उत्तरकाशी: जर्नलिस्ट राजीव प्रताप की संदिग्ध मौत: पत्नी ने खोला धमकी का राज, कौन है जिम्मेदार? अभी तक की पूरी अपडेट
उत्तरकाशी जर्नलिस्ट राजीव प्रताप की संदिग्ध मौत: पत्नी ने खोला धमकी का राज, कौन है जिम्मेदार? अभी तक की पूरी अपडेट
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां फ्रीलांस पत्रकार राजीव प्रताप सिंह (36 वर्ष) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। 18 सितंबर 2025 को लापता हुए राजीव का शव 28 सितंबर को जोशियाड़ा बैराज (भागीरथी नदी) से बरामद हुआ। उनकी पत्नी ने खुलासा किया है कि राजीव को उनकी खोजी रिपोर्टिंग के कारण लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं। यह मामला अब पत्रकारिता की आजादी और प्रेस फ्रीडम पर सवाल खड़ा कर रहा है। आइए, पूरी घटना को स्टेप-बाय-स्टेप समझते हैं और जानते हैं अभी तक की अपडेट्स क्या हैं।
क्या हुआ था? घटना का पूरा क्रम
– लापता होने की शुरुआत: 18 सितंबर 2025 की रात राजीव प्रताप उत्तरकाशी के ज्ञानसू इलाके से अपने दोस्त सोबन सिंह की कार लेकर गंगोरी की ओर निकले थे। दोस्त रास्ते में उतर गया, और उसके बाद राजीव का कोई पता नहीं चला। 19 सितंबर को उनकी कार स्यूणा गांव के पास भागीरथी नदी में मिली, जो खाई से गिरने जैसी लग रही थी।
– खोजी प्रयास: परिवार ने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। NDRF (नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स), SDRF और स्थानीय रेस्क्यू टीमों ने सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन 10 दिनों तक कोई सुराग नहीं मिला। सोशल मीडिया पर भी कैंपेन चले, जहां पत्रकार संगठनों ने भी आवाज उठाई।
– शव बरामद: 28 सितंबर को जोशियाड़ा बैराज से उनका शव मिला। पुलिस ने शव की शिनाख्त की और पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। शुरुआती जांच में कोई बाहरी चोट के निशान नहीं मिले।
पत्नी का खुलासा: धमकी का ‘राज’ और संदेह
– राजीव की पत्नी ने मीडिया को बताया कि मौत से ठीक पहले राजीव काफी परेशान थे। उन्होंने उत्तरकाशी जिला अस्पताल की जर्जर हालत पर एक वीडियो रिपोर्ट बनाई थी, जिसमें दवाओं की कमी, खराब इंफ्रास्ट्रक्चर और मरीजों की बदहाली दिखाई गई थी। एक स्कूल की स्थिति पर भी रिपोर्ट की थी।
– धमकी का राज: वीडियो वायरल होने के बाद राजीव को फोन पर धमकियां मिलने लगीं। उन्हें कहा गया, “वीडियो हटा लो, वरना जान से मार देंगे।” पत्नी का कहना है कि ये धमकियां अस्पताल प्रशासन या स्थानीय प्रभावशाली लोगों से जुड़ी हो सकती हैं। राजीव ने परिवार को बताया था कि वे डर रहे हैं, लेकिन रिपोर्ट हटाने से इनकार कर दिया।
– फाउल प्ले का संदेह: परिवार का मानना है कि यह एक्सीडेंट नहीं, बल्कि साजिश है। कार नदी में कैसे गिरी? शव इतने दिनों बाद क्यों मिला? ये सवाल उठ रहे हैं। पत्नी ने कहा, “राजीव कभी रात में अकेले ड्राइव नहीं करते थे, वे सतर्क रहते थे।”
पुलिस और सरकार की प्रतिक्रिया
– पुलिस का स्टैंड: उत्तरकाशी SP ने कहा कि प्रारंभिक जांच में यह कार एक्सीडेंट लगता है—कार खाई से गिरकर नदी में चली गई। कोई बाहरी चोट नहीं मिली, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार है। धमकी के आरोपों की जांच की जा रही है।
– मुख्यमंत्री का ऐलान: CM पुष्कर सिंह धामी ने शोक व्यक्त किया और “गहन एवं निष्पक्ष जांच” के निर्देश दिए। उन्होंने परिवार को हर संभव सहायता का भरोसा दिया।
– पोस्टमॉर्टम अपडेट: रिपोर्ट अभी आई नहीं है, लेकिन 30 सितंबर तक कोई नया खुलासा नहीं हुआ।
अभी तक की मुख्य अपडेट्स (30 सितंबर 2025 तक)
– 29 सितंबर: शव का अंतिम संस्कार केदार घाट पर हुआ। परिवार ने CBI जांच की मांग की।
– 30 सितंबर: CPJ (कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर “क्रेडिबल जांच” की मांग की, कहा कि पत्रकारिता से जुड़े एंगल को नजरअंदाज न करें। NAJ, DUJ और KUWJ जैसे संगठनों ने भी प्रोब की डिमांड की।
– जांच की स्थिति: पुलिस अब धमकी कॉल्स की ट्रेसिंग कर रही है। परिवार ने हाईकोर्ट जाने की बात कही।
राजीव प्रताप कौन थे?
– राजीव IIMC (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन), दिल्ली से 2020-21 में हिंदी पत्रकारिता में पोस्ट-ग्रेजुएट डिप्लोमा कर चुके थे।
– वे “Delhi Uttarakhand Live” नामक यूट्यूब चैनल चलाते थे, जहां उत्तराखंड के स्थानीय मुद्दों (स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण) पर ग्राउंड रिपोर्टिंग करते थे। कोई बड़ा मीडिया हाउस से जुड़े नहीं थे, लेकिन लाखों व्यूज वाले वीडियोज बनाते थे।
– उनकी मौत ने एक बार फिर भारत में पत्रकारों की असुरक्षा पर बहस छेड़ दी है—2025 में ही कई केस रिपोर्ट हुए हैं।
क्यों है यह मामला संवेदनशील?
यह सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि प्रेस फ्रीडम का सवाल है। अगर धमकियां साबित हुईं, तो जिम्मेदार कौन—अस्पताल अधिकारी, स्थानीय पावरफुल लोग या कुछ और? परिवार को न्याय मिलना चाहिए।
