इंदौर में किन्नरों का दर्द भरा कदम: 22 ने फिनाइल पी लिया, गुटों के विवाद ने लिया खतरनाक रूप
इंदौर में किन्नरों का दर्द भरा कदम: 22 ने फिनाइल पी लिया, गुटों के विवाद ने लिया खतरनाक रूप
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के नंदलालपुरा इलाके में किन्नर समुदाय के दो गुटों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद ने बुधवार देर रात खौफनाक मोड़ ले लिया। एक गुट के करीब 22 किन्नरों ने सामूहिक रूप से फिनाइल पी लिया, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। सभी को तत्काल एमवाय अस्पताल पहुंचाया गया, जहां कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना के बाद पंढरीनाथ थाने समेत कई थानों की पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई, ताकि स्थिति बिगड़ न जाए।
पुलिस के अनुसार, यह सामूहिक आत्महत्या की कोशिश किन्नरों के दो प्रमुख गुटों—सपना गुरु और सीमा-पायल गुरु—के बीच चल रहे आपसी विवाद की वजह से हुई। विवाद की जड़ संपत्ति बंटवारे, गद्दी (नेतृत्व) और वसूली को लेकर है। कुछ रिपोर्ट्स में हिंदू-मुस्लिम किन्नरों के बीच धर्मांतरण का मुद्दा भी जुड़ा बताया गया है। मंगलवार को ही किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर लक्ष्मी त्रिपाठी इंदौर पहुंची थीं और विवाद सुलझाने के लिए अफसरों से मिलीं, लेकिन बात बनी नहीं।
घटना बुधवार रात करीब 10 बजे घटी। नंदलालपुरा स्थित एक बंद कमरे में एकत्रित होकर किन्नरों ने फिनाइल पी लिया। चीख-पुकार सुनकर स्थानीय लोगों ने तुरंत पंढरीनाथ थाने को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने दरवाजा तोड़कर सभी को बाहर निकाला और एम्बुलेंस से एमवाय अस्पताल ले जाया। एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने बताया, “प्रारंभिक जांच में फिनाइल पीने की पुष्टि हुई है। फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है। सभी की हालत स्थिर है, लेकिन दो-चार को ऑब्जर्वेशन में रखा गया है।” सीएमएचओ माधव हसानी ने कहा कि घरेलू सफाई वाला फिनाइल था, और समय रहते इलाज से जान बच गई।
फिनाइल पीने के बाद हीरोडियम करने की कोशिश भी हुई। चार किन्नरों ने पेट्रोल छिड़ककर खुद को आग लगाने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने रोक लिया। इसके बाद नंदलालपुरा चौराहे पर किन्नरों ने चक्काजाम कर हंगामा किया, जिससे वाहनों की लंबी कतार लग गई। पायल गुरु गुट के समर्थकों ने थाने के बाहर धरना दिया, जहां हंगामा करीब दो घंटे चला। पुलिस ने समझाबुझाकर शांत किया।
यह विवाद कई महीनों पुराना है। कुछ हफ्ते पहले इसी झगड़े में दो मीडियाकर्मियों पर एक किन्नर के साथ कुकर्म का आरोप लगा, जिसकी वजह से एसआईटी गठित की गई थी, लेकिन जांच अटकी हुई है। किन्नर समाज के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “वर्चस्व की लड़ाई ने हमें तोड़ दिया। हमारी आवाज कोई नहीं सुनता।” एक अन्य ने बताया, “संपत्ति और रस्मों (जैसे जन्म-मृत्यु पर वसूली) को लेकर रोज झगड़े होते हैं।”
पुलिस ने स्थिति संभालने के लिए अतिरिक्त फोर्स तैनात की है। सीपी संतोष सिंह ने एसआईटी को निर्देश दिए हैं कि विवाद की जड़ तक पहुंचे। किन्नर अखाड़ा भी मध्यस्थता के लिए आगे आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि समुदाय में लिंग-विविधता के अधिकारों पर ध्यान न देने से ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहा है, जहां किन्नरों की चीखें साफ सुनाई दे रही हैं।
यह घटना इंदौर की सामाजिक संरचना पर सवाल खड़ी करती है। क्या विवाद सुलझेगा या और बिगड़ेगा? प्रशासन की नजर बनी हुई है। फिलहाल, अस्पताल में इलाज जारी है, और किन्नर समाज एकजुट होने की अपील कर रहा है।
