ट्रंप का UNGA संबोधन: ‘7 महीनों में 7 युद्ध रोके, UN ने कोई मदद नहीं की’, भारत-पाक दावे पर भारत का इनकार
ट्रंप का UNGA संबोधन: ‘7 महीनों में 7 युद्ध रोके, UN ने कोई मदद नहीं की’, भारत-पाक दावे पर भारत का इनकार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 80वें सत्र में अपना पहला संबोधन दिया, जो उनके दूसरे कार्यकाल का पहला UN मंच पर भाषण था। अपने संबोधन में ट्रंप ने वैश्विक शांति के दावों के साथ UN की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि सिर्फ 7 महीनों में उन्होंने 7 “असमाप्तीय” युद्धों को खत्म किया, लेकिन UN ने इनमें कोई मदद नहीं की। ट्रंप ने दावा किया, “संयुक्त राष्ट्र अपनी क्षमता के अनुरूप काम करने के करीब भी नहीं पहुंच रहा है।” यह बयान UNGA में दुनिया के नेताओं के बीच विवादास्पद रहा।
‘मैंने रुकवाया युद्ध’—ट्रंप का दावा: ट्रंप ने कहा, “सिर्फ 7 महीनों में, मैंने 7 ऐसे युद्धों का अंत किया जिनकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। ये अकल्पनीय हैं, और कुछ तो 31 साल से चल रहे थे। एक 36 साल का था, एक 28 साल का।” उन्होंने इन युद्धों की लिस्ट गिनाई: कंबोडिया-थाईलैंड, कोसोवो-सर्बिया, कांगो-रवांडा (एक क्रूर और हिंसक युद्ध), पाकिस्तान-भारत, इजरायल-ईरान, मिस्र-इथियोपिया, और आर्मेनिया-अजरबैजान। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ये सभी भयंकर थे, जिसमें हजारों लोग मारे गए, और इन्हें रुकवाने में UN की “खाली बातें” बेकार साबित हुईं। उन्होंने दावा किया कि इनमें से कई को व्यापारिक दबाव से सुलझाया, जैसे भारत-पाकिस्तान में जहां उन्होंने कहा, “अगर लड़ाई करोगे तो व्यापार नहीं होगा।”
भारत-पाक युद्ध पर ट्रंप का दोहरा दावा: ट्रंप ने विशेष रूप से भारत-पाकिस्तान संघर्ष का जिक्र किया, जो मई 2025 में चरम पर था। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन की मध्यस्थता में “रात भर लंबी” बातचीत के बाद दोनों देश पूर्ण युद्धविराम पर सहमत हुए। यह दावा उन्होंने 10 मई को सोशल मीडिया पर पहली बार किया था, और तब से करीब 50 बार दोहराया। ट्रंप ने UNGA में इसे “अकल्पनीय” बताते हुए कहा कि भारत-पाकिस्तान परमाणु हथियारों से लैस थे, और युद्ध को रोकना उनके नेतृत्व की मिसाल है। पाकिस्तान ने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने की घोषणा की, लेकिन भारत ने हमेशा इनकार किया।
भारत ने हर बार खारिज किया दावा: भारत ने ट्रंप के दावों को सिरे से नकारा है। 7 मई 2025 को भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान और PoK में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। यह 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले (26 नागरिक मारे गए) का जवाब था। चार दिनों के ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद 10 मई को युद्धविराम हुआ। भारत का कहना है कि यह DGMO स्तर पर सीधी बातचीत से तय हुआ, न कि किसी तीसरे पक्ष से। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में कहा, “किसी देश के नेता ने ऑपरेशन सिंदूर रोकने के लिए भारत से नहीं कहा।” विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया, “युद्धविराम में कोई तीसरा पक्ष शामिल नहीं था।” भारत ने अमेरिकी भूमिका को “सहायक” माना, लेकिन मध्यस्थता से इनकार किया।
ट्रंप का UN पर तंज: ट्रंप ने UN को “अक्षम” बताते हुए कहा कि वैश्विक शांति में उसकी भूमिका नगण्य है। उन्होंने कहा, “हम शांति समझौते कर रहे हैं और युद्ध रोक रहे हैं, लेकिन UN की खाली बातें बेकार हैं।” यह बयान उनके पहले कार्यकाल के UN भाषणों की याद दिलाता है, जहां उन्होंने संगठन को “दुश्मन” कहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह दावा 2026 चुनावों से पहले उनकी “पीस ब्रोकर” छवि मजबूत करने का प्रयास है। आलोचकों ने इसे “अतिरंजित” बताया, क्योंकि कई संघर्ष (जैसे कांगो-रवांडा) अभी भी जारी हैं। UNGA सत्र के बीच यह संबोधन वैश्विक कूटनीति में नया विवाद पैदा कर रहा है।
