चमोली: बद्रीनाथ धाम के पास ग्लेशियर टूटा, कूबर पर्वत पर भूस्खलन से मची हड़बड़ी; कोई नुकसान नहीं
चमोली: बद्रीनाथ धाम के पास ग्लेशियर टूटा, कूबर पर्वत पर भूस्खलन से मची हड़बड़ी; कोई नुकसान नहीं
देहरादुन: उत्तराखंड के चमोली जिले में बद्रीनाथ धाम के पास शुक्रवार को एक बड़ा प्राकृतिक हादसा होते-होते टल गया। कूबर पर्वत पर कांचन गंगा नाला के ऊपर एक बड़ा ग्लेशियर टूटकर भूस्खलन के साथ नीचे आ गया, जिससे पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। चमोली जिला प्रशासन ने तुरंत अलर्ट जारी किया, लेकिन राहत की बात यह है कि कोई जानमाल की हानि या संपत्ति को नुकसान नहीं हुआ।
चमोली उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) चंद्रशेखर वशिष्ठ ने बताया, “कूबर पर्वत की ऊंचाई पर ग्लेशियर का एक हिस्सा और चट्टान टूटकर नीचे गिरी। लेकिन कांचन गंगा नाले के ऊपर होने के कारण कोई क्षति नहीं हुई।” घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिसमें ग्लेशियर का बड़ा टुकड़ा अलग होकर तेजी से नीचे सरकता नजर आ रहा है। चमोली पुलिस ने इसे सामान्य प्राकृतिक घटना बताया, जो बदलते मौसम के कारण होती रहती है। इसी तरह के ग्लेशियर स्लाइड्स पहले केदारनाथ धाम के ऊपरी हिस्सों में भी देखे गए हैं।
घटना शुक्रवार दोपहर करीब 2 बजे हुई, जब बद्रीनाथ धाम क्षेत्र में हल्का भूस्खलन हुआ। स्थानीय निवासियों और तीर्थयात्रियों ने तुरंत प्रशासन को सूचना दी। जिला प्रशासन ने बद्रीनाथ हाईवे और आसपास के गांवों में सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। आईटीबीपी और एसडीआरएफ की टीमें अलर्ट पर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियर टूटने की घटनाएं बढ़ रही हैं। फरवरी 2025 में भी माना गांव के पास एक हिमस्खलन में 54 मजदूर फंस गए थे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना की समीक्षा की और राहत कार्यों की निगरानी के निर्देश दिए। चमोली डीएम स्वातिका सिंह ने कहा, “क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है। यात्रियों को सलाह है कि हाईवे पर सतर्क रहें।” यह घटना 2021 के चमोली ग्लेशियर विस्फोट की याद दिला रही है, जिसमें सैकड़ों लोग प्रभावित हुए थे। फिलहाल, स्थिति नियंत्रण में है।
