राजनीति

‘असली शिवसेना हमारे पास, बीजेपी अमीबा जैसी हो गई’: शिवाजी पार्क दशहरा रैली में उद्धव ठाकरे का केंद्र-राज्य सरकार पर तीखा प्रहार

‘असली शिवसेना हमारे पास, बीजेपी अमीबा जैसी हो गई’: शिवाजी पार्क दशहरा रैली में उद्धव ठाकरे का केंद्र-राज्य सरकार पर तीखा प्रहार

विजयादशमी के पावन अवसर पर मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में शिवसेना (UBT) की पारंपरिक दशहरा रैली ने एक बार फिर राजनीतिक रंग ले लिया। भारी बारिश के बीच लाखों समर्थकों की उपस्थिति में उद्धव ठाकरे ने मंच संभाला और केंद्र व महाराष्ट्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “असली शिवसेना आज भी हमारे पास है”, जबकि शिंदे गुट को ‘पीतल’ और अपने वफादारों को ‘सोना’ बताते हुए बीजेपी को ‘अमीबा’ जैसा करार दिया। रैली में किसानों की कर्जमाफी, मराठी भाषा की रक्षा और आगामी BMC चुनावों पर जोर दिया गया।

शाम 5 बजे शुरू हुई रैली में उद्धव ठाकरे ने सबसे पहले छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया, जो बालासाहेब ठाकरे द्वारा 1966 में शुरू की गई 59 वर्ष पुरानी परंपरा का प्रतीक है। बारिश न रुकने के बावजूद कार्यकर्ताओं का उत्साह देखते ही बन था। उद्धव ने कहा, “जो लोग सत्ता के लालच में भाग गए, वे पीतल के हैं। लेकिन जो आज भी हमारे साथ खड़े हैं, वे सोने जैसे हैं। असली शिवसेना यहीं है, जो महाराष्ट्र की मिट्टी से जुड़ी है।” उन्होंने शिंदे गुट पर तंज कसते हुए कहा कि “बीजेपी अमीबा जैसी हो गई है – शरीर में घुस जाए तो पेट दर्द करे, समाज में घुस जाए तो शांति भंग हो।”

किसानों की कर्जमाफी के मुद्दे पर उद्धव ने महाराष्ट्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा, “सरकार किसानों की फसलें बर्बाद होने के बाद भी कर्जमाफी का वादा पूरा नहीं कर रही। महाराष्ट्र के किसान सड़कों पर उतर आए हैं, लेकिन दिल्ली और मनtralay की कुर्सियां इनकी पीड़ा नहीं सुन रही।” मराठी भाषा और संस्कृति की रक्षा पर जोर देते हुए उद्धव ने चेतावनी दी, “मराठी पर हिंदी को शासन करने नहीं देंगे। हमारी मातृभाषा हमारी पहचान है, इसे कोई थोप नहीं सकता।” यह बयान हाल के भाषाई विवादों के बीच आया, जहां मराठी समर्थकों ने हिंदी के बढ़ते प्रभाव पर सवाल उठाए थे।

रैली के दौरान उद्धव ने बीजेपी और शिंदे सरकार पर भ्रष्टाचार व बेरोजगारी के आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “सत्ता में बैठे लोग महाराष्ट्र के लोगों के साथ अन्याय कर रहे हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत न पहुंचे, लेकिन चुनावी रैलियों के लिए फंड्स जुटा लिए जाते हैं।” पार्टी नेता संजय राउत ने मंच से कहा कि “यह रैली ऐतिहासिक होगी, जबकि दूसरी तरफ (शिंदे गुट) सिर्फ धुआं निकलेगा।” रैली में MNS प्रमुख राज ठाकरे की मौजूदगी की अटकलें भी थीं, जो BMC चुनावों से पहले संभावित गठबंधन का संकेत दे सकती थीं, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।

दूसरी ओर, एकनाथ शिंदे ने गोरेगांव के नेस्को ग्राउंड में अपनी रैली आयोजित की, जहां उन्होंने उद्धव को निशाना बनाते हुए कहा, “अगर बालासाहेब होते तो हमारी पीठ थपथपाते।” शिंदे गुट ने बारिश और बाढ़ के कारण रैली को छोटा रखा, लेकिन बीजेपी ने उद्धव की रैली रद्द करने की मांग की थी। मुंबई पुलिस ने दोनों स्थानों पर 15,000 से अधिक जवान तैनात किए, और ट्रैफिक प्लान में बदलाव किया गया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह रैली आगामी BMC और विधानसभा चुनावों का बिगुल साबित होगी। शिवसेना के दोनों गुटों के बीच ‘असली शिवसेना’ की जंग तेज हो गई है, और उद्धव का यह प्रहार महाराष्ट्र की सियासत को नई दिशा दे सकता है।

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