Friday, September 11, 2026
Latest:
राष्ट्रीय

कौशांबी में मुस्लिम परिवार ने अपनाया हिंदू धर्म: मेहंदी अली बने ‘अनुज प्रताप’, सायमा बनीं ‘सौम्या’

कौशांबी में मुस्लिम परिवार ने अपनाया हिंदू धर्म: मेहंदी अली बने ‘अनुज प्रताप’, सायमा बनीं ‘सौम्या’

उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में एक मुस्लिम परिवार ने सामूहिक रूप से हिंदू धर्म अपनाने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। चायल तहसील के निवासी मेहंदी अली राजपूत, उनकी पत्नी सायमा और तीन साल की बेटी उर्वा ने मंझनपुर दुर्गा मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-पूजन कर सनातन धर्म में वापसी की। धर्म परिवर्तन के बाद परिवार के सदस्यों ने अपने नाम भी बदल लिए: मेहंदी अली अब अनुज प्रताप सिंह (43 वर्ष), सायमा अब सौम्या अनुज सिंह (23 वर्ष) और बेटी उर्वा अब उर्विजा अनुज सिंह हो गईं।

परिवार के मुखिया अनुज प्रताप सिंह ने बताया कि वे मूल रूप से हिंदू राजपूत परिवार से हैं। परिस्थितियों के कारण कुछ साल पहले इस्लाम अपनाया था, लेकिन अब अपनी गलती का एहसास होने पर सनातन धर्म में लौट आए। ‘वन अंब्रेला चैरिटेबल ट्रस्ट’ के संस्थापक अनुज ने कहा, “सनातन धर्म की सहिष्णुता और समानता ने हमें वापस बुलाया। हम अब मां दुर्गा की भक्ति में लीन रहेंगे।” पत्नी सौम्या ने भावुक होकर कहा, “सनातन ही सबसे अच्छा धर्म लगता है। पहले सायमा बानो थीं, अब सौम्या सिंह हूं। यह फैसला हमारा स्वेच्छा से लिया है, किसी दबाव में नहीं।”

यह समारोह स्थानीय हिंदू संगठनों के सहयोग से आयोजित हुआ, जिसमें पंडितों ने शुद्धिकरण संस्कार कराया। मंदिर परिसर में मंत्रोच्चार और आरती के बीच परिवार ने गंगा जल से स्नान कर हिंदू रीति-रिवाज अपनाए। जिला प्रशासन को इसकी सूचना दी गई है, और एसडीएम ने शपथ पत्र के आधार पर इसे वैध माना। कौशांबी में ऐसे मामले दुर्लभ हैं, लेकिन हालिया वर्षों में उत्तर प्रदेश में ‘घर वापसी’ अभियानों ने इन्हें बढ़ावा दिया है।

विपक्षी दलों ने इसे स्वागतयोग्य बताया, लेकिन कुछ मुस्लिम संगठनों ने सवाल उठाए कि क्या यह दबाव का नतीजा तो नहीं। हालांकि, परिवार ने साफ कहा कि यह व्यक्तिगत आस्था का मामला है। अनुज प्रताप सिंह ने बताया कि वे अब हिंदू समाज में एकजुट होकर सामाजिक कार्य जारी रखेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे धर्मांतरण उत्तर भारत में धार्मिक सद्भाव को मजबूत करते हैं, बशर्ते वे स्वैच्छिक हों।

यह घटना कौशांबी की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती है, जहां हिंदू-मुस्लिम एकता सदियों पुरानी है। परिवार अब नए जीवन की शुरुआत कर रहा है, जिसमें त्योहारों और पूजा-अर्चना का विशेष महत्व होगा। क्या यह ट्रेंड बढ़ेगा? आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। कुल मिलाकर, यह कहानी आस्था और वापसी की प्रेरणादायक मिसाल बन गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *