राष्ट्रीय

मानसरोवर यात्रा पर गए अयोध्या के 8 श्रद्धालु नेपाल बॉर्डर पर फंसे, सांसद ने PM को लिखा पत्र

मानसरोवर यात्रा पर गए अयोध्या के 8 श्रद्धालु नेपाल बॉर्डर पर फंसे, सांसद ने PM को लिखा पत्र

अयोध्या: नेपाल में चल रहे Gen-Z आंदोलन के कारण काठमांडू में भारी हिंसा और अस्थिरता के बीच मानसरोवर यात्रा पर गए अयोध्या के कम से कम 8-9 श्रद्धालु फंस गए हैं। ये श्रद्धालु कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरा कर चीन से नेपाल के रास्ते भारत लौट रहे थे, लेकिन प्रदर्शनों के चलते नेपाल-भारत सीमा पर यातायात ठप होने से वे बॉर्डर के पास ही अटक गए हैं। समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने इस मामले को गंभीर बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है, जिसमें तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है। अयोध्या जिला प्रशासन ने भी केंद्र सरकार से फ्लाइट्स के इंतजाम की अपील की है, क्योंकि सड़क मार्ग से यात्रा खतरनाक हो चुकी है।

अयोध्या के जिलाधिकारी निखिल तिकराम फुंडे ने 11 सितंबर 2025 को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि ये श्रद्धालु निजी टूर ऑपरेटर्स के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे। यात्रा पूरी कर वे तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र से नेपाल होते हुए भारत लौट रहे थे, लेकिन नेपाल में भ्रष्टाचार, नेपोटिज्म और सोशल मीडिया बैन के खिलाफ युवाओं के प्रदर्शनों ने स्थिति बिगाड़ दी। काठमांडू में हिंसा में 34 से अधिक मौतें हो चुकी हैं, और सीमा क्षेत्रों में कर्फ्यू तथा सेना तैनाती के कारण यात्रा प्रभावित हुई है। डीएम फुंडे ने कहा, “श्रद्धालु सुरक्षित हैं, लेकिन बॉर्डर से दूर हैं। सड़क मार्ग असुरक्षित है, इसलिए केंद्र से फ्लाइट्स का इंतजाम करवाने का अनुरोध किया गया है। कुछ व्यापारियों ने मुझे सूचना दी, और हम हर संभव मदद कर रहे हैं।”

समाजवादी पार्टी के फैजाबाद से सांसद अवधेश प्रसाद ने पत्र में कहा कि नेपाल की अस्थिरता भारत के हित में नहीं है, और यह घटना दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने बताया कि 8-10 श्रद्धालु अयोध्या के हैं, जिनके परिवार चिंतित हैं। सांसद ने कहा, “मैं परिवारों को आश्वासन देता हूं कि हम हर प्रयास कर रहे हैं, और 2-3 दिनों में उन्हें वापस लाने का इंतजाम करेंगे।” प्रसाद ने प्रधानमंत्री से भारतीय दूतावास के माध्यम से तत्काल सहायता और विशेष उड़ानों की व्यवस्था की मांग की है। उन्होंने नेपाल की स्थिति को “देश के हित के विरुद्ध” बताते हुए कहा कि यह अच्छा संदेश नहीं दे रही।

भारतीय दूतावास, बीजिंग ने 10 सितंबर को एक सलाह जारी की, जिसमें नेपाल के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा करने वाले भारतीयों को सतर्क रहने को कहा गया। दूतावास ने कहा, “नेपाल की स्थिति ने यात्रा योजनाओं को प्रभावित किया है। तिब्बत में फंसे भारतीय सतर्क रहें और स्थानीय अधिकारियों तथा भारतीय दूतावासों के निर्देशों का पालन करें।” हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं। 11 सितंबर को दूतावास ने अपडेट देते हुए कहा कि बॉर्डर क्रॉसिंग अब चालू हो गए हैं, और श्रद्धालु सुरक्षित रूप से नेपाल के रास्ते भारत लौट सकते हैं। चीन के विदेश मंत्रालय और तिब्बत स्थानीय अधिकारियों का आभार जताया गया। हालांकि, कई भारतीय पर्यटक अभी भी काठमांडू के होटलों में फंसे हैं, जिनमें बेंगलुरु और चेन्नई के लोग शामिल हैं।

अयोध्या में श्रद्धालुओं के परिवारों ने जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव किया और सहायता की मांग की। एक परिवार के सदस्य ने कहा, “हमारे परिजन 10 दिनों से फंसे हैं, कोई संपर्क नहीं हो पा रहा। सरकार तुरंत कुछ करे।” विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल का यह संकट भारत-नेपाल संबंधों को प्रभावित कर सकता है, खासकर जब सीमा पर व्यापार भी ठप है। कैलाश मानसरोवर यात्रा, जो हिंदू, बौद्ध और जैन धर्मावलंबियों के लिए पवित्र है, कोविड के बाद 2025 में फिर शुरू हुई थी, लेकिन अब यह अस्थिरता से प्रभावित हो रही है। जिला प्रशासन और सांसद के प्रयासों से उम्मीद है कि श्रद्धालु जल्द सुरक्षित लौटेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *