राजनीति

संसद की स्थायी समितियों का कार्यकाल बढ़ाने की तैयारी में मोदी सरकार, शशि थरूर का रुतबा रहेगा बरकरार

संसद की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव आने वाला है। मोदी सरकार संसदीय स्थायी समितियों (Standing Committees) के कार्यकाल को एक साल से बढ़ाकर दो साल करने की तैयारी में है। यह कदम न सिर्फ विधायी प्रक्रिया को मजबूत करेगा, बल्कि कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर के लिए भी राहत की सांस लाएगा। थरूर वर्तमान में विदेश मामलों की प्रतिष्ठित स्थायी समिति के अध्यक्ष हैं, और इस बदलाव से वे दो साल और इस महत्वपूर्ण पद पर बने रह सकेंगे।

प्रस्तावित बदलाव: निरंतरता बढ़ेगी, जांच प्रक्रिया मजबूत होगी

संसदीय समितियों का वर्तमान कार्यकाल हर साल सितंबर के आखिर में समाप्त हो जाता है, जिसके बाद पुनर्गठन होता है। इससे कई महत्वपूर्ण बिलों और रिपोर्टों की गहन जांच अधूरी रह जाती है। लोकसभा सचिवालय के अधिकारियों के मुताबिक, सरकार इस प्रथा को बदलने पर विचार कर रही है, ताकि समितियों में निरंतरता बनी रहे। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बीच चर्चा के बाद यह प्रस्ताव संसदीय कार्य समिति (Business Advisory Committee) में रखा जा सकता है।

इस बदलाव का फायदा न सिर्फ थरूर को मिलेगा, बल्कि अन्य समिति अध्यक्षों को भी। थरूर, जो तिरुवनंतपुरम से चार बार के सांसद हैं, विदेश मामलों की समिति के प्रमुख के रूप में भारत की वैश्विक नीतियों पर महत्वपूर्ण सिफारिशें दे चुके हैं। हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम अटैक जैसे मुद्दों पर उनकी भूमिका चर्चा में रही।

राजनीतिक महत्व: थरूर-कांग्रेस तनाव के बीच राहत

यह कदम राजनीतिक रूप से भी अहम है। शशि थरूर की अपनी पार्टी कांग्रेस के साथ मतभेद लंबे समय से चल रहे हैं। फरवरी 2025 में उन्होंने कहा था कि अगर पार्टी को उनकी जरूरत नहीं तो “विकल्प खुले हैं”। मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के तहत विदेशी दौरों पर जाने वाले प्रतिनिधिमंडल में उन्हें शामिल करने पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई थी। मार्च में पीएम मोदी की विदेश नीति की तारीफ करने पर भी विवाद हुआ। ऐसे में यह पद विस्तार थरूर को संसदीय मंच पर मजबूत रखेगा, बिना पार्टी से अलग हुए।

X (पूर्व ट्विटर) पर यूजर्स इसे ‘स्मार्ट मूव’ बता रहे हैं। एक पोस्ट में लिखा गया, “थरूर का रुतबा बरकरार, मोदी सरकार का मास्टरस्ट्रोक! कांग्रेस में खलबली मच गई।”

थरूर का संसदीय सफर और विवाद

शशि थरूर पूर्व राजनयिक हैं, जिन्होंने 2009 से केरल के तिरुवनंतपुरम का प्रतिनिधित्व किया है। वे यूएन महासचिव पद के लिए भी दावेदार रहे। लेकिन कांग्रेस में उनकी ‘सॉफ्ट’ छवि और बीजेपी के प्रति नरमी ने विवाद खड़े किए। हाल ही में उन्होंने लेफ्ट पार्टी की आलोचना की, जिसे कांग्रेस ने अलग तरह से लिया। फिर भी, उनकी वैश्विक साख बरकरार है, और यह कदम उन्हें संसद में प्रभावशाली बनाए रखेगा।

आगे की राह: संसदीय सुधारों का दौर

यह बदलाव संसदीय प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाएगा। अगर मंजूर हुआ, तो अगले सत्र में लागू हो सकता है। क्या यह विपक्ष को मजबूत करेगा या राजनीतिक संतुलन का हिस्सा बनेगा? थरूर ने खुद कहा है, “संसदीय समितियां लोकतंत्र की रीढ़ हैं।” यह कदम लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।

(रिपोर्ट: unnatbharatlive.com न्यूज डेस्क | स्रोत: विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स)

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