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बॉलीवुड के मशहूर एक्टर सतीश शाह का निधन, इंडस्ट्री में दौड़ी शोक की लहर

भारतीय सिनेमा और टेलीविजन जगत को आज एक बड़ा सदमा लगा है। दिग्गज अभिनेता सतीश शाह का निधन हो गया है। 74 वर्षीय सतीश शाह का शनिवार दोपहर करीब 2:30 बजे मुंबई के हिंदूजा अस्पताल में निधन हुआ, जहां वे किडनी फेलियर से जूझ रहे थे। उनकी अचानक बिगड़ती तबीयत के कारण उन्हें घर से अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन डॉक्टरों की सारी कोशिशें नाकाम रहीं। सतीश शाह की मौत की खबर से बॉलीवुड और टीवी इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके साथ काम कर चुके कलाकारों ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी है, और अंतिम संस्कार की तैयारियां चल रही हैं।

सतीश शाह का जन्म 1950 या 1951 में गुजरात के मांडवी में एक कच्छी गुजराती परिवार में हुआ था। उन्होंने 1978 में फिल्म ‘अरविंद देसाई की अजीब दास्तान’ से अपने करियर की शुरुआत की। लेकिन उन्हें असली पहचान 1983 की कल्ट क्लासिक ‘जाने भी दो यारो’ में म्यूनिसिपल कमिश्नर डी’मेलो के किरदार से मिली। इसके बाद 1984 के लोकप्रिय टीवी सीरियल ‘ये जो है जिंदगी’ में उन्होंने 55 एपिसोड्स में 55 अलग-अलग किरदार निभाए, जो उस दौर का आइकॉनिक शो बन गया। 1995 के ‘फिल्मी चक्कर’ में प्रकाश के रोल ने उन्हें घर-घर पहचान दिलाई। लेकिन सतीश शाह का सबसे यादगार किरदार 2004 के सिटकॉम ‘सराभाई वर्सेज सराभाई’ में इंद्रवर्धन सराभाई का रहा, जहां रत्ना पाठक शाह के साथ उनकी जोड़ी दर्शकों का दिल जीत ले गई। इस शो ने उन्हें कॉमेडी के बादशाह के रूप में स्थापित कर दिया।

फिल्मों में भी सतीश शाह ने 250 से ज्यादा प्रोजेक्ट्स में काम किया। ‘हम आपके हैं कौन’, ‘हम साथ-साथ हैं’, ‘कल हो ना हो’ (2003), ‘मैं हूं ना’ (2004), ‘फना’ (2006) और ‘ओम शांति ओम’ (2007) जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में उनके किरदार आज भी याद किए जाते हैं। वे ‘कॉमेडी सर्कस’ के जज भी रहे। 1972 में डिजाइनर माधु शाह से शादी करने वाले सतीश के दो बच्चे हैं। उनकी पत्नी माधु ने बताया कि सतीश हमेशा हंसमुख रहते थे, लेकिन लंबे समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे।

सतीश शाह के निधन पर बॉलीवुड के दिग्गजों ने शोक व्यक्त किया। जॉनी लीवर ने X पर लिखा, “बहुत दुखद है। 40 सालों के दोस्त को खो दिया। दो दिन पहले ही बात हुई थी।” निर्देशक अशोक पंडित ने वीडियो शेयर कर कहा, “सदमा लग रहा है। किडनी फेलियर से उनका निधन हो गया। इंडस्ट्री को बड़ा नुकसान।” सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (CINTAA) ने भी श्रद्धांजलि दी। रत्ना पाठक शाह ने कहा, “इंद्रवर्धन के बिना सराभाई अधूरा।” सतीश कौशिक को याद करते हुए सतीश शाह ने कभी कहा था कि वे हमेशा हंसी छिपाकर दर्द सहते थे—आज उनकी कमी सिनेमा जगत को हमेशा खलेगी।

सतीश शाह की विदाई के साथ एक दौर समाप्त हो गया। उनके फैंस और सह-कलाकारों के लिए यह अपूरणीय क्षति है। बॉलीवुड में मातम का यह सिलसिला कब थमेगा?

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