चुनाव आयोग की सख्ती: 474 निष्क्रिय दलों का पंजीकरण रद्द, सूची से हटाए गए
चुनाव आयोग ऑफ इंडिया (ECI) ने गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों पर सख्ती दिखाते हुए शुक्रवार को 474 और दलों का पंजीकरण समाप्त कर दिया। ये दल लंबे समय से निष्क्रिय थे और चुनावों में भाग नहीं ले रहे थे, जिसके कारण आयोग ने उन्हें ‘लापता’ मानते हुए सूची से हटा दिया। इस कार्रवाई के साथ ही पिछले दो महीनों में कुल 808 दलों पर शिकंजा कसा जा चुका है। आयोग ने 9 अगस्त को 334 दलों की मान्यता खत्म की थी, जबकि जून में 345 संदिग्ध दलों का सत्यापन शुरू किया गया था। यह कदम राजनीतिक दलों के पंजीकरण को पारदर्शी बनाने और फर्जी संगठनों पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
ECI के मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने एक बयान में कहा, “ये दल वर्षों से चुनावी प्रक्रिया से दूर थे। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत पंजीकरण के लिए सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। निष्क्रिय दलों को सूची से हटाना लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है।” आयोग ने इन दलों को शो-कॉज नोटिस जारी किए थे और व्यक्तिगत सुनवाई का मौका दिया था, लेकिन अधिकांश ने जवाब नहीं दिया। परिणामस्वरूप, इनका पंजीकरण रद्द हो गया। अब ये दल चुनाव चिन्ह का उपयोग नहीं कर सकेंगे और आयकर अधिनियम, 1961 के तहत मिलने वाली छूट से भी वंचित रहेंगे।
इस कार्रवाई से देश में पंजीकृत दलों की संख्या में कमी आई है। मार्च 2024 तक 2,763 गैर-मान्यता प्राप्त दलों के साथ कुल 2,827 दल थे, लेकिन अब यह आंकड़ा काफी घट गया है। जम्मू-कश्मीर में भी 12 दलों को डी-रजिस्टर किया गया, जिनमें बैकवर्ड क्लासेस डेमोक्रेटिक पार्टी, डुग्गर प्रदेश पार्टी और जम्मू एंड कश्मीर पीपुल्स पार्टी (सेकुलर) शामिल हैं। ये दल छह वर्षों से कोई चुनाव नहीं लड़े थे। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि कोई दल 10 वर्षों तक चुनाव न लड़े, तो स्वतः डी-रजिस्ट्रेशन का प्रावधान है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम ‘मनी पॉलिटिक्स’ और फर्जी दलों को रोकने में सहायक होगा। कई दल केवल टैक्स छूट के लिए पंजीकृत होते थे, लेकिन अब सक्रियता साबित करनी पड़ेगी। विपक्षी दलों ने इसका स्वागत किया, लेकिन कुछ ने चेतावनी दी कि छोटे क्षेत्रीय दलों पर असर न पड़े। ECI ने सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे नियमित सत्यापन करें। यह अभियान आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा।
