केरल विधानसभा ने सर्वसम्मति से वोटर लिस्ट SIR के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया
केरल विधानसभा ने सर्वसम्मति से वोटर लिस्ट SIR के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया
केरल विधानसभा ने आज एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए चुनाव आयोग के विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) के खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया। सत्ताधारी वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) और विपक्षी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने एकजुट होकर इस प्रस्ताव को मंजूरी दी, जो SIR को ‘बहिष्कार की राजनीति’ का माध्यम बताता है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन द्वारा पेश इस प्रस्ताव में चुनाव आयोग से SIR को स्थगित करने की मांग की गई है, ताकि लाखों पात्र वोटरों का मताधिकार न छीना जाए।
प्रस्ताव में कहा गया है कि SIR को 2002 की वोटर लिस्ट को आधार बनाकर किया जाना ‘अवैज्ञानिक’ है, जो संविधान द्वारा गारंटीकृत वयस्क मताधिकार का उल्लंघन है। इसमें बिहार SIR का उदाहरण देते हुए चेतावनी दी गई कि दस्तावेज न पेश करने पर लोगों को वोटर लिस्ट से हटाना ‘बहिष्कार की राजनीति’ को बढ़ावा देगा। प्रस्ताव के अनुसार, 1987 के बाद जन्मे लोगों को एक माता-पिता का नागरिकता प्रमाण, जबकि 2003 के बाद जन्मे को दोनों माता-पिता के दस्तावेज दिखाने पड़ेंगे, जो गरीब, अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) और महिलाओं को सबसे ज्यादा प्रभावित करेगा।
यह प्रस्ताव केरल में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों (दिसंबर 2025 से पहले) और 2026 विधानसभा चुनावों के ठीक पहले आया है। विधानसभा ने SIR को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) लागू करने का ‘पीछे का दरवाजा’ करार दिया, जो संदेहास्पद है क्योंकि बिहार SIR की संवैधानिक वैधता पर सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित है। तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे अन्य राज्यों में भी SIR को जल्दबाजी में लागू करने की कोशिश को ‘संदिग्ध’ बताया गया। विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशेन ने कहा, “ECI का यह कदम लाखों वोटरों को मताधिकार से वंचित कर देगा, जो असहनीय है।”
प्रस्ताव में मामूली संशोधन भी किए गए, जिसमें SC/ST समुदायों का स्पष्ट उल्लेख जोड़ा गया। LDF और UDF ने संयुक्त रूप से ECI को पत्र लिखकर SIR को स्थगित करने और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने की मांग की। मुख्यमंत्री विजयन ने कहा, “यह प्रस्ताव केरल की लोकतांत्रिक भावना की रक्षा का प्रतीक है।” भाजपा, जो विधानसभा में नहीं है, ने SIR का समर्थन किया है, लेकिन यह प्रस्ताव राज्य स्तर पर पहला ऐसा कदम है जो ECI के फैसले को चुनौती देता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रस्ताव राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ सकता है, खासकर जब ECI पैन-इंडिया SIR पर विचार कर रहा है। क्या सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप SIR को रोकेगा? आने वाले दिनों में ECI की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
