राष्ट्रीय

‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर देश भर में हो रही ठगी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने 17 अक्टूबर 2025 को ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम्स के बढ़ते मामलों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार और सीबीआई से जवाब मांगा है। कोर्ट ने इन्हें न्यायिक व्यवस्था पर सीधा हमला बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की। बेंच ने कहा कि फर्जी जज बनकर या कोर्ट के नाम पर ठगी करना न केवल व्यक्तिगत अपराध है, बल्कि संस्थागत विश्वास पर प्रहार है। यह फैसला एक वरिष्ठ नागरिक दंपति की शिकायत पर आया, जिन्हें स्कैमर्स ने फर्जी सुप्रीम कोर्ट ऑर्डर दिखाकर डिजिटल हिरासत में रखा और 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की।

चीफ जस्टिस बीआर गवई की अगुवाई वाली बेंच ने कहा, “न्यायिक दस्तावेजों की जालसाजी और कोर्ट की मुहर-हस्ताक्षर का अपराधिक दुरुपयोग गंभीर चिंता का विषय है। जजों के फर्जी हस्ताक्षर वाली फैब्रिकेटेड ऑर्डर जनता के विश्वास को जड़ से हिला देते हैं।” बेंच ने इसे ‘रूल ऑफ लॉ’ पर खतरा बताते हुए पूरे देश में समन्वित कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने यूनियन ऑफ इंडिया (गृह मंत्रालय), सीबीआई, हरियाणा के प्रधान सचिव (गृह) और अंबाला के एसपी (साइबर क्राइम) को नोटिस जारी किए। अटॉर्नी जनरल की सहायता भी मांगी गई है। अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को होगी।

अंबाला की 73 वर्षीय महिला ने सीजेआई को पत्र लिखकर बताया कि स्कैमर्स ने वीडियो कॉल पर फर्जी वर्चुअल कोर्ट सेशन चलाया, जहां वे खुद को जज, ईडी अधिकारी और पुलिस बताकर उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे केस में फंसाया। उन्होंने फर्जी फ्रीज ऑर्डर दिखाकर दो दिनों तक ‘डिजिटल हिरासत’ में रखा और जीवन भर की कमाई उड़ा ली। कोर्ट ने इसे ‘व्यवस्थित साइबर क्राइम नेटवर्क’ करार दिया। इसी महीने वर्धमान ग्रुप के चेयरमैन एसपी ओसवाल से 7 करोड़ की ठगी का मामला भी सामने आया, जहां स्कैमर्स ने सीजेआई सहित अधिकारियों के नाम पर फर्जीवाड़ा किया।

डिजिटल अरेस्ट स्कैम्स में धोखेबाज व्हाट्सएप, ईमेल या वीडियो कॉल पर पुलिस, सीबीआई, ईडी या जज बनकर संपर्क करते हैं। वे ड्रग्स, टैक्स चोरी या मनी लॉन्ड्रिंग जैसे अपराधों का हौवा दिखाकर ‘अरेस्ट’ का डराते हैं और पैसे ट्रांसफर करवाते हैं। खासकर वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है। मुंबई में हाल ही में 58 करोड़ की ऐसी ठगी का खुलासा हुआ, जहां 72 वर्षीय व्यक्ति को अंतरराष्ट्रीय नंबर से फोन कर ठगा गया। कोर्ट ने कहा कि यह निजी मामला नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की समस्या है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कोर्ट का हस्तक्षेप साइबर फ्रॉड रोकने में मील का पत्थर साबित होगा। साइबर क्राइम विशेषज्ञों ने सलाह दी कि संदिग्ध कॉल पर तुरंत पुलिस से संपर्क करें, पैसे ट्रांसफर न करें और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। सुप्रीम कोर्ट की यह पहल न्यायिक गरिमा बचाने के साथ-साथ आम नागरिकों को सतर्क करेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *