भारतीय शेयर बाजार में ट्रंप की दहशत: सेंसेक्स 800 अंक लुढ़का, निफ्टी 24700 से नीचे
भारतीय शेयर बाजार में ट्रंप की दहशत: सेंसेक्स 800 अंक लुढ़का, निफ्टी 24700 से नीचे
भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को भारी उथल-पुथल देखने को मिली, जब बीएसई सेंसेक्स 800 अंक से ज्यादा गिरकर 80,359.93 पर बंद हुआ, और एनएसई निफ्टी 250 अंक टूटकर 24,643.45 के स्तर पर फिसल गया। इस गिरावट का मुख्य कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया नीतियां रहीं, जिनमें H-1B वीजा नियमों में सख्ती और भारतीय फार्मा सेक्टर पर 100% टैरिफ की घोषणा शामिल है। यह लगातार पांचवां दिन है जब बाजार में गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों में चिंता बढ़ गई है।
गिरावट के प्रमुख कारण:
1. ट्रंप का टैरिफ बम:
– ट्रंप ने 1 अक्टूबर 2025 से ब्रांडेड और पेटेंटेड दवाओं पर 100% टैरिफ लगाने की घोषणा की, जिसने भारतीय फार्मा कंपनियों को निशाना बनाया। इसके अलावा, किचन कैबिनेट्स पर 50%, गद्देदार फर्नीचर पर 30%, और भारी ट्रकों पर 25% शुल्क भी लगाया गया है।
– प्रभाव: निफ्टी फार्मा इंडेक्स 2.7% गिरकर 21,390.25 पर पहुंचा। सन फार्मा (3% नीचे), डॉ. रेड्डी (2% नीचे), सिप्ला (2% नीचे), और ल्यूपिन (3% नीचे) जैसे शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई।
2. H-1B वीजा का दबाव:
– H-1B वीजा फीस में बढ़ोतरी की आशंका से भारतीय आईटी कंपनियां दबाव में हैं। गुरुवार को टीसीएस के शेयर 2900 और इंफोसिस 1450 से नीचे फिसल गए। एक्सेंचर के कमजोर तिमाही नतीजों ने भी मूड बिगाड़ा। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 1.3% की गिरावट आई।
3. विदेशी निवेशकों की बिकवाली:
– विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 25 सितंबर को 4,995 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। सितंबर 2025 में अब तक 24,454 करोड़ रुपये की निकासी हो चुकी है, जिसने बाजार पर दबाव बढ़ाया।
– कुल मार्केट कैप में 3 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
4. वैश्विक बाजारों का असर:
– एशियाई बाजारों में भी गिरावट देखी गई—जापान का निक्केई 0.9%, हांगकांग का हैंग सेंग 1.4%, और चीन का शंघाई कंपोजिट 0.7% नीचे रहा। अमेरिका में नैस्डैक और S&P 500 में 0.5% की गिरावट ने वैश्विक माहौल को कमजोर किया।
कुछ सकारात्मक रुझान:
– मुनाफे में रहे शेयर: लार्सन एंड टुब्रो (L&T), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL), और टाटा स्टील जैसे शेयर हरे निशान में रहे। निफ्टी मेटल और निफ्टी मीडिया में क्रमशः 0.28% और 0.62% की बढ़त देखी गई।
– संभावित रिकवरी: कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता से राहत मिल सकती है। X पर पोस्ट्स में दावा किया गया कि भारत का निर्यात अगस्त में 8% बढ़ा, जो बाजार की मजबूती दर्शाता है।
निवेशकों की चिंता और भविष्य:
– चिंता: फार्मा और आईटी सेक्टर की कमजोरी, FIIs की बिकवाली, और वैश्विक अनिश्चितता ने निवेशकों का मनोबल तोड़ा। X पर @pranjalkamra ने लिखा, “निफ्टी पिछले साल सितंबर से 12% नीचे है, जबकि वैश्विक बाजार चढ़े हैं।”
– उम्मीद: कुछ विश्लेषकों का कहना है कि भारत-अमेरिका के बीच 2025 के अंत तक व्यापार समझौता हो सकता है, जो टैरिफ के असर को कम कर सकता है।
निवेशकों को सलाह है कि अस्थिरता के इस दौर में सतर्क रहें और फंडामेंटल्स मजबूत कंपनियों पर फोकस करें। अधिक अपडेट्स के लिए BSE, NSE या विश्वसनीय वित्तीय न्यूज पोर्टल्स चेक करें।
