‘एअर इंडिया के बोइंग-787 विमानों में कई खराबी, उड़ान रोकें’: पायलटों के संगठन की नागरिक उड्डयन मंत्रालय को 3 मांग
‘एअर इंडिया के बोइंग-787 विमानों में कई खराबी, उड़ान रोकें’: पायलटों के संगठन की नागरिक उड्डयन मंत्रालय को 3 मांग
एअर इंडिया के बोइंग-787 ड्रीमलाइनर विमानों में लगातार हो रही तकनीकी खराबियों ने हवाई यात्रा की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पायलटों का प्रमुख संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने आज नागरिक उड्डयन मंत्रालय को पत्र लिखकर सभी बोइंग-787 विमानों को तत्काल ग्राउंड करने की मांग की है। संगठन ने तीन स्पष्ट मांगें रखी हैं, जो जून के अहमदाबाद विमान हादसे और हालिया घटनाओं से उपजी हैं। FIP के अध्यक्ष जी.एस. रंधावा ने पत्र में कहा, “एअर इंडिया के बोइंग-787 विमानों में इलेक्ट्रिकल सिस्टम की लगातार खराबियां यात्रियों और चालक दल की जान को खतरे में डाल रही हैं।”
हालिया घटनाएं: चेतावनी के संकेत
यह मांग हाल के दो प्रमुख हादसों के बाद आई है:
– 4 अक्टूबर 2025: अमृतसर से बर्मिंघम जा रही एअर इंडिया फ्लाइट AI-117 (बोइंग-787-8, VT-ANO) के लैंडिंग से पहले रैम एयर टर्बाइन (RAT) अनियोजित रूप से सक्रिय हो गया। RAT इलेक्ट्रिकल या हाइड्रोलिक फेलियर के समय आपातकालीन पावर के लिए इस्तेमाल होता है। विमान स्वास्थ्य निगरानी (AHM) सिस्टम ने बस पावर कंट्रोल यूनिट (BPCU) में खराबी का पता लगाया। विमान सुरक्षित उतरा, लेकिन यह घटना चिंता बढ़ाने वाली थी।
– 9 अक्टूबर 2025: वियना से दिल्ली आ रही फ्लाइट AI-154 को सिस्टम फेलियर के कारण दुबई डायवर्ट करना पड़ा।
– 12 जून 2025: अहमदाबाद से लंदन जा रही AI-171 (बोइंग-787-8) टेकऑफ के तुरंत बाद क्रैश हो गई, जिसमें 260 लोगों की मौत हो गई। प्रारंभिक जांच में इंजन फ्यूल कंट्रोल स्विच ऑफ होने और संभावित इलेक्ट्रिकल/हाइड्रोलिक फेलियर का जिक्र है।
FIP ने कहा कि बोइंग-787 के भारत में आने के बाद कई ऐसी घटनाएं दर्ज की गई हैं, जो इलेक्ट्रिकल सिस्टम की गंभीर समस्या दर्शाती हैं। एअर इंडिया के पास 34 बोइंग-787 विमान हैं, और ये खराबियां रखरखाव की कमी को उजागर कर रही हैं।
पायलट संगठन की तीन प्रमुख मांगें
FIP ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय को लिखे पत्र में निम्नलिखित तीन मांगें रखी हैं:
1. सभी बोइंग-787 विमानों को तत्काल ग्राउंड करें: उड़ानें रोककर इलेक्ट्रिकल सिस्टम की गहन जांच कराई जाए, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
2. विशेष ऑडिट का आदेश दें: DGCA के फ्लाइट सेफ्टी डिपार्टमेंट (FSD), एयर सेफ्टी और एयरवर्थिनेस के सीनियर स्टाफ द्वारा एअर इंडिया का स्पेशल ऑडिट कराया जाए। इसमें मिनिमम इक्विपमेंट लिस्ट (MEL) रिलीज और दोहराव वाली खराबियों (रिपीटेटिव स्नैग्स) की जांच शामिल हो, खासकर बोइंग-787 पर।
3. जांच और रखरखाव प्रक्रिया की समीक्षा: बोइंग-787 की इलेक्ट्रिकल सिस्टम की विस्तृत जांच के अलावा, एअर इंडिया के रखरखाव प्रोटोकॉल और सॉफ्टवेयर अपडेट की समीक्षा की जाए। FIP ने जोर दिया कि फ्यूल स्विच चेक जैसी सतही जांच पर्याप्त नहीं है।
FIP ने DGCA को भी 5 अक्टूबर को पत्र लिखा था, जिसमें इलेक्ट्रिकल सिस्टम की जांच की मांग की गई थी। DGCA ने 4 अक्टूबर की घटना पर जांच शुरू कर दी है और बोइंग की ओर से जारी फ्लीट टीम डाइजेस्ट (पिछली घटनाओं का सारांश) के आधार पर मेंटेनेंस करवाया है। हालांकि, FIP का कहना है कि यह पर्याप्त नहीं।
एअर इंडिया और DGCA का रुख
एअर इंडिया ने पत्र का जवाब देते हुए कहा, “हम सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। सभी प्रभावित विमानों पर बोइंग की सिफारिशों के अनुसार मेंटेनेंस पूरा हो चुका है, और कोई असंगति नहीं पाई गई।” DGCA ने बताया कि बोइंग ने सभी ऑपरेटर्स को RAT डिप्लॉयमेंट पर एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें पिछले मामलों का जिक्र है। लेकिन पायलट संगठन ने चेतावनी दी कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं, तो हवाई यात्रा की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला बोइंग-787 की वैश्विक समस्याओं (जैसे बैटरी इश्यूज) से जुड़ा हो सकता है, लेकिन भारत में एअर इंडिया की रखरखाव प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। AAIB (एयरक्राफ्ट एक्सिडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो) जून हादसे की जांच कर रहा है, और इसकी रिपोर्ट आने पर और स्पष्टता मिलेगी।
निष्कर्ष: सुरक्षा पहले
पायलटों की यह मांग हवाई यात्रा के क्षेत्र में एक बड़ा मुद्दा बन गई है। एअर इंडिया, जो टाटा समूह के अधीन है, पर दबाव बढ़ रहा है। यदि मंत्रालय ने तत्काल कार्रवाई नहीं की, तो अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर पड़ सकता है। यात्रियों से अपील है कि वे उड़ान से पहले एयरलाइन की स्टेटस चेक करें। यह घटनाक्रम न केवल एअर इंडिया, बल्कि पूरे भारतीय विमानन उद्योग के लिए सबक है कि सुरक्षा में कोई समझौता नहीं हो सकता।
