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कफ सिरप ही नहीं, ये दवाएं भी हो सकती हैं बच्चों के लिए जानलेवा! विशेषज्ञों की चेतावनी

कफ सिरप ही नहीं, ये दवाएं भी हो सकती हैं बच्चों के लिए जानलेवा! विशेषज्ञों की चेतावनी

सर्दी-खांसी के मौसम में माता-पिता अक्सर बच्चों को कफ सिरप या ओवर-द-काउंटर (OTC) दवाएं दे देते हैं, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि ये दवाएं छोटे बच्चों के लिए घातक साबित हो सकती हैं। FDA और मेयो क्लिनिक जैसे संगठनों की रिपोर्ट्स के अनुसार, 2 साल से कम उम्र के बच्चों को कफ-कोल्ड दवाएं बिल्कुल न दें, क्योंकि ये सांस लेने में रुकावट, दौरा, तेज हृदय गति या यहां तक कि मौत का कारण बन सकती हैं। हाल ही में दूषित कफ सिरप से कई बच्चों की जान जा चुकी है। आइए जानें, कौन सी दवाएं खतरनाक हैं और कैसे बचें।

कफ सिरप क्यों जानलेवा? मुख्य कारण

कफ सिरप में मौजूद सामग्री जैसे डिक्सट्रोमेथॉर्फन (DXM), एंटीहिस्टामाइन (जैसे डिफेनहाइड्रामाइन) और डीकंजेस्टेंट (जैसे स्यूडोएफेड्रिन) छोटे बच्चों के लिए हानिकारक हैं। 

– 2 साल से कम उम्र के बच्चों में: ये दवाएं सांस की गति धीमी कर सकती हैं, जो जीवन-घातक हो सकती है। FDA ने 2008 में ही इन्फैंट प्रोडक्ट्स को बाजार से हटा दिया था।

– 4-6 साल के बच्चों में: डॉक्टर की सलाह के बिना न दें; साइड इफेक्ट्स जैसे चक्कर, उनींदापन या व्यवहार परिवर्तन हो सकते हैं।

– दूषण का खतरा: हाल की रिपोर्ट्स में एथिलीन ग्लाइकॉल या डाइएथिलीन ग्लाइकॉल जैसे जहरीले तत्वों से दूषित सिरप से बच्चों की मौत हुई है। WHO ने 0.5 mg/kg से अधिक ग्लाइकॉल को अस्वीकार्य बताया है।

अध्ययनों से पता चलता है कि कफ सिरप बच्चों की खांसी को कम करने में प्लेसिबो से ज्यादा प्रभावी नहीं होते।

कफ सिरप के अलावा ये दवाएं भी खतरनाक

कफ-कोल्ड दवाओं के अलावा, कई अन्य OTC दवाएं बच्चों के लिए जोखिम भरी हैं। यहां प्रमुख उदाहरण:

– कोल्ड डीकंजेस्टेंट: मुख्य सामग्री – स्यूडोएफेड्रिन, फेनाइलेफ्रिन; खतरा बच्चों में – तेज हृदय गति, उच्च रक्तचाप, दौरा; उम्र सीमा (FDA/मेयो सलाह) – 2 साल से कम: न दें; 4-6 साल: डॉक्टर सलाह पर।

– एंटीहिस्टामाइन: मुख्य सामग्री – डिफेनहाइड्रामाइन, क्लोरफेनिरामाइन; खतरा बच्चों में – अत्यधिक उनींदापन, सांस रुकना, मौत; उम्र सीमा (FDA/मेयो सलाह) – 2 साल से कम: न दें; 6 साल से कम: सावधानी।

– पेन रिलीवर (ओवरडोज): मुख्य सामग्री – एसिटामिनोफेन (पैरासिटामॉल); खतरा बच्चों में – लीवर फेलियर, अगर कफ सिरप के साथ मिला; उम्र सीमा (FDA/मेयो सलाह) – सभी उम्र: डोज चेक करें; वयस्क दवा न दें।

– कोडीन-युक्त सिरप: मुख्य सामग्री – कोडीन, प्रोमेथाजीन; खतरा बच्चों में – सांस रुकना, नशा, मौत (मिसयूज में); उम्र सीमा (FDA/मेयो सलाह) – 12 साल से कम: न दें; किशोरों में दुरुपयोग खतरा।

– DXM-युक्त सिरप: मुख्य सामग्री – डिक्सट्रोमेथॉर्फन; खतरा बच्चों में – हाइपरथर्मिया, दौरा, मस्तिष्क क्षति (उच्च डोज में); उम्र सीमा (FDA/मेयो सलाह) – 4 साल से कम: न दें; किशोरों में नशे के लिए दुरुपयोग।

ये दवाएं अगर गलत डोज में दी जाएं या वयस्क पैकेजिंग से इस्तेमाल हों, तो जानलेवा हो सकती हैं। किशोरों में DXM का दुरुपयोग “रोबो” या “पर्पल ड्रैंक” के रूप में होता है, जो मौत का कारण बन सकता है।

बचाव के उपाय: विशेषज्ञों की सलाह

– डॉक्टर से पूछें: कभी खुद न दें; खासकर 6 साल से कम उम्र के बच्चों को।

– डोज सही रखें: FDA की सलाह—दवा के साथ दिए सिरिंज/कप का इस्तेमाल करें, घरेलू चम्मच न लें।

– होम रेमेडीज ट्राई करें: शहद (1 साल से ऊपर), नमकीन पानी से गरारे, ह्यूमिडिफायर या भाप। अध्ययन दिखाते हैं कि शहद कफ सिरप से ज्यादा प्रभावी है।

– चेतावनी के संकेत: अगर बच्चा सांस लेने में तकलीफ, तेज बुखार या 3 हफ्ते से ज्यादा खांसी हो, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।

– जागरूकता: दूषित दवाओं से बचने के लिए WHO- अप्रूव्ड ब्रांड चुनें।

अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (AAP) कहती है: “ज्यादातर कफ घरेलू उपचार से ठीक हो जाते हैं। दवा अंतिम विकल्प हो।” माता-पिता सतर्क रहें—बच्चों की सेहत पहले!

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