उत्तराखंड में मिलावट के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई, अब तक 31 क्विंटल दुग्ध उत्पाद नष्ट
उत्तराखंड में मिलावट के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई, अब तक 31 क्विंटल दुग्ध उत्पाद नष्ट
देहरादून: दीवाली के त्योहारों को शुद्ध और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से उत्तराखंड सरकार ने ‘मीठे जहर’ यानी मिलावटी दुग्ध उत्पादों के खिलाफ सख्त अभियान छेड़ा है। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमों ने राज्यभर में ताबड़तोड़ छापेमारी की, जिसमें अब तक 31 क्विंटल से अधिक नकली दूध, खोया, पनीर और अन्य दुग्ध उत्पाद नष्ट किए गए हैं। यह कार्रवाई मिलावटखोरों को सबक सिखाने और उपभोक्ताओं की सेहत की रक्षा करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है।
खाद्य सुरक्षा निदेशालय के अनुसार, अभियान की शुरुआत 8 अक्टूबर से हुई, जब विभाग ने सभी 13 जिलों में विशेष दलों का गठन किया। देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधम सिंह नगर जैसे जिलों में सबसे ज्यादा कार्रवाई हुई। उदाहरण के लिए, देहरादून के राजपुर रोड पर एक फैक्ट्री से 8 क्विंटल मिलावटी खोया जब्त कर नष्ट किया गया, जिसमें यूरिया और डिटर्जेंट मिलाया गया था। इसी तरह, हरिद्वार में गंगा घाट के पास एक वाहन से 12 क्विंटल नकली दूध पाउडर बरामद हुआ, जो बाजार में मिठाइयों के लिए इस्तेमाल हो रहा था। नैनीताल जिले के हल्द्वानी में 5 क्विंटल पनीर और दूध के नमूने फेल साबित होने पर मौके पर ही नष्ट कर दिया गया। कुल मिलाकर, 150 से अधिक स्थानों पर छापे मारे गए, और 200 नमूने लैब भेजे जा चुके हैं।
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. आशीष मेहता ने बताया, “मिलावटी दुग्ध उत्पादों में केमिकल मिलाने से किडनी और लीवर संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। त्योहारी सीजन में मिठाइयों की डिमांड बढ़ने से मिलावटखोर सक्रिय हो जाते हैं। हमारी टीम 24 घंटे अलर्ट पर है।” उन्होंने चेतावनी दी कि दोषी पाए जाने पर आईपीसी की धारा 272 और फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई होगी, जिसमें जुर्माना और जेल की सजा शामिल है। अब तक 15 मामलों में एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं, और दो मिलावटखोर गिरफ्तार किए गए हैं।
यह अभियान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर चलाया जा रहा है, जो ‘स्वास्थ्य ही धन है’ के नारे के तहत चल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि नकली दूध में सिंथेटिक मिल्क पाउडर और हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल आम हो गया है, जो बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरनाक है। विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि ब्रांडेड उत्पाद ही खरीदें और संदिग्ध सामग्री पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं। अभियान 31 अक्टूबर तक चलेगा, जिसमें और सख्ती का वादा किया गया है।
