उत्तराखंड

रुद्रनाथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद, गोपीनाथ मंदिर के लिए रवाना हुई भगवान की डोली

रुद्रनाथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद, गोपीनाथ मंदिर के लिए रवाना हुई भगवान की डोली

रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित पंच केदार के चौथे धाम रुद्रनाथ महादेव मंदिर के कपाट शुक्रवार को शीतकाल के लिए बंद हो गए। भारी बर्फबारी और कठोर सर्दियों के कारण हर साल की तरह इस बार भी मंदिर के द्वार 17 अक्टूबर 2025 को बंद किए गए। बंद करने की रस्म के बाद भगवान रुद्रनाथ की पावन डोली गोपीनाथ मंदिर के लिए रवाना हो गई, जहां सर्दियों में उनकी पूजा-अर्चना होगी। यह परंपरा सदियों पुरानी है, जो भक्तों के बीच आस्था और श्रद्धा का प्रतीक बनी हुई है।

मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित दिनेश प्रसाद थापलीयाल ने बताया कि कपाट बंद करने की तिथि पंचांग के आधार पर निर्धारित की गई थी। सुबह विशेष पूजा-अर्चना के बाद दोपहर में मंदिर के द्वार बंद किए गए। इसके बाद भगवान रुद्रनाथ की चल विग्रह डोली को श्रद्धालुओं और पुजारियों ने भव्य शोभायात्रा के साथ विदा किया। डोली गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर के लिए प्रस्थान कर चुकी है, जहां छह माह तक दैनिक पूजन होगा। पुजारी वेद प्रकाश भट्ट ने कहा, “यह यात्रा भगवान की लीला का हिस्सा है। सर्दियों में ऊंचाई पर पहुंचना कठिन होता है, इसलिए डोली को सुरक्षित स्थान पर ले जाया जाता है।” यात्रा में डोली को कंधों पर उठाकर ले जाया गया, जिसमें स्थानीय ग्रामीणों और तीर्थयात्रियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

रुद्रनाथ मंदिर पंच केदार यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो केदारनाथ, तुंगनाथ, मध्यमहेश्वर और कल्पेश्वर के साथ मिलकर भगवान शिव के पांच स्वरूपों का प्रतीक है। महाभारत काल की कथा के अनुसार, पांडवों के पीछे भागते हुए शिव जी भैंसे का रूप धारण कर इन पांच स्थानों पर प्रकट हुए। रुद्रनाथ में शिव जी का मुख माना जाता है। मंदिर समुद्र तल से 3,600 मीटर ऊंचाई पर चमोली जिले के अनसूया घाटी में स्थित है, जो घने जंगलों और दुर्गम चट्टानों से घिरा है। पहुंचने के लिए गोपेश्वर से सागर गांव तक 24 किमी सड़क और फिर 20 किमी पैदल ट्रेक करना पड़ता है, जो सबसे कठिन माना जाता है। मई से नवंबर तक ही मंदिर खुला रहता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।

इस अवसर पर स्थानीय स्तर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम और भजन-कीर्तन हुए। पर्यटन विभाग ने श्रद्धालुओं को सलाह दी है कि सर्दियों में मंदिर बंद रहने पर गोपीनाथ मंदिर में दर्शन किए जा सकते हैं। अगले साल वसंत पंचमी पर गोपीनाथ मंदिर में पंचांग के आधार पर खुलने की तिथि घोषित होगी, जो संभावित रूप से मई 2025 में होगी। यह परंपरा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि हिमालयी पर्यावरण संरक्षण को भी प्रोत्साहित करती है। भक्तों का मानना है कि रुद्रनाथ की कृपा से जीवन में शांति और समृद्धि आती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *