उत्तराखंड में पशुओं को दी जाने वाली इन 34 एंटी माइक्रोबियल दवाओं पर लगा प्रतिबंध, FDA ने जारी किया आदेश
उत्तराखंड में पशुओं को दी जाने वाली इन 34 एंटी माइक्रोबियल दवाओं पर लगा प्रतिबंध, FDA ने जारी किया आदेश
उत्तराखंड में पशुओं के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 34 एंटी माइक्रोबियल दवाओं पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देशों के अनुपालन में यह आदेश जारी किया है। इन दवाओं का उत्पादन, बिक्री, आयात और वितरण पूरी तरह बंद हो गया है। यह कदम एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) को रोकने और सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए उठाया गया है, क्योंकि इन दवाओं का असर दूध, मांस और अंडों के माध्यम से इंसानों तक पहुंच रहा था। FDA के ड्रग कंट्रोलर ने सभी जिला अधिकारियों और केमिस्टों को सख्त निर्देश दिए हैं कि उल्लंघन पर 3 साल की जेल और जुर्माना लगेगा।
प्रतिबंध का कारण: AMR और स्वास्थ्य जोखिम
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की जांच में पाया गया कि पशुपालक इन दवाओं का इस्तेमाल संक्रमण रोकने, भूख बढ़ाने और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए कर रहे थे। लेकिन इनका अतिरिक्त उपयोग बैक्टीरिया में रेजिस्टेंस पैदा कर रहा है, जो इंसानी बीमारियों के इलाज को मुश्किल बना रहा है। WHO की गाइडलाइंस के अनुसार, ये दवाएं ‘क्रिटिकली इम्पोर्टेंट एंटीमाइक्रोबियल्स’ (CIA) श्रेणी की हैं, जिनका पशुओं में इस्तेमाल प्रतिबंधित है। उत्तराखंड FDA ने राज्य स्तर पर इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए अभियान शुरू किया है।
प्रतिबंधित 34 दवाओं की सूची
प्रतिबंधित दवाओं में 15 एंटीबायोटिक्स, 18 एंटीवायरल्स और 1 एंटीप्रोटोजोल शामिल हैं। मुख्य दवाएं निम्नलिखित हैं:
| श्रेणी | दवाओं के नाम (कुछ प्रमुख) |
| एंटीबायोटिक्स (15) | यूरिडोपेनिसिलिन, सेफ्टोबिप्रोल, कार्बापेनेम्स, मोनोबैक्टम्स, ग्लाइकोपेप्टाइड्स, ऑक्साजोलिडिनोन्स, फिडैक्सोमिसिन, एरावासाइक्लिन, कोलिस्टिन, फॉस्फोमाइसिन
| एंटीवायरल्स (18) | अमैन्टाडाइन, फेविपिराविर, रेमडेसिविर, ओसेल्टामिविर
| एंटीप्रोटोजोल (1) | निताजॉक्सानाइड।
नोट: पूरी सूची FDA की आधिकारिक वेबसाइट या नोटिफिकेशन में उपलब्ध है। ये दवाएं मुख्य रूप से दूध देने वाले पशुओं, अंडा देने वाले पक्षियों और मांस उत्पादक जानवरों में इस्तेमाल होती थीं।
FDA का आदेश: क्या होगा उल्लंघन पर?
उत्तराखंड FDA ने सभी ड्रग इंस्पेक्टर्स को निर्देश दिए हैं कि वे राज्य भर में छापेमारी करें। यदि कोई केमिस्ट या पशु चिकित्सक इन दवाओं का स्टॉक या बिक्री पाया गया, तो IPC की धारा 274 (जहर बेचना) के तहत कार्रवाई होगी। ड्रग कंट्रोलर ने कहा, “सुरक्षित विकल्प बाजार में उपलब्ध हैं। पशुपालकों को वैकल्पिक दवाओं की जानकारी दी जाएगी।” राज्य सरकार ने पशु चिकित्सा विभाग के साथ मिलकर जागरूकता कैंप लगाने का प्लान बनाया है।
विशेषज्ञों की राय: सकारात्मक कदम, लेकिन चुनौतियां
पशु चिकित्सक डॉ. राकेश शर्मा ने कहा, “यह AMR को रोकने का महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन पशुपालकों को ट्रेनिंग और सस्ते विकल्पों की जरूरत है।” पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि इससे डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता सुधरेगी और एक्सपोर्ट पर सकारात्मक असर पड़ेगा। हालांकि, छोटे किसानों के लिए दवाओं की कमी एक समस्या हो सकती है।
यह आदेश केंद्रीय स्तर पर लागू है, लेकिन उत्तराखंड ने सबसे तेजी से अमल शुरू किया। अधिक जानकारी के लिए उत्तराखंड FDA की वेबसाइट या हेल्पलाइन 104 पर संपर्क करें। पशुपालक सतर्क रहें – स्वास्थ्य पहले!
