पाकिस्तान ने तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) पर लगाया बैन: गाजा मार्च की हिंसा के बाद कड़ा कदम, जानें पूरी कहानी
पाकिस्तान ने तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) पर लगाया बैन: गाजा मार्च की हिंसा के बाद कड़ा कदम, जानें पूरी कहानी
पाकिस्तान सरकार ने गुरुवार को कट्टरपंथी इस्लामवादी पार्टी तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) पर एंटी-टेररिज्म एक्ट 1997 के तहत पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। यह फैसला पंजाब प्रांत सरकार की सिफारिश पर फेडरल कैबिनेट ने लिया, जो अक्टूबर के शुरुआती हफ्ते में लाहौर के आसपास हुई हिंसक झड़पों के बाद आया। TLP के “गाजा सॉलिडैरिटी मार्च” के दौरान पुलिस से भिड़ंत में कम से कम एक SHO और चार नागरिक मारे गए, जबकि 1,600 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए। यह बैन TLP पर पिछले चार सालों में दूसरी बार लगाया गया है, जो देश की राजनीतिक अस्थिरता को दर्शाता है।
TLP की स्थापना 2015 में खादिम हुसैन रिजवी ने की थी, जो अब व्हीलचेयर-बाउंड हैं और वर्तमान नेता उनके बेटे साद रिजवी हैं। यह पार्टी बरेलवी सुन्नी इस्लाम की विचारधारा पर आधारित है और पाकिस्तान के अपवित्रता (ब्लास्फेमी) कानून की कट्टर समर्थक है, जो इस्लाम का अपमान करने पर मौत की सजा का प्रावधान करता है। 2018 के आम चुनावों में TLP ने ब्लास्फेमी मुद्दे पर जोर देकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में जगह बनाई। पार्टी अक्सर सड़क प्रदर्शनों के जरिए सरकार को ब्लैकमेल करती रही है, जिससे कई सरकारें मजबूर हुईं समझौते करने के लिए।
पहली बार 2021 में TLP को बैन किया गया था, जब चार्ली हेब्दो कार्टून विवाद पर फ्रांसीसी राजदूत को निष्कासित करने की मांग को लेकर देशव्यापी हिंसक विरोध हुए। इन प्रदर्शनों में दो पुलिसकर्मियों की मौत हुई और सरकार ने इमरान खान प्रशासन के तहत TLP को आतंकी संगठन घोषित कर दिया। लेकिन कुछ महीनों बाद ही समझौते के बाद बैन हटा लिया गया, जिसकी आलोचना हुई कि सरकार चरमपंथियों के आगे झुक गई। उसी साल नवंबर में फिर से TLP ने फ्रांस विरोधी मार्च निकाला, जिसमें एशिया बीबी एक्विटल केस से जुड़े सुप्रीम कोर्ट जजों की हत्या की धमकी दी गई।
अबकी बार की घटना 10 अक्टूबर को शुरू हुई, जब TLP ने लाहौर से इस्लामाबाद की ओर “गाजा सॉलिडैरिटी” मार्च निकाला। पार्टी ने अमेरिका-ब्रोकेर इजरायल-हमास युद्धविराम समझौते को “फिलिस्तीनियों के साथ विश्वासघात” बताते हुए यूएस दूतावास के बाहर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया। मार्च के दौरान मुरिदके (लाहौर से 60 किमी दूर) में हजारों समर्थकों ने पुलिस बैरिकेड तोड़े, पत्थरबाजी की और वाहनों पर कब्जा कर लिया। पंजाब पुलिस और रेंजर्स ने कैंप पर छापा मारा, जिसमें गोलीबारी हुई। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक तीन TLP कार्यकर्ता मारे गए, लेकिन पार्टी का दावा है कि सैकड़ों की मौत हुई और शव छिपा लिए गए। TLP नेता साद रिजवी झड़पों के बाद फरार हो गए, जिनकी तलाश जारी है।
बैन के बाद सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। साद रिजवी के घर से सोना, चांदी, लग्जरी घड़ियां और अज्ञात नामों पर संपत्तियां जब्त की गईं। 95 बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए, जबकि TLP से जुड़े मस्जिदों और मदरसों पर सरकारी नियंत्रण लगा दिया गया। पंजाब में नए हथियार लाइसेंस रोक दिए गए और अवैध अफगान प्रवासियों को वापस भेजा जा रहा है। सूचना मंत्री आजमा बोखारी ने कहा, “TLP की हिंसा से देश की सुरक्षा खतरे में थी। यह बैन चरमपंथ के खिलाफ सख्त संदेश है।” विपक्षी पार्टी PTI ने इसे “राजनीतिक बदला” बताया, जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि बैन तभी प्रभावी होगा जब राज्य TLP की विचारधारा का मुकाबला करे।
TLP के बैन ने पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति को नया मोड़ दिया है। पार्टी के समर्थक, खासकर पंजाब के ग्रामीण इलाकों में, ब्लास्फेमी कानून को लेकर सतर्क हैं। विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम शहबाज शरीफ सरकार की साख मजबूत कर सकता है, लेकिन TLP के भूमिगत होने से नई हिंसा का खतरा भी है। सोशल मीडिया पर #BanTLP ट्रेंड कर रहा है, जहां समर्थक और विरोधी बहस में हैं। पाकिस्तान अब चरमपंथ पर “हार्ड रीसेट” की कोशिश कर रहा है, लेकिन इतिहास दोहराएगा या नहीं, समय बताएगा।
