देहरादून में बादल फटने के बाद भयानक तबाही
देहरादून में तबाही… सहस्त्रधारा, मालदेवता, टपकेश्वर, फन वैली में मची तबाही
देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में सोमवार रात (15 सितंबर 2025) से मंगलवार सुबह तक हुई भारी बारिश ने पूरे इलाके को तहस-नहस कर दिया। बादल फटने जैसी स्थिति बन गई, जिससे सहस्त्रधारा, मालदेवता, टपकेश्वर महादेव मंदिर और फन वैली क्षेत्र में भयानक बाढ़ आ गई। नदियां उफान पर हैं, सड़कें धंस गईं, पुल बह गए और कई जगह भूस्खलन हो गया। दो लोग लापता हैं, जबकि पांच लोग तेज बहाव में बह गए। राज्य सरकार ने रेड अलर्ट जारी किया है और स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया और राहत कार्यों की निगरानी की।
सहस्त्रधारा क्षेत्र में सबसे ज्यादा तबाही मची है। यहां 192 मिमी बारिश दर्ज की गई, जिससे झरने और नाले उफान पर आ गए। दो लोग बहाव में लापता बताए जा रहे हैं। होटल, दुकानें और व्यावसायिक भवन क्षतिग्रस्त हो गए। ग्रामीणों ने बताया कि रात में अचानक पानी का स्तर बढ़ गया, जिससे घरों में पानी घुस गया। एसडीआरएफ (राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल) ने सैकड़ों लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। मालदेवता में एप्रोच ब्रिज पूरी तरह बह गया, जिससे इलाके का संपर्क कट गया। यहां 141.5 मिमी बारिश हुई और 100 मीटर लंबी सड़क बह गई। फन वैली और उत्तराखंड डेंटल कॉलेज के पास देहरादून-हरिद्वार नेशनल हाईवे पर पुल क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे ट्रैफिक ठप हो गया। टपकेश्वर महादेव मंदिर में तमसा नदी का जलस्तर खतरे के निशान पर पहुंच गया। मंदिर का पूरा परिसर जलमग्न हो गया, हनुमान मूर्ति तक पानी भर गया और मंदिर को मलबे से नुकसान पहुंचा। मंदिर के पुजारी आचार्य बिपिन जोशी ने कहा, “सुबह 5 बजे से नदी तेज बहने लगी, पूरा परिसर डूब गया। ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी।”
मुख्यमंत्री धामी ने मालदेवता और केसरवाला क्षेत्र का जायजा लिया। उन्होंने कहा, “रात भर की भारी बारिश से नदियां उफान पर हैं। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और जिला प्रशासन राहत कार्य में जुटे हैं।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने भी फोन पर स्थिति की जानकारी ली और हर संभव मदद का आश्वासन दिया। पीएम ने 1200 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की। एनडीआरएफ के जवान एक व्यक्ति को बिजली के खंभे से बचाते नजर आए। 584 लोग फंस गए, जिनमें से ज्यादातर को बचा लिया गया। टोंस, सोंग और तमसा जैसी नदियां खतरनाक स्तर पर हैं, इसलिए नदी किनारे रहने वालों को सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है।
यह आपदा जलवायु परिवर्तन की चपेट में उत्तराखंड की कमजोरी को उजागर करती है। अगस्त में उत्तरकाशी में भी बादल फटने से भारी नुकसान हुआ था। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार हो रही भारी बारिश से ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि घर से बाहर न निकलें और हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें। राहत शिविर लगाए गए हैं और प्रभावितों को भोजन व दवाइयां बांटी जा रही हैं। देहरादून में छावनी जैसा माहौल है, लेकिन प्रशासन पूरे प्रयास कर रहा है।
