राष्ट्रीय

जितेंद्र की आतिशबाजी ने जला दिए 19 परिवारों के घर: बेघर हुए लोगों की मार्मिक आपबीती

दिवाली की रात खुशियां मनाने वाली आतिशबाजी एक भयानक त्रासदी बन गई, जब गाजियाबाद के इंदिरापुरम इलाके के शक्ति खंड-2 स्थित दिव्या अपार्टमेंट में लगी आग ने 19 परिवारों का सबकुछ राख कर दिया। पांच मंजिला इस इमारत में रहने वाले करीब 70-80 लोग आग की चपेट में फंस गए। चमत्कारिक रूप से कोई जानलेवा चोट नहीं लगी, लेकिन लाखों-करोड़ों की संपत्ति जलकर खाक हो गई। शुरुआती जांच में आग की वजह जितेंद्र नामक एक स्थानीय निवासी की लापरवाही से की गई आतिशबाजी बताई जा रही है। जितेंद्र और उसके साथी राजीव ने बिल्डिंग के नीचे बिना सावधानी के पटाखे फोड़े, जिसकी चिंगारी ने एक फ्लैट के इन्वर्टर से टकराकर पूरे भवन को लपेट लिया। पुलिस ने जितेंद्र और राजीव के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है, लेकिन वे फरार बताए जा रहे हैं।

घटना बुधवार रात करीब 8:30 बजे की है। प्रत्यक्षदर्शी और पीड़ित निवासी दीपक त्यागी ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया, “मेरे फ्लैट में सबसे पहले आग लगी। एक पटाखा सीधे मेरे इन्वर्टर से टकराया। नीचे जितेंद्र नाम का शख्स रहता है, जो हमारी बिल्डिंग से थोड़ी दूर है। वह और राजीव मिलकर जोर-शोर से आतिशबाजी कर रहे थे। चिंगारी उड़ती गई, और देखते ही देखते आग ने दीवारें चाट लीं। हम भागे, लेकिन धुआं इतना घना था कि सांस लेना मुश्किल हो गया।” दीपक के परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं, जिन्होंने रस्सी बनाकर बालकनी से कूदने की कोशिश की। आग इतनी तेज थी कि दूसरी मंजिल से शुरू होकर मिनटों में ऊपरी तल तक फैल गई। एक अन्य निवासी ने कहा, “हमने तिनका-तिनका जोड़कर घर बसाया था। अब सिर्फ राख बची है। फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बच्चों के खिलौने—सब चला गया।”

फायर ब्रिगेड की छह गाड़ियां वैशाली, काला पत्थर, इंदिरापुरम और वसुंधरा से पहुंचीं। मुख्य अग्निशमन अधिकारी राहुल पाल ने बताया, “आग बुझाने में करीब दो घंटे लगे। ज्वलनशील पदार्थों और इन्वर्टर की वजह से आग तेजी से फैली। सभी 19 परिवारों को सुरक्षित निकाल लिया गया।” रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) अध्यक्ष ने जितेंद्र पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह अक्सर बिना परमिशन के पटाखे फोड़ता था। पुलिस जांच में सामने आया कि जितेंद्र लोकल स्तर पर पटाखों का कारोबार भी करता है। उसके खिलाफ पहले भी शोर-शराबे की शिकायतें दर्ज हैं। एसएसपी डॉ. इरमाबाती लाल ने कहा, “जितेंद्र और राजीव को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। लापरवाही से मौत होने पर हत्या का केस भी बन सकता है।”

यह हादसा दिवाली पर गाजियाबाद में लगी 48 आगों का हिस्सा है, जहां ज्यादातर पटाखों की वजह से तबाही हुई। पीड़ित परिवार अब रिश्तेदारों के घर शरण ले रहे हैं। प्रशासन ने अस्थायी सहायता का ऐलान किया है, लेकिन बेघर परिवारों की चिता जल रही है। दीपक जैसे लोग सवाल उठा रहे हैं, “क्या एक छोटी सी लापरवाही इतनी बड़ी कीमत वसूल सकती है?” विशेषज्ञों की सलाह है कि आतिशबाजी हमेशा खुली जगहों पर करें और घरों में फायर एक्सटिंग्विशर रखें। यह अग्निकांड एक सबक है—खुशियां मनाएं, लेकिन सावधानी बरतें।

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