उत्तराखंड

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व हाई अलर्ट पर: दिवाली से पहले उल्लू शिकार रोकने को छुट्टियां रद्द, रात्रि गश्त तेज

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व हाई अलर्ट पर: दिवाली से पहले उल्लू शिकार रोकने को छुट्टियां रद्द, रात्रि गश्त तेज

रामनगर: उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर के पास फैले कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (CTR) में दिवाली के अवसर पर उल्लुओं के अवैध शिकार की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने हाई अलर्ट मोड अपनाया है। जंगल विभाग ने सभी फील्ड कर्मचारियों की छुट्टियां तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी हैं और रात्रिकालीन गश्त को कई गुना बढ़ा दिया है। यह कदम उल्लुओं को तंत्र-मंत्र और काले जादू के लिए शिकार होने से बचाने के उद्देश्य से उठाया गया है, क्योंकि दिवाली पर मां लक्ष्मी का वाहन उल्लू होने के कारण इनकी मांग चरम पर पहुंच जाती है।

CTR के डायरेक्टर राहुल ने बताया, “दिवाली के दौरान उल्लू शिकार की घटनाएं सबसे ज्यादा होती हैं। इसलिए हमने पूरे रिजर्व में पेट्रोलिंग बढ़ा दी है, खासकर रात में।” विभाग ने कैमरा ट्रैप्स, ड्रोन और इंटेलिजेंस इनपुट से निगरानी तेज कर दी है। राजाजी टाइगर रिजर्व (RTR) की डायरेक्टर कोको रोज ने भी सभी रेंजर्स को निर्देश जारी किए हैं कि गैर-जरूरी छुट्टियां रद्द रखें। WWF के अनुसार, उत्तराखंड अवैध उल्लू व्यापार का हॉटस्पॉट है, जहां सालाना 17,000 से अधिक उल्लू शिकार होते हैं। उल्लुओं की हड्डियां, पंजे, खोपड़ी, पंख, मांस और खून तंत्रिकों द्वारा तावीज, काला जादू और पारंपरिक दवाओं में इस्तेमाल होते हैं।

अचर्या सुषांत राज ने बताया, “उल्लू को मां लक्ष्मी का वाहन माना जाता है। कुछ लोग सिद्धियां पाने के लिए दिवाली रात में उनका बलिदान करते हैं, जो क्रूर और अवैध है।” वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत उल्लू संरक्षित प्रजाति हैं, और शिकार पर 3-7 साल की सजा व जुर्माना है। पिलीभीत टाइगर रिजर्व (PTR) में भी डीएफओ मनीष सिंह ने रेलवे स्टेशनों, बस टर्मिनल्स और चेकपॉइंट्स पर सर्च ऑपरेशन के निर्देश दिए हैं।

यह अभियान न केवल उल्लुओं को बचाएगा, बल्कि पर्यावरण संतुलन को भी बनाए रखेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और अंधविश्वास दोनों खतरे बढ़ा रहे हैं। पर्यटकों से अपील है कि जंगल क्षेत्रों में सतर्क रहें। शुभ दिवाली!

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