उत्तराखंड

RTI के 20 साल: उत्तराखंड कांग्रेस ने बताया ऐतिहासिक, BJP पर लगाया पारदर्शिता कमजोर करने का आरोप

RTI के 20 साल: उत्तराखंड कांग्रेस ने बताया ऐतिहासिक, BJP पर लगाया पारदर्शिता कमजोर करने का आरोप

सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 को आज 20 साल पूरे हो गए। इस मौके पर उत्तराखंड कांग्रेस ने इसे यूपीए सरकार का ऐतिहासिक कदम करार देते हुए जनता के सशक्तिकरण का प्रतीक बताया। साथ ही, बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र और राज्य सरकार पर इस कानून को कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया। कांग्रेस का कहना है कि RTI ने पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा दिया, लेकिन 2014 के बाद NDA सरकार ने इसे व्यवस्थित रूप से कमजोर किया, जिससे देश के लोकतांत्रिक ढांचे को नुकसान पहुंचा। उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने केंद्र सरकार पर इलेक्टोरल बॉन्ड और पीएम केयर फंड जैसे मुद्दों पर पारदर्शिता छिपाने का इल्जाम लगाया।

RTI: यूपीए का ऐतिहासिक कदम

12 अक्टूबर 2005 को डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने RTI अधिनियम लागू किया था, जिसे अधिकार-आधारित शासन की पहली कड़ी माना जाता है। इस कानून ने आम नागरिकों को सरकारी कामकाज की जानकारी प्राप्त करने का अधिकार दिया, जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगी और जवाबदेही बढ़ी। उत्तराखंड कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष खंडूरी ने कहा, “RTI यूपीए की सबसे बड़ी देन है। इसके बाद मनरेगा (2005), वन अधिकार अधिनियम (2006), शिक्षा का अधिकार (2009), भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजा अधिनियम (2013) और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (2013) जैसे जन-केंद्रित कानून लाए गए। इनसे करोड़ों लोगों को लाभ हुआ।”

कांग्रेस ने दावा किया कि RTI ने नौकरशाही को पारदर्शी बनाया और जनता को सशक्त किया। उत्तराखंड में भी RTI के जरिए कई घोटालों का खुलासा हुआ, जैसे चार धाम प्रोजेक्ट में अनियमितताएं और सरकारी खरीद में भ्रष्टाचार।

BJP पर आरोप: RTI को कमजोर करने की साजिश

उत्तराखंड कांग्रेस ने केंद्र की NDA सरकार पर RTI को कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया। प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने कहा, “2019 के RTI संशोधन ने केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) की स्वतंत्रता को कमजोर किया और कार्यपालिका का दबदबा बढ़ाया। इसका मकसद इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए चंदे की जानकारी छिपाना था।” माहरा ने दावा किया कि कई कंपनियों पर दबाव डालकर चंदा वसूला गया, जिसमें 90% हिस्सा BJP को गया।

उन्होंने पीएम केयर फंड की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा, “प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) पहले से मौजूद था, फिर पीएम केयर फंड क्यों बनाया गया? हजारों करोड़ रुपये जमा हुए, लेकिन इसका हिसाब कैग को भी नहीं पता। RTI से इसे बाहर रखा गया ताकि जनता को जानकारी न मिले।” माहरा ने केंद्रीय सूचना आयोग की स्थिति को ‘अब तक की सबसे कमजोर’ बताया, जहां 11 स्वीकृत पदों में से सिर्फ 2 आयुक्त कार्यरत हैं। सितंबर 2025 से मुख्य सूचना आयुक्त (CIC) का पद भी रिक्त है।

लंबित मामले और RTI कार्यकर्ताओं पर खतरा

कांग्रेस ने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि जून 2024 तक देश के 29 सूचना आयोगों में 4 लाख से ज्यादा अपीलें और शिकायतें लंबित हैं, जो 2019 की तुलना में दोगुनी हैं। केंद्रीय सूचना आयोग में ही नवंबर 2024 तक 23,000 मामले पेंडिंग हैं। माहरा ने कहा, “यूपीए के समय ऐसी स्थिति कभी नहीं थी। NDA ने जानबूझकर RTI को कमजोर किया।”

RTI कार्यकर्ताओं पर बढ़ते हमलों ने भी चिंता बढ़ाई है। माहरा ने कहा, “RTI कार्यकर्ताओं को धमकियां मिल रही हैं, हमले हो रहे हैं। व्हिसल ब्लोअर प्रोटेक्शन एक्ट 2014 में यूपीए ने संसद में पास कराया था, लेकिन NDA ने इसे लागू नहीं किया। नियम तक अधिसूचित नहीं किए गए।” उत्तराखंड में भी RTI कार्यकर्ताओं ने भ्रष्टाचार उजागर करने की कोशिश की, लेकिन कई मामलों में उन्हें धमकियां मिलीं।

BJP का जवाब: ‘कांग्रेस का झूठा प्रचार’

BJP ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि RTI को कमजोर करने का कोई सवाल नहीं। उत्तराखंड BJP प्रवक्ता मनवीर चौहान ने कहा, “कांग्रेस RTI का श्रेय लेना चाहती है, लेकिन भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए यूपीए ने इसका दुरुपयोग किया। हमारी सरकार ने डिजिटल इंडिया के जरिए पारदर्शिता बढ़ाई।” उन्होंने दावा किया कि PM केयर फंड का हिसाब पारदर्शी है और RTI के तहत जरूरी जानकारी दी जा रही है।

RTI का महत्व और भविष्य

RTI अधिनियम ने 20 सालों में लाखों लोगों को सरकारी योजनाओं, भ्रष्टाचार और नीतियों की जानकारी दिलाई। उत्तराखंड में चार धाम प्रोजेक्ट, आपदा राहत फंड और सरकारी नियुक्तियों में अनियमितताओं का खुलासा RTI से हुआ। लेकिन लंबित मामलों और कार्यकर्ताओं पर खतरे ने इसकी प्रभावशीलता पर सवाल खड़े किए हैं।

कांग्रेस ने मांग की कि RTI को मजबूत करने के लिए CIC में रिक्त पद भरे जाएं, व्हिसल ब्लोअर एक्ट लागू हो और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो। माहरा ने कहा, “RTI लोकतंत्र का हथियार है। इसे कमजोर करना देश को कमजोर करना है।” यह विवाद उत्तराखंड और देश की सियासत में नया रंग ला सकता है।

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