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डिजिटल अरेस्ट स्कैम से कैसे बचें? ED ने जारी की गाइडलाइंस: असली vs नकली समन की पहचान करें

डिजिटल अरेस्ट स्कैम से कैसे बचें? ED ने जारी की गाइडलाइंस: असली vs नकली समन की पहचान करें

डिजिटल अरेस्ट स्कैम ने देशभर में हाहाकार मचा रखा है। Enforcement Directorate (ED), CBI, पुलिस या कस्टम्स के नाम पर फ्रॉडस्टर्स वीडियो कॉल या मैसेज से लोगों को ब्लैकमेल कर रहे हैं। हाल ही में ED ने एक चार्जशीट फाइल की, जिसमें 8 लोगों पर फर्जी IPO और डिजिटल अरेस्ट स्कैम का आरोप है। Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) ने भी पब्लिक एडवाइजरी जारी की है। ED के मुताबिक, “डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज कानून में नहीं है। असली अधिकारी कभी फोन पर पैसे या जानकारी नहीं मांगते।” आइए जानें, यह स्कैम कैसे काम करता है और इससे कैसे बचें।

डिजिटल अरेस्ट स्कैम क्या है और कैसे होता है?

यह एक साइबर फ्रॉड है, जहां फ्रॉडस्टर्स:

– फोन, ईमेल या सोशल मीडिया से संपर्क करते हैं, खुद को ED, CBI, IT डिपार्टमेंट या पुलिस अधिकारी बताते हैं।

– आपको ड्रग्स, मनी लॉन्ड्रिंग या टैक्स चोरी जैसे फर्जी केस में फंसाने का डर दिखाते हैं।

– वीडियो कॉल पर फर्जी पुलिस स्टेशन बैकग्राउंड, यूनिफॉर्म और दस्तावेज दिखाकर “डिजिटल अरेस्ट” का दावा करते हैं।

– पैसे ट्रांसफर (क्रिप्टो, गिफ्ट कार्ड) या बैंक डिटेल्स मांगते हैं, वरना “अरेस्ट” की धमकी देते हैं।

– हाल के केस: गुजरात के 90 साल के बुजुर्ग को 71 लाख का नुकसान, मुंबई की डॉ. पूजा गोेल को करोड़ों का चूना। कुल नुकसान करोड़ों में।

ED और I4C के अनुसार, यह स्कैम विदेशी सिंडिकेट (जैसे चीन से) चला रहे हैं, और भारत में 2024 में हजारों शिकायतें दर्ज हुईं।

डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचें? ED की मुख्य सलाह

ED और I4C ने साफ कहा है: घबराएं नहीं, शांत रहें। यहां स्टेप-बाय-स्टेप गाइड:

1. शक करें अगर धमकी मिले: कोई अधिकारी फोन पर अरेस्ट, पैसे या “डिजिटल अरेस्ट” नहीं करता। हमेशा कॉल कट करें।

2. सीधे संपर्क करें: आधिकारिक वेबसाइट (enforcementdirectorate.gov.in) से ED का नंबर लें और खुद कॉल करें। फर्जी नंबर पर भरोसा न करें।

3. पैसे न दें: क्रिप्टो, गिफ्ट कार्ड या वायर ट्रांसफर न करें। असली एजेंसी कभी ऐसा नहीं मांगती।

4. वीडियो कॉल न लें: अगर दबाव डालें, तो कनेक्ट न करें। फर्जी बैकग्राउंड (पुलिस स्टेशन जैसा) पहचानें।

5. डॉक्यूमेंट्स चेक करें: असली समन पर कोर्ट सील, डिजिटल सिग्नेचर और एन्क्रिप्शन होता है (BNSS सेक्शन 532 के तहत)।

6. रिपोर्ट करें: तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। सबूत (कॉल रिकॉर्डिंग, मैसेज) सेव रखें।

7. जागरूक रहें: सॉफ्टवेयर अपडेट रखें, अनजान लिंक्स न क्लिक करें। फैमिली मेंबर्स को अलर्ट करें।

प्रधानमंत्री मोदी ने “मन की बात” में कहा, “रुकें, सोचें, फिर एक्शन लें।”

असली समन vs नकली समन: ED की पहचान गाइड

ED ने स्पष्ट किया कि असली समन हमेशा लिखित या आधिकारिक चैनल से आता है। यहां तुलना:

– डिलीवरी मोड: असली समन – रजिस्टर्ड पोस्ट, ईमेल (आधिकारिक ID से) या कोर्ट के माध्यम से; नकली समन – फोन, व्हाट्सएप, अनजान ईमेल।

– सुरक्षा फीचर्स: असली समन – डिजिटल सिग्नेचर, कोर्ट सील, एन्क्रिप्टेड; BNSS के तहत वैलिड; नकली समन – कोई सिग्नेचर नहीं, आसानी से फेक बनाया जा सकता है।

– कंटेंट: असली समन – स्पष्ट केस डिटेल्स, कोर्ट डेट, लीगल भाषा; पैसे की मांग नहीं; नकली समन – धमकी, तुरंत पेमेंट की डिमांड, डर पैदा करने वाली भाषा।

– संपर्क: असली समन – आधिकारिक नंबर/ईमेल पर वेरिफाई करें; नकली समन – स्पूफ्ड नंबर, वीडियो कॉल पर दबाव।

– कानूनी वैलिडिटी: असली समन – कोर्ट से जारी, पर्सनल सर्विस जरूरी; नकली समन – “डिजिटल अरेस्ट” जैसा कोई प्रावधान नहीं।

अगर शक हो, तो नजदीकी ED ऑफिस या वकील से चेक करवाएं।

क्या करें अगर स्कैम हो गया?

– तुरंत बैंक को सूचित करें, अकाउंट फ्रीज करवाएं।

– पुलिस FIR दर्ज कराएं।

– I4C हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।

– साइबर सेल से मदद लें।

ED ने चेतावनी दी: “ये स्कैम शिक्षित लोगों को भी फंसाते हैं। जागरूकता ही बचाव है।” हाल ही में ED ने बेंगलुरु कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें फर्जी इनवेस्टमेंट और डिजिटल अरेस्ट का खुलासा हुआ।

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