राजनीति

बिहार: मुजफ्फरपुर से पूर्व सांसद अजय निषाद की बीजेपी में घर वापसी

बिहार: मुजफ्फरपुर से पूर्व सांसद अजय निषाद की बीजेपी में घर वापसी

बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को एक बड़ा राजनीतिक बढ़त मिला है। मुजफ्फरपुर से पूर्व सांसद अजय निषाद और उनकी पत्नी प्रीति निषाद ने शुक्रवार देर शाम बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर मुजफ्फरपुर से हारने वाले अजय निषाद की यह ‘घर वापसी’ बीजेपी के लिए निशाद समाज के वोट बैंक को मजबूत करने का महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

अजय निषाद का राजनीतिक सफर: उतार-चढ़ाव भरा

अजय निषाद, जो पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय जय नारायण प्रसाद निषाद के बेटे हैं, ने 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट पर मुजफ्फरपुर सीट से शानदार जीत हासिल की थी। 2019 में उन्होंने महागठबंधन के राजभूषण चौधरी को 4 लाख से अधिक वोटों से हराया था। लेकिन 2024 के चुनाव से पहले बीजेपी ने उनका टिकट काट दिया और डॉ. राजभूषण चौधरी को उम्मीदवार बनाया। इससे नाराज अजय ने बीजेपी से इस्तीफा दे दिया और अप्रैल 2024 में दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में सदस्यता ली।

कांग्रेस में शामिल होने के बाद अजय ने बीजेपी पर ‘छल’ का आरोप लगाया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा को टैग करते हुए कहा था कि पार्टी ने उनके साथ विश्वासघात किया। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर मुजफ्फरपुर से चुनाव लड़ने वाले अजय को डॉ. राजभूषण चौधरी ने फिर हरा दिया। हार के बाद कांग्रेस में उनकी भूमिका सीमित हो गई, और अब 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले वे बीजेपी की ओर लौट आए हैं।

अजय की पत्नी प्रीति निषाद भी उनके साथ बीजेपी में शामिल हुई हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह फैसला निशाद समाज के नेताओं की मध्यस्थता से हुआ। अजय ने सदस्यता लेते हुए कहा, “बीजेपी ही वह मां है जहां से मैं निकला था। अब विधानसभा चुनाव में निशाद समाज की आवाज को मजबूत करने के लिए वापस लौट आया हूं।”

राजनीतिक प्रभाव: बीजेपी को क्या फायदा?

मुजफ्फरपुर लोकसभा क्षेत्र में निशाद समुदाय का करीब 3 लाख वोट बैंक है, जो विधानसभा की कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभा सकता है। अजय की घर वापसी से बीजेपी को मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी और सीवान जैसी सीटों पर मजबूती मिलेगी। विपक्षी दलों में हड़कंप मच गया है। आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने इसे “बीजेपी का ड्रामा” बताते हुए कहा कि अजय जैसे “पलटोर” पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने अजय का स्वागत करते हुए कहा, “अजय भाई की वापसी से पार्टी और मजबूत हुई है। वे निशाद समाज के प्रतीक हैं और बिहार की विकास यात्रा में योगदान देंगे।” पार्टी ने अजय को मुजफ्फरपुर जिले के किसी विधानसभा क्षेत्र से टिकट की संभावना जताई है, हालांकि आधिकारिक घोषणा बाकी है।

निष्कर्ष: चुनावी रणनीति का हिस्सा?

यह घटनाक्रम बिहार की सियासत में ‘घर वापसी’ की पुरानी परंपरा को दर्शाता है। 2025 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी-एनडीए बहुमत के करीब पहुंचने की कोशिश कर रही है, और ऐसे ‘फ्लिप-फ्लॉप’ नेता इसका हथियार बन सकते हैं। लेकिन अजय की विश्वसनीयता पर सवाल भी उठ रहे हैं। क्या यह वापसी स्थायी रहेगी, या फिर अगला ‘उतार’? समय ही बताएगा।

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