राष्ट्रीय

IPS पूरन कुमार सुसाइड केस: दलित संगठनों का अल्टीमेटम, ‘DGP हटाओ या आंदोलन’

चंडीगढ़। हरियाणा के वरिष्ठ IPS अधिकारी वाई. पूरन कुमार की कथित आत्महत्या के मामले ने अब जातिगत उत्पीड़न और प्रशासनिक भ्रष्टाचार के गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 7 अक्टूबर को चंडीगढ़ के सेक्टर-11 स्थित सरकारी आवास में पूरन कुमार ने खुद को गोली मार ली थी। उनके 8 पेज के सुसाइड नोट में 8 IPS और 2 IAS अधिकारियों पर जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न और करियर में बाधा डालने के आरोप लगाए गए थे। नोट में उन्होंने अपनी पूरी संपत्ति पत्नी अमनीत पी. कुमार (2001 बैच IAS, पंजाब कैडर) के नाम कर दी थी। अब ‘शहीद वाई. पूरन कुमार न्याय संघर्ष मोर्चा’ नामक 31 सदस्यीय कमेटी ने हरियाणा DGP शत्रुजीत सिंह कपूर को हटाने का अल्टीमेटम दिया है। कमेटी ने रविवार (12 अक्टूबर) को चंडीगढ़ के सेक्टर-20 गुरुद्वारे पर ‘महापंचायत’ बुलाई है, जहां यदि DGP पर कार्रवाई न हुई तो राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान किया जाएगा।

पूरन कुमार (52 वर्ष, 2001 बैच हरियाणा कैडर) एक ईमानदार और सख्त अधिकारी के रूप में जाने जाते थे। वे दलित समुदाय से थे और रोहतक में ADGP के पद पर तैनात थे। सुसाइड नोट में उन्होंने DGP कपूर पर विशेष आरोप लगाए, जिसमें कहा गया कि कपूर ने उन्हें बार-बार अनावश्यक नोटिस जारी कर प्रताड़ित किया। इसके अलावा, रोहतक SP नरेंद्र बिजरनिया समेत अन्य अधिकारियों पर जातिगत पूर्वाग्रह से पोस्टिंग में भेदभाव और ACR (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) में पक्षपात का इल्जाम लगाया। नोट में लिखा था, “मैंने वर्षों तक सिस्टम की क्रूरता सही, लेकिन अब सहन नहीं होता।” अमनीत कुमार ने बताया कि घटना से पहले पूरन ने DGP और SP से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

अमनीत कुमार ने 8 अक्टूबर को चंडीगढ़ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें BNS की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत FIR की मांग की। उन्होंने हरियाणा CM नायब सिंह सैनी को पत्र लिखकर DGP कपूर और SP बिजरनिया की गिरफ्तारी व निलंबन की अपील की। अमनीत ने कहा, “यह साधारण आत्महत्या नहीं, बल्कि SC समुदाय के ईमानदार अधिकारी पर सिस्टम की साजिश है। वर्षों की व्यवस्थित प्रताड़ना ने उन्हें तोड़ा।” उन्होंने FIR में ‘दुर्बल धाराओं’ का विरोध किया, जिसके बाद पुलिस ने 11 अक्टूबर को SC/ST एक्ट की धारा 3(2)(v) (जातिगत अपमान) जोड़ी, जो उम्रकैद की सजा दे सकती है।

पुलिस ने 15 अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की, लेकिन पोस्टमॉर्टम पर परिवार की सहमति नहीं मिली। कमेटी ने कहा कि DGP हटने और आरोपी गिरफ्तार होने तक शव का अंतिम संस्कार नहीं होगा। चंडीगढ़ पुलिस ने 6 सदस्यीय SIT का गठन किया, जिसका नेतृत्व IG पुष्पेंद्र कुमार कर रहे हैं। हरियाणा सरकार ने 11 अक्टूबर को SP बिजरनिया को हटा दिया और सूरिंदर सिंह भोरिया को नया SP रोहतक नियुक्त किया।

CM सैनी ने परिवार से मुलाकात की और न्याय का आश्वासन दिया। हरियाणा के मंत्री कृष्ण लाल पंवार, कृष्ण कुमार बेदी, मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी और PS राजेश खुल्लर ने भी 11 अक्टूबर को परिवार को मनाने की कोशिश की, लेकिन पोस्टमॉर्टम पर सहमति नहीं बनी।

दलित संगठनों ने CM आवास के बाहर धरना दिया, DGP, SP और अन्य पर FIR की मांग की। यदि कार्रवाई न हुई तो पूरे हरियाणा में विरोध प्रदर्शन का चेतावनी दी। सोनिया गांधी ने अमनीत को पत्र लिखा, “पूरन की मौत दलित नौकरशाहों पर सामाजिक असमानता का प्रतीक है।” पूर्व IAS राजा शेखर वुंद्रू ने कहा, “यह मौत सिस्टमिक सुधार की मांग करती है।” अकाली दल और BSP ने समर्थन दिया।

भाजपा सरकार पर विपक्ष ने निशाना साधा। कांग्रेस नेता राव नरेंद्र सिंह ने कहा, “जातिवाद का जहर प्रशासन में घुल गया है। DGP को तुरंत हटाएं।” AAP के भगवंत मान ने परिवार से मिलकर इंसाफ की मांग की। DGP कपूर ने कहा, “जांच में पूरा सहयोग दूंगा।” SP बिजरनिया ने इनकार किया, “हमने पूरन को आरोपी नहीं बनाया।”

महापंचायत में हजारों लोग जुटने की उम्मीद। परिवार ने कहा, “इंसाफ नहीं, तो शांति नहीं।” यह मामला न केवल हरियाणा, बल्कि पूरे देश में जातिगत न्याय पर बहस छेड़ रहा है। SIT की रिपोर्ट जल्द आने की संभावना।

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