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बरेली हिंसा के बाद मौलाना तौकीर पर योगी का बड़ा ऐक्शन

उत्तर प्रदेश के बरेली में हालिया हिंसा के बाद प्रशासन की कार्रवाई का सिलसिला जारी है। बरेली नगर निगम ने रविवार को मौलाना तौकीर रजा खान की संस्था इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) के दफ्तर को सील कर दिया। यह दफ्तर शहर के एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के अंदर स्थित था, जो नाले पर अवैध निर्माण के कारण सील किया गया। नगर निगम ने पहले इस शॉपिंग कॉम्प्लेक्स को नोटिस जारी किया था, लेकिन कार्रवाई न होने पर अब IMC का दफ्तर भी लक्ष्य बना। यह कदम बरेली में ‘आई लव मुहम्मद’ अभियान के समर्थन में हुई हिंसा के बाद उठाया गया, जिसमें तौकीर रजा को मुख्य आरोपी माना गया है।

हिंसा 26 सितंबर को भड़की थी, जब IMC द्वारा आयोजित प्रस्तावित प्रदर्शन को प्रशासन ने अनुमति न देने पर रद्द कर दिया। इसके बाद आला हजrat दरगाह के बाहर और शहर के कई इलाकों में पथराव, तोड़फोड़ और पुलिस पर हमले हुए। पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल कर भीड़ को तितर-बितर किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे ‘सिस्टम को बाधित करने की कोशिश’ बताया और कहा कि ‘कोई भी व्यवस्था को ठप नहीं कर सकता।’ अब तक 11 FIR दर्ज हो चुकी हैं, जिनमें 2,000 से अधिक लोगों का नाम है। दो FIR में सीधे तौर पर तौकीर रजा का नाम दर्ज है।

तौकीर रजा की गिरफ्तारी और IMC का नेटवर्क

मौलाना तौकीर रजा, जो बरेलवी संप्रदाय के प्रमुख आलिम और IMC के संस्थापक हैं, 27 सितंबर को गिरफ्तार कर लिए गए थे। वे अहमद रजा खान के वंशज हैं और बरेली-बुलंदशहर क्षेत्र में राजनीतिक प्रभाव रखते हैं। पुलिस ने उनकी और उनके सहयोगियों के मोबाइल फोन जब्त कर जांच शुरू कर दी है। विशेष जांच दल (SIT) बनाया गया है, जो IMC के अन्य फरार सदस्यों की तलाश कर रहा है। हिंसा के दौरान गोलीबारी के आरोप भी लगे हैं। तौकीर रजा को ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजा गया है, और पुलिस का दावा है कि ‘ऑनलाइन टूलकिट’ के जरिए उनके वीडियो वायरल करने की साजिश रची गई।

नगर निगम की कार्रवाई का विवरण

नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स नाले पर अवैध रूप से बनाया गया था, जिसके कारण जल निकासी प्रभावित हो रही थी। IMC का दफ्तर इसी कॉम्प्लेक्स के एक हिस्से में चल रहा था। पहले नोटिस के बावजूद निर्माण नहीं हटाया गया, इसलिए रविवार को भारी पुलिस बल के साथ सीलिंग की गई। यह कार्रवाई ‘बुलडोजर जस्टिस’ की तर्ज पर देखी जा रही है, जहां हिंसा से जुड़े अवैध निर्माणों पर सख्ती की जा रही है। जिला मजिस्ट्रेट अविनाश सिंह ने कहा, “कानून सबके लिए बराबर है। अवैध निर्माण हटाना हमारा कर्तव्य है।”

शहर में तनाव और सुरक्षा व्यवस्था

हिंसा के बाद बरेली में भारी सुरक्षा बल तैनात हैं। इंटरनेट सेवाएं रविवार तक बंद रहीं, और फ्लैग मार्च किए गए। अब स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन संवेदनशील इलाकों में सतर्कता बरती जा रही है। विपक्षी दलों ने कार्रवाई को ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ बताया, जबकि भाजपा ने इसे ‘कानून का राज’ करार दिया। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के प्रमुख मौलाना बरेलवी ने शांति की अपील की, कहा कि ‘प्रेम दिलों में होना चाहिए, सड़कों पर नहीं।’

यह घटना 2010 की बरेली दंगाओं की याद दिला रही है, जब तौकीर रजा की गिरफ्तारी के बाद 23 दिनों का कर्फ्यू लगा था। विशेषज्ञों का मानना है कि IMC का राजनीतिक प्रभाव कम हो सकता है, लेकिन क्षेत्रीय तनाव बढ़ सकता है। क्या यह कार्रवाई हिंसा रोकने में सफल होगी? प्रशासन की अगली चाल पर नजरें टिकी हैं।

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