Saturday, September 12, 2026
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‘घटनास्थल से भागना मानसिकता दर्शाता है’: करूर भगदड़ हादसे पर एक्टर विजय को मद्रास HC की कड़ी फटकार, रोड शो पर SOP की मांग

‘घटनास्थल से भागना मानसिकता दर्शाता है’: करूर भगदड़ हादसे पर एक्टर विजय को मद्रास HC की कड़ी फटकार, रोड शो पर SOP की मांग

तमिलनाडु के करूर में अभिनेता से राजनेता बने विजय की रैली के दौरान मची भगदड़, जिसमें 41 लोगों की मौत हुई थी, पर मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने टीवीके (तमिल गा वेत्री कझगम) नेताओं को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि “घटनास्थल से भागना किसी की मानसिकता दर्शाता है” और विजय सहित पार्टी नेताओं ने न तो घटनास्थल पर रुककर मदद की, न ही सार्वजनिक रूप से खेद जताया। न्यायमूर्ति एस. सेंथिलकुमार की एकल पीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया और पूछा कि क्यों विजय के प्रति नरमी बरती जा रही है, जबकि वीडियो और तस्वीरें सब कुछ बयां कर रही हैं। कोर्ट एक जनहित याचिका (PIL) पर भी सुनवाई कर रही है, जिसमें गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक को व्यापक दिशा-निर्देश या मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार होने तक रोड शो और रैलियों की अनुमति न देने का अनुरोध किया गया है।

हादसे का विवरण और कोर्ट की टिप्पणियां

27 सितंबर को करूर में विजय की चुनावी रैली के दौरान भगदड़ मची, जिसमें 41 लोग (जिनमें 16 महिलाएं और 10 बच्चे शामिल) मारे गए और 60 से अधिक घायल हुए। पुलिस की FIR के अनुसार, रैली स्थल की क्षमता 10,000 लोगों की थी, लेकिन 27,000 से अधिक समर्थक जमा हो गए। विजय शाम 7 बजे पहुंचे, जबकि भीड़ दोपहर से इकट्ठी हो रही थी। स्टेज पर एक 9 वर्षीय बच्ची के लापता होने की जानकारी मिलने पर विजय ने अपील की, जिससे अफरा-तफरी मच गई। कोर्ट ने कहा, “यह गलत प्रबंधन का परिणाम है। विजय का प्रचार वाहन भीड़ के बीच रुक गया, जिससे स्थिति बेकाबू हो गई।” उन्होंने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा कि “क्या यह खेदजनक घटना के बाद भी राजनीतिक संरक्षण दिया जा रहा है?” कोर्ट ने अगली सुनवाई 10 अक्टूबर तय की है।

PIL में क्या मांग?

याचिका में कहा गया है कि रोड शो और रैलियों के दौरान भीड़ प्रबंधन के लिए SOP की कमी से ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। याचिकाकर्ता ने अनुरोध किया कि:

– गृह विभाग और पुलिस महानिदेशक को 3 महीने में दिशा-निर्देश तैयार करने का आदेश दें।

– SOP बनने तक किसी भी राजनीतिक रोड शो या रैली की अनुमति न दी जाए।

– मौजूदा सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा हो, जिसमें CCTV, एंबुलेंस और पुलिस बल की तैनाती शामिल हो।

कोर्ट ने PIL पर राज्य सरकार को जवाब मांगा है और कहा कि “ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तत्काल कदम जरूरी हैं।”

विजय और टीवीके की प्रतिक्रिया

हादसे के बाद विजय ने चुप्पी तोड़ी और कहा, “मेरा दिल टूट गया है। समर्थकों की सुरक्षा मेरी जिम्मेदारी है।” टीवीके ने मृतकों के परिवारों को 20 लाख और घायलों को 2 लाख रुपये मुआवजे का ऐलान किया। पार्टी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर CBI या SIT से जांच की मांग की और DMK पर “सुनियोजित साजिश” का आरोप लगाया। टीवीके नेता अरिवाजगन ने कहा, “स्थानीय CCTV फुटेज से DMK कार्यकर्ताओं की साजिश साफ है।” हालांकि, विजय ने घटनास्थल पर रुकने या तत्काल खेद व्यक्त न करने पर चुप्पी साधी।

राजनीतिक हलचल

तमिलनाडु में सियासत गरमाई हुई है। DMK नेता टीकेएस इलंगोवन ने कहा, “जांच आयोग की रिपोर्ट के आधार पर विजय को गिरफ्तार किया जा सकता है।” भाजपा की तमिलिसाई सौंदरराजन ने आयोग को “पक्षपाती” बताया और कहा कि पुलिस की खुफिया विफलता की जांच नहीं हो रही। राज्य सरकार ने कहा कि पुलिस ने 50 लोगों पर एक सिपाही तैनात किया था, लेकिन भीड़ बेकाबू हो गई। एडीजीपी (लॉ एंड ऑर्डर) देवसिरवथम ने माना, “स्थिति अराजक हो गई थी, घायलों को भीड़ से निकालना मुश्किल था।”

न्यायमूर्ति अरुणा जगदीशन की अध्यक्षता में जांच समिति रिपोर्ट सौंप चुकी है, लेकिन कोर्ट की फटकार से मामला और गंभीर हो गया है।

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