गाजा युद्ध: UN की रिपोर्ट में खुलासा- 10 साल में मलबा हटेगा, 25 साल में लौटेगी उपजाऊ जमीन
इजरायल-हमास युद्ध के तीसरे साल में प्रवेश करते ही संयुक्त राष्ट्र ने गाजा पट्टी की तबाही पर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट जारी की है। UN की डैमेज असेसमेंट रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध से उत्पन्न हुए 50 मिलियन टन से अधिक मलबे को हटाने में कम से कम 10 साल लगेंगे, जबकि उपजाऊ कृषि भूमि की उर्वरता बहाल करने में 25 साल से ज्यादा समय लग सकता है। यह रिपोर्ट युद्ध की पर्यावरणीय और आर्थिक तबाही को उजागर करती है, जहां 80% इमारतें ध्वस्त हो चुकी हैं और 90% आबादी बेघर है।
रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट, जो UNEP (UN Environment Programme), UN-Habitat और FAO (Food and Agriculture Organisation) के सहयोग से तैयार की गई है, गाजा की बुनियादी ढांचे, कृषि और पर्यावरण पर युद्ध के प्रभाव का विस्तृत आकलन करती है। प्रमुख बिंदु:
– मलबा हटाने की चुनौती: युद्ध से उत्पन्न 50 मिलियन टन मलबे में मानव अवशेष, एस्बेस्टस, विस्फोटक रसायन और अनफट बम शामिल हैं। इसे हटाने में 10 साल लगेंगे, और लागत 1.2 ट्रिलियन डॉलर (करीब 100 लाख करोड़ रुपये) आंकी गई है। लॉजिस्टिकल बाधाएं और असुरक्षा के कारण यह प्रक्रिया और धीमी हो सकती है।
– कृषि भूमि की तबाही: गाजा की 15,000 हेक्टेयर उपजाऊ जमीन में से सिर्फ 232 हेक्टेयर ही अब खेती योग्य बची है। 98.5% भूमि बंजर हो चुकी है। मिट्टी में विस्फोटक रसायनों का स्तर तिगुना हो गया है, जिससे रेगिस्तानीकरण (डेजर्टिफिकेशन) का खतरा बढ़ गया है। संतरे, स्ट्रॉबेरी, टमाटर जैसी फसलें उगाने वाली यह भूमि 25 साल में ही बहाल हो पाएगी।
– बुनियादी ढांचे का नुकसान: 92% आवासीय इमारतें (4.36 लाख घर) क्षतिग्रस्त या नष्ट। 36 अस्पतालों में 94% प्रभावित, 90% स्कूल ध्वस्त। कुल नुकसान 4.5 ट्रिलियन डॉलर (करीब 377 लाख करोड़ रुपये) का अनुमान। 23 लाख की आबादी में 90% बेघर, टेंटों में रहने को मजबूर।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि बिना तत्काल पुनर्निर्माण के, गाजा में पानी, बिजली और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी से महामारी फैल सकती है।
युद्ध का मानवीय और पर्यावरणीय प्रभाव
7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले से शुरू हुआ यह युद्ध अब तीसरा साल पूरा कर रहा है। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 66,148 से अधिक लोग मारे गए, जिनमें 50% महिलाएं और बच्चे हैं। हजारों शव अभी भी मलबे में दबे हैं। UNRWA की रिपोर्ट के मुताबिक, 2.3 मिलियन लोगों में से 90% बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। पर्यावरणीय नुकसान इतना गहरा है कि वेटलैंड्स, तटीय क्षेत्र और वादी गाजा नदी पूरी तरह प्रभावित हैं।
UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा, “गाजा की तबाही मानव इतिहास की सबसे बड़ी पर्यावरणीय आपदाओं में से एक है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तुरंत सहायता पहुंचानी होगी, वरना पीढ़ियां प्रभावित रहेंगी।” विशेषज्ञों का मानना है कि यह जेनोसाइड जैसी स्थिति है, जहां इजरायली सेना ने जानबूझकर कृषि और स्वास्थ्य ढांचे को निशाना बनाया।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
रिपोर्ट जारी होते ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय में हलचल मच गई। यूरोपीय संघ ने 1 बिलियन यूरो की अतिरिक्त सहायता का ऐलान किया, जबकि विश्व बैंक ने पुनर्निर्माण के लिए 18.5 बिलियन डॉलर का अनुमान दोहराया। फिलिस्तीन अथॉरिटी ने इजरायल पर युद्ध अपराधों का आरोप लगाया, जबकि इजरायल ने इसे “आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई” बताया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस पर चर्चा की मांग उठी है।
यह रिपोर्ट गाजा में शांति और पुनर्वास की तत्काल जरूरत पर जोर देती है, लेकिन चल रहे संघर्ष के बीच यह एक लंबी चुनौती बनी हुई है।
