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रूस का परमाणु अभ्यास: पुतिन ने की निगरानी, यूक्रेन युद्ध पर ट्रंप से मुलाकात पर सस्पेंस; अमेरिका ने किया खारिज

रूस का परमाणु अभ्यास: पुतिन ने की निगरानी, यूक्रेन युद्ध पर ट्रंप से मुलाकात पर सस्पेंस; अमेरिका ने किया खारिज

रूस ने बुधवार को अपने रणनीतिक परमाणु बलों का बड़ा अभ्यास किया, जिसमें मिसाइल लॉन्च और न्यूक्लियर हथियारों के उपयोग की प्रक्रिया का सिमुलेशन शामिल था। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने वीडियो लिंक के जरिए इस अभ्यास की निगरानी की। अभ्यास के ठीक एक दिन बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुतिन के साथ प्रस्तावित शिखर सम्मेलन को स्थगित कर दिया, जिससे यूक्रेन युद्ध पर बातचीत का सस्पेंस बढ़ गया। ट्रंप ने कहा कि वे “समय बर्बाद” नहीं करना चाहते, जबकि क्रेमलिन ने इसे “पूर्व-तैयारी” की जरूरत बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस का यह अभ्यास पश्चिमी देशों को चेतावनी है, और शिखर सम्मेलन का स्थगित होना युद्धविराम पर दोनों पक्षों के मतभेदों का संकेत देता है।

अभ्यास में रूस के न्यूक्लियर ट्रायड (भूमि, समुद्र, हवा) के सभी हिस्सों को शामिल किया गया। प्लेसेट्स लॉन्च साइट से यार्स इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल दागी गई, जबकि बैरेंट सागर में एक पनडुब्बी से सिनेवा ICBM लॉन्च की गई।Tu-95 बॉम्बर्स ने लॉन्ग-रेंज क्रूज मिसाइलें फायर कीं। जनरल स्टाफ चीफ वलेरी गेरासिमोव ने पुतिन को रिपोर्ट देते हुए कहा कि यह अभ्यास “न्यूक्लियर हथियारों के उपयोग की प्रक्रिया का सिमुलेशन” था। पुतिन ने जोर देकर कहा कि यह अभ्यास पहले से प्लान्ड था, लेकिन इसका समय ट्रंप के बयान के ठीक बाद आया।

अभ्यास का उद्देश्य और पुतिन का बयान

– तैयारी का दावा: क्रेमलिन ने कहा कि अभ्यास सैन्य कमांड स्ट्रक्चर की स्किल्स को टेस्ट करने के लिए था। पुतिन ने इसे “रणनीतिक प्रतिरोध” का हिस्सा बताया, जो वैश्विक न्यूक्लियर बैलेंस बनाए रखता है।

– समय का संकेत: अभ्यास ट्रंप के बयान के कुछ घंटों बाद शुरू हुआ, जिसे पश्चिमी मीडिया ने “चेतावनी” माना। रूस के उप विदेश मंत्री ने न्यू स्टार्ट संधि (2011) का जिक्र कर अमेरिका को चेताया, जो न्यूक्लियर हथियारों की सीमा तय करती है।

एक रिपोर्ट में कहा गया कि रूस नियमित रूप से ऐसे अभ्यास करता है, लेकिन यह यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।

ट्रंप-पुतिन शिखर सम्मेलन पर सस्पेंस: क्या हुआ?

– स्थगित का ऐलान: ट्रंप ने मंगलवार को सीनेट में कहा कि बुडापेस्ट (हंगरी) में प्रस्तावित शिखर सम्मेलन “तुरंत नहीं” होगा। उन्होंने कहा, “मैं बेकार बैठक नहीं करना चाहता।” यह फैसला सोमवार को US सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के फोन कॉल के बाद लिया गया।

– पृष्ठभूमि: पिछले हफ्ते ट्रंप-पुतिन की बातचीत के बाद क्रेमलिन ने कहा था कि शिखर सम्मेलन “कुछ हफ्तों में” हो सकता है। लेकिन ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध पर अपनी पोजीशन बदली—अब वे सेसफायर से पहले शांति वार्ता पर जोर दे रहे हैं, जबकि रूस तत्काल सेसफायर का विरोध कर रहा है।

– क्रेमलिन का रुख: स्पोक्सपर्सन दिमित्री पेस्कोव ने कहा, “कोई समय बर्बाद नहीं करना चाहता—न ट्रंप, न पुतिन।” लेकिन शिखर सम्मेलन की तैयारी जरूरी है। ट्रंप की यह बदलाव यूक्रेन के खोए इलाकों को वापस लेने की संभावना पर असर डाल सकता है।

वैश्विक प्रतिक्रियाएं: यूक्रेन और पश्चिम की चिंता

– यूक्रेन: राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने स्वीडन से फाइटर जेट्स की मांग की। उन्होंने कहा, “रूस का अभ्यास यूक्रेन पर दबाव बनाने की कोशिश है।”

– नाटो: जनरल जेन्स स्टोल्टेनबर्ग ने कहा, “हम रूस के न्यूक्लियर रुख पर सतर्क हैं।” यूरोपीय संघ ने यूक्रेन को अतिरिक्त हथियारों का वादा किया।

– अमेरिका: ट्रंप के सलाहकारों ने कहा कि शिखर सम्मेलन “कभी भी हो सकता है”, लेकिन प्राथमिकता नहीं।

आगे क्या? विशेषज्ञों का अनुमान

विशेषज्ञों का कहना है कि रूस का अभ्यास “डिटरेंट सिग्नल” है, और शिखर सम्मेलन का स्थगित होना युद्धविराम पर गतिरोध दिखाता है। यदि ट्रंप की पोजीशन सख्त हुई, तो यूक्रेन को फायदा हो सकता है, लेकिन रूस न्यूक्लियर धमकी से दबाव बनाए रखेगा। अगले हफ्ते US इन्फ्लेशन डेटा और फेड मीटिंग पर नजरें टिकी हैं, जो वैश्विक तनाव को प्रभावित कर सकती हैं।

यह घटनाक्रम यूक्रेन युद्ध को नई दिशा दे सकता है। क्या शिखर सम्मेलन होगा? या तनाव बढ़ेगा? दुनिया की नजरें मॉस्को और वॉशिंगटन पर हैं।

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