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आईपीएस पूरन कुमार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई: आठ दिन बाद पोस्टमार्टम, सुसाइड नोट से खुलासे

आईपीएस पूरन कुमार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई: आठ दिन बाद पोस्टमार्टम, सुसाइड नोट से खुलासे

हरियाणा कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार की रहस्यमयी आत्महत्या के आठ दिन बाद बुधवार को उनका पोस्टमार्टम हुआ और शाम चार बजे चंडीगढ़ के सेक्टर-25 श्मशान घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनकी दोनों बेटियों ने भावुक होकर मुखाग्नि दी, जबकि पत्नी आईएएस अमनीत कुमार ने अंतिम यात्रा में आंसुओं से खुद को संभाला। पुलिस सलामी के बीच यह संस्कार पूरा हुआ, जो पूरे राज्य में सनसनी फैलाने वाली इस घटना का दुखद अंतिम अध्याय बन गया।

पूरन कुमार, 2001 बैच के 52 वर्षीय अधिकारी, ने 7 अक्टूबर को चंडीगढ़ स्थित अपने आवास पर खुद को गोली मार ली थी। घटना के बाद उनके शव का पोस्टमार्टम न होने से पूरा प्रशासन हिल गया था। पत्नी अमनीत ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा मिलने पर ही सहमति दी। सुबह नौ बजे चंडीगढ़ पीजीआई में मजिस्ट्रेट, फॉरेंसिक टीम और डॉक्टरों के बोर्ड ने वीडियोग्राफी के साथ पोस्टमार्टम पूरा किया। परिवार को शव सौंपे जाने के बाद दोपहर तीन बजे अंतिम यात्रा शुरू हुई, जिसमें सहकर्मी, रिश्तेदार और शुभचिंतक शामिल हुए।

इस घटना ने हरियाणा की अफसरशाही में जातिगत भेदभाव और सत्ता संघर्ष की काली परतें उजागर कर दी हैं। पूरन के नौ पेज के सुसाइड नोट में उन्होंने डीजीपी और एसपी समेत वरिष्ठ अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के झूठे आरोप लगाने, प्रमोशन में रोड़े अटकाने और दलित होने के कारण मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया। अमनीत ने कहा, “मेरा पति ईमानदार अधिकारी था, लेकिन सिस्टम ने उसे तोड़ दिया।” चंडीगढ़ पुलिस ने पहले ही एफआईआर दर्ज कर ली है, जिसमें बीएनएस की धारा 108, 3(5) और एससी/एसटी एक्ट लागू किया गया। सरकार ने दबाव में डीजीपी को छुट्टी पर भेजा और आरोपी एसपी को हटा दिया।

यह मामला एक हफ्ते में दूसरी खुदकुशी से जुड़ गया है। रोहतक के एएसआई संदीप लाठर की मौत के बाद उनके परिवार ने भी पोस्टमार्टम से इनकार कर दिया था। दोनों मामलों में जातीय भेदभाव का मुद्दा उठा है, जिससे दलित संगठन सड़कों पर उतर आए। रोहतक में लाठर के गांववालों ने शव उठाने से मना कर दिया, जब तक अमनीत समेत आरोपी न गिरफ्तार हों। सीएम नायब सिंह सैनी ने आश्वासन दिया कि न्याय होगा, लेकिन विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना प्रशासनिक सुधारों की जरूरत बताती है। पूरन जैसे अधिकारी, जिन्होंने करियर में इंटेलिजेंस और लॉ एंड ऑर्डर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, की मौत ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए। अमनीत ने कहा, “हम जांच का इंतजार करेंगे, लेकिन न्याय मिलना चाहिए।” पोस्टमार्टम रिपोर्ट जल्द आने की उम्मीद है, जो सुसाइड की वजह स्पष्ट करेगी।

कुल मिलाकर, यह दुखद घटना न केवल एक परिवार का नुकसान है, बल्कि भारतीय नौकरशाही की गहरी खामियों को उजागर करती है। दलित अधिकारियों के संगठनों ने केंद्रीय जांच की मांग की है, जबकि सरकार ने कमिटी गठित करने का ऐलान किया। पूरन की यादें उनके योगदान के रूप में बरकरार रहेंगी।

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