में तेजी आएगी, या विंटर सीजन में और चुनौतियां होंगी?

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