राजनीति

बिहार: NDA में सीट बंटवारे पर मांझी के तेवर सख्त… बोले- 15 से कम सीट मंजूर नहीं

बिहार: NDA में सीट बंटवारे पर मांझी के तेवर सख्त… बोले- 15 से कम सीट मंजूर नहीं

बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है, लेकिन NDA गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर अब खींचतान तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने सख्त लहजे में कहा कि उनकी पार्टी को कम से कम 15 सीटें मिलनी चाहिएं, वरना वे 100 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने को तैयार हैं। बोधगया में पत्रकारों से बात करते हुए मांझी ने इसे अपनी पार्टी के लिए “करो या मरो” की स्थिति बता दिया।

मांझी की मांग और धमकी

मांझी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हमारी पार्टी को मान्यता प्राप्त दल बनाने के लिए कम से कम 8 सीटें जीतनी होंगी और कुल वोटों का 6 फीसदी हिस्सा हासिल करना होगा। इसलिए NDA से 15 सीटों की मांग कर रहे हैं। अगर इतनी सीटें नहीं मिलीं तो हम अकेले 100 सीटों पर लड़ेंगे, जहां हर जगह हमारे पास 10-15 हजार वोटर हैं।” उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी बिना पैसे खर्च किए भीड़ जुटा सकती है, जबकि अन्य दल पैसे के दम पर ऐसा करते हैं। मांझी का यह बयान बीजेपी चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान की हालिया पटना यात्रा के ठीक बाद आया है, जहां सीट बंटवारे पर चर्चा हुई थी।

पिछले चुनाव में HAM को 7 सीटें मिली थीं, जहां से वे 4 जीत पाए थे। इस बार मांझी 15-20 सीटों की मांग कर रहे हैं, लेकिन BJP-JD(U) गठबंधन 3-4 से ज्यादा देने को तैयार नहीं दिख रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि चिराग पासवान की LJP (RV) को 20-22 सीटें मिल सकती हैं, जबकि छोटे सहयोगियों को सीमित हिस्सा देना पड़ेगा।

NDA में चल रही चर्चाएं

रविवार को धर्मेंद्र प्रधान ने JD(U), HAM, LJP (RV) और RLSP के नेताओं से अलग-अलग बैठकें कीं। मांझी से मिलने के बाद उन्होंने कहा कि बंटवारा जल्द तय हो जाएगा। हालांकि, मांझी ने बैठक के बाद कहा, “सीट बंटवारे पर बात हुई, लेकिन सब ठीक है।” लेकिन स्रोतों के मुताबिक, BJP-JD(U) मिलकर कम से कम 105 सीटें लेंगी, जिससे छोटे दलों को त्याग करना पड़ रहा है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी मांझी से मुलाकात की, लेकिन कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ।

NDA के एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “मांझी की मांग ज्यादा है, लेकिन गठबंधन की मजबूती के लिए समझौता होगा। अगर वे अकेले लड़े तो विपक्ष को फायदा हो सकता है।”

राजनीतिक पृष्ठभूमि

बिहार में 243 सीटों वाले विधानसभा चुनाव नवंबर-दिसंबर में होंगे। 2020 में NDA ने 125 सीटें जीती थीं, लेकिन महागठबंधन ने कड़ा मुकाबला दिया था। मांझी की पार्टी महादलित और EBC वोट बैंक पर निर्भर है, जो NDA की रणनीति का अहम हिस्सा है। अगर मांझी बगावत करते हैं तो गठबंधन कमजोर पड़ सकता है, खासकर मुसहर और अन्य पिछड़ी जातियों में। विपक्षी महागठबंधन ने इसे NDA की आंतरिक कलह बताते हुए हमला बोला है। RJD नेता ने कहा, “NDA टूटने की कगार पर है, जनता सब देख रही है।”

मांझी का यह बयान गठबंधन में तनाव बढ़ा रहा है, और अगले कुछ दिनों में अंतिम बंटवारे का ऐलान हो सकता है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि छोटे दलों की मांगें पूरी न होने से NDA को नुकसान हो सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *