हिंडनबर्ग मामले में SEBI ने अडानी ग्रुप को दी क्लीन चिट: गौतम अडानी ने निवेशकों के दर्द को महसूस किया, बयान जारी
हिंडनबर्ग मामले में SEBI ने अडानी ग्रुप को दी क्लीन चिट: गौतम अडानी ने निवेशकों के दर्द को महसूस किया, बयान जारी
अमेरिकी शॉर्ट-सेलर फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च के 2023 के विवादास्पद रिपोर्ट के बाद शुरू हुई लंबी जांच में सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने अडानी ग्रुप को क्लीन चिट दे दी है। एसईबीआई के व्होल-टाइम मेंबर कमलेश सी. वर्शनी ने दो अलग-अलग आदेश जारी करते हुए कहा कि हिंडनबर्ग के आरोपों – जैसे स्टॉक मैनिपुलेशन, फंड रूटिंग और रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन के उल्लंघन – की पुष्टि नहीं हुई है। कोई सबूत न मिलने के कारण अडानी ग्रुप या उसके अधिकारियों पर कोई दंड या दायित्व नहीं लगाया जाएगा। यह फैसला अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी के लिए बड़ी राहत है, जिन्होंने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर निवेशकों के नुकसान पर दुख व्यक्त किया।
एसईबीआई की जांच में पाया गया कि अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पोर्ट्स और अडानी पावर जैसी कंपनियों के बीच ट्रांजेक्शन वैध व्यवसायिक गतिविधियां थीं। हिंडनबर्ग ने आरोप लगाया था कि अडिकॉर्प एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड, माइलस्टोन ट्रेडलिंक्स प्राइवेट लिमिटेड और रेहवार इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियां फंड्स को लिस्टेड कंपनियों में रूट करने के लिए इस्तेमाल की गईं। लेकिन एसईबीआई ने स्पष्ट किया कि ये कंपनियां रिलेटेड पार्टी की परिभाषा में नहीं आतीं, और लोन चुकाए गए थे जिसमें ब्याज भी शामिल था। कोई फंड सिफॉनिंग या फ्रॉड नहीं हुआ। जांच में इनसाइडर ट्रेडिंग, मार्केट मैनिपुलेशन और पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियमों के उल्लंघन के आरोपों को खारिज कर दिया गया। एसईबीआई ने कहा, “शो-कॉज नोटिस में लगाए गए आरोप साबित नहीं हुए।”
यह क्लीन चिट 2023 जनवरी की हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद शुरू हुई जांच का अंतिम अध्याय है, जिसने अडानी ग्रुप के शेयरों में भारी गिरावट ला दी थी। रिपोर्ट के बाद ग्रुप की मार्केट वैल्यू में 150 बिलियन डॉलर से अधिक की कमी आई थी। सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2024 में एसईबीआई की जांच को समर्थन दिया था, लेकिन अब एसईबीआई का यह आदेश पूर्ण राहत प्रदान करता है। अडानी ग्रुप ने हमेशा इन आरोपों को ‘झूठा और प्रेरित’ बताया था।
गौतम अडानी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर बयान जारी करते हुए कहा, “लंबी जांच के बाद एसईबीआई ने हमारी स्थिति की पुष्टि की है कि हिंडनबर्ग के दावे आधारहीन थे। पारदर्शिता और अखंडता हमेशा अडानी ग्रुप की पहचान रही है। हम उन निवेशकों के दर्द को गहराई से महसूस करते हैं जिन्होंने इस धोखाधड़ी भरी और प्रेरित रिपोर्ट के कारण पैसे गंवाए। जो लोग झूठी कहानियां फैलाते रहे, उनसे हम माफी की मांग करते हैं। सत्य की जीत हुई है।” अडानी का यह बयान वायरल हो गया, और ग्रुप के शेयरों में तत्काल उछाल देखा गया।
विपक्ष ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस के जयराम रमेश ने कहा, “हिंडनबर्ग का बंद होना या एसईबीआई का फैसला अडानी को क्लीन चिट नहीं देता। यह संस्थागत कब्जे का मामला है, जहां एसईबीआई की चेयरपर्सन पर भी सवाल हैं।” भाजपा ने इसे न्यायिक प्रक्रिया की जीत बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्लीन चिट अडानी ग्रुप की वित्तीय स्थिरता को मजबूत करेगी, खासकर इंफ्रास्ट्रक्चर और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स में निवेश के लिए। ग्रुप ने कहा कि वे आगे भी पारदर्शिता बनाए रखेंगे।
यह मामला भारतीय कॉर्पोरेट जगत के लिए मील का पत्थर साबित होगा, जो विदेशी रिपोर्ट्स के प्रभाव को कमजोर करता है। निवेशकों को अब ग्रुप पर भरोसा बढ़ेगा, लेकिन विपक्षी दलों ने आगे जांच की मांग की है। कुल मिलाकर, यह फैसला अडानी ग्रुप के लिए नई शुरुआत का संकेत देता है।
