पानी को दूषित करने वालों सावधान! उत्तराखंड ने अपनाई केंद्र की नई जल प्रदूषण नीति, जुर्माने में कई गुना वृद्धि – अब लाखों तक भरना पड़ सकता है
पानी को दूषित करने वालों सावधान! उत्तराखंड ने अपनाई केंद्र की नई जल प्रदूषण नीति, जुर्माने में कई गुना वृद्धि – अब लाखों तक भरना पड़ सकता है
पर्यावरण संरक्षण को मजबूत बनाने के लिए उत्तराखंड सरकार ने केंद्र की नई जल प्रदूषण रोकथाम नीति को अपना लिया है। ‘वाटर (प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ पॉल्यूशन) (मैनर ऑफ होल्डिंग इंक्वायरी एंड इम्पोजिशन ऑफ पेनल्टी) रूल्स, 2024’ को राज्य में लागू करने का फैसला कैबिनेट बैठक में लिया गया। इससे जल स्रोतों को दूषित करने वालों पर सख्ती बढ़ेगी – पहले के मुकाबले जुर्माने की राशि कई गुना बढ़ जाएगी, जो अब लाखों रुपये तक पहुंच सकती है। यह नीति अनुच्छेद 252 के तहत अपनाई गई है, और इसका उद्देश्य नदियों, झीलों और भूजल की रक्षा करना है। राज्य में औद्योगिक इकाइयों, फैक्ट्रियों और शहरी अपशिष्टों से होने वाले प्रदूषण पर अब जीरो टॉलरेंस पॉलिसी लागू होगी।
नई नीति के मुख्य प्रावधान: जुर्माने में भारी इजाफा
– जुर्माने की संरचना: पहले जल प्रदूषण रोकथाम अधिनियम 1974 के तहत जुर्माना सीमित था (5,000 से 10,000 रुपये तक), लेकिन नई रूल्स में इसे बढ़ाकर प्रदूषण की गंभीरता के आधार पर निर्धारित किया गया है। छोटे उल्लंघनों पर 50,000 से 1 लाख रुपये, जबकि बड़े प्रदूषण (जैसे नदी में रसायन डालना) पर 10 लाख तक या इससे ज्यादा जुर्माना लग सकता है। दोहराव पर दोगुना और जेल की सजा भी संभव।
– इंक्वायरी प्रक्रिया: राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UKPCB) को तुरंत जांच का अधिकार मिलेगा। डिजिटल निगरानी सिस्टम से रीयल-टाइम डेटा लेगी, और दोषी पाए जाने पर 30 दिनों में जुर्माना वसूली होगी।
– लागू क्षेत्र: शुरुआत में 15 राज्यों में लागू यह नीति उत्तराखंड समेत अन्य राज्य अपना रहे हैं। यहां गंगा, यमुना और स्थानीय नदियों के प्रदूषण पर फोकस रहेगा।
उत्तराखंड में क्यों जरूरी? राज्य के जल स्रोत खतरे में
उत्तराखंड में औद्योगिक वृद्धि के साथ जल प्रदूषण बढ़ रहा है। UKPCB की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में हरिद्वार, देहरादून और ऊधमसिंह नगर में 200 से ज्यादा केस दर्ज हुए, जहां फैक्ट्रियां और शहरी सीवेज नदियों को दूषित कर रहे थे। गंगा एक्शन प्लान के तहत साफ-सफाई पर करोड़ों खर्च हो रहे हैं, लेकिन उल्लंघन रोकने के लिए सख्त कानून की कमी थी। पर्यावरण मंत्री लोचन भट्ट ने कहा, “यह नीति जल संरक्षण का मील का पत्थर है। प्रदूषक अब बच नहीं पाएंगे।” केंद्र की गजट नोटिफिकेशन GSR 85 (E) के तहत 30 जनवरी 2025 से रूल्स प्रभावी हैं।
प्रभाव और अपेक्षाएं
– उद्योगों पर असर: छोटे-मध्यम उद्योगों को अब वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट अनिवार्य होंगे। UKPCB ने ऑनलाइन कंसेंट सिस्टम को मजबूत करने का ऐलान किया।
– जन जागरूकता: ग्रामीण इलाकों में कैंपेन चलेंगे, जहां किसान और पर्यटक जल संरक्षण के प्रति जागरूक होंगे।
– चुनौतियां: विशेषज्ञों का कहना है कि कार्यान्वयन में निगरानी की कमी हो सकती है, लेकिन ड्रोन और सैटेलाइट मॉनिटरिंग से सुधार होगा।
यह कदम ‘नमामि गंगे’ और सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स को मजबूत करेगा।
