उत्तराखंड

नकल विरोधी कानून के बाद भी पेपर लीक: उत्तराखंड UKSSSC घोटाले में सरकार की नाकामी या सिस्टम की कमजोरी?

नकल विरोधी कानून के बाद भी पेपर लीक: उत्तराखंड UKSSSC घोटाले में सरकार की नाकामी या सिस्टम की कमजोरी?

उत्तराखंड में युवाओं का भविष्य दांव पर लटका है। राज्य अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की ग्रेजुएट लेवल भर्ती परीक्षा (21 सितंबर) में पेपर लीक का मामला सामने आते ही हंगामा मच गया। परीक्षा शुरू होने के महज 35 मिनट बाद प्रश्नपत्र के तीन पेजों के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। यह घटना 2023 के सख्त ‘नकल विरोधी कानून’ के बाद हुई, जिसके तहत लीक करने वालों को आजीवन कारावास और 10 करोड़ तक जुर्माना हो सकता है। फिर भी, यह लीक कैसे हुआ? क्या यह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार की नाकामी है, या सिस्टम की जड़ें गहरी कमजोरियां दर्शाती हैं? आइए, घटना की परतें खोलते हैं।

कानून की सख्ती: कागजों पर मजबूत, अमल में ढीला?

उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों के नियंत्रण और रोकथाम के उपाय) अध्यादेश, 2023 (फरवरी 2023 में लागू) देश का सबसे कठोर कानून माना जाता है। इसमें परीक्षा से प्रिंटिंग से रिजल्ट तक अनुचित साधनों पर रोक लगाई गई है। परीक्षार्थी को 3 साल की सजा और 5 लाख जुर्माना, जबकि लीक फैलाने वालों को 10 साल से आजीवन कारावास। संपत्ति जब्ती और 10 साल की ब्लैकलिस्टिंग भी प्रावधान हैं। केंद्र सरकार का ‘परीक्षा में अनियमितता निवारण विधेयक 2024’ भी इसी दिशा में है, जिसमें 3-10 साल की सजा है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि कानून कागजों पर हैं, अमल में कमी। गुजरात-यूपी जैसे राज्यों में भी ऐसे कानून होने पर लीक रुके नहीं। उत्तराखंड में 2021 और 2022 के लीक (916 चयन रद्द) के बाद यह कानून आया, लेकिन 2025 में फिर वही कहानी। युवा संगठनों ने इसे ‘सरकारी नौटंकी’ बताया, क्योंकि जामर, CCTV और बायोमेट्रिक चेकिंग के बावजूद लीक हो गया।

लीक का रहस्य: कैसे तोड़ी गई सुरक्षा?

परीक्षा हरिद्वार के आदर्श बाल साधन इंटर कॉलेज (बहादुरपुर जाट) में सुबह 11 बजे शुरू हुई। केंद्र में मोबाइल जामर लगे थे, फोन प्रतिबंधित थे। फिर भी, मुख्य आरोपी खालिद मलिक (परीक्षा देने आया उम्मीदवार) ने चोरी-छिपे फोन निकालकर प्रश्नपत्र के तीन पेजों की फोटो खींच ली। 11:35 बजे तक ये इमेज व्हाट्सएप पर वायरल हो चुकीं। खालिद ने फोटो अपनी बहन साबिया को भेजी, जिन्होंने एक प्रोफेसर को शेयर की—उत्तर खरीदने की कोशिश में। प्रोफेसर ने इनकार किया, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका।

हरिद्वार एसएसपी ने बताया, “यह किसी संगठित गिरोह का काम नहीं, बल्कि केंद्र स्टाफ की लापरवाही। जामर के बावजूद फोन काम कर गया।” साबिया को हिरासत में लिया गया। कॉलेज प्रिंसिपल (बीजेपी हरिद्वार मीडिया कोऑर्डिनेटर) केंद्र प्रशासक थे; उनसे पूछताछ हो रही है। UKSSSC चेयरमैन गणेश सिंह मार्टोलिया ने कहा, “यह ‘लीक’ नहीं, ‘विशेष व्यक्ति की मदद’ का प्रयास। परीक्षा रद्द नहीं होगी, आरोपी का रिजल्ट रोका जाएगा।” लेकिन 1.60 लाख उम्मीदवारों का भविष्य अधर में लटक गया।

सरकार की नाकामी या सिस्टम की बीमारी?

20 सितंबर को ही STF ने हाकम सिंह (2021 लीक मास्टरमाइंड) और पंकज गौर को गिरफ्तार किया, जो 12-15 लाख में पेपर बेच रहे थे। फिर भी, लीक रुका नहीं। DGP दीपम सेठ ने तीन टीमें (देहरादून, हरिद्वार, STF) गठित कीं, लेकिन देर हो चुकी। देहरादून के परेड ग्राउंड पर बेरोजगार संघ ने भारी प्रदर्शन किया; धारा 163 लगानी पड़ी। पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा, “दोषी बख्शे नहीं जाएंगे, लेकिन सरकार की तैयारी फेल साबित हुई।” युवा नेता सजेंद्र कठैत बोले, “कानून हैं, लेकिन जामर फेल, स्टाफ भ्रष्ट। बेरोजगारी 44% पर है, लीक से सपने टूट रहे।”

विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी कमजोरी (जामर 100% प्रभावी नहीं) और स्टाफ ट्रेनिंग की कमी मुख्य हैं। AI निगरानी और त्वरित जांच जरूरी। CM धामी ने ‘चीटिंग माफिया’ पर जीरो टॉलरेंस का दावा किया, लेकिन बार-बार लीक सरकार की नाकामी उजागर कर रहे। 2022 के लीक में 35 गिरफ्तारियां हुईं, फिर भी दोहराव। नवरात्रि के बीच यह घोटाला युवाओं के गुस्से को भड़का रहा। क्या अब सख्त अमल होगा, या फिर वादों की किताब में एक और अध्याय जुड़ जाएगा?

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