धनखड़ ने तोड़ी लंबी खामोशी: इस्तीफे के बाद नए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन को दी बधाई
धनखड़ ने तोड़ी लंबी खामोशी: इस्तीफे के बाद नए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन को दी बधाई
नई दिल्ली: पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने लगभग दो महीने की चुप्पी तोड़ते हुए मंगलवार को अपना पहला सार्वजनिक बयान दिया। जुलाई में स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर पद से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने अब नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन को हार्दिक बधाई दी है। धनखड़ ने एक पत्र के माध्यम से कहा, “आदरणीय राधाकृष्णन जी, विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के उपराष्ट्रपति के रूप में आपकी जीत पर हार्दिक बधाई। इस गौरवशाली पद पर आपका आसीन होना हमारे राष्ट्र के प्रतिनिधियों के विश्वास और भरोसे को दर्शाता है।”
धनखड़ ने आगे कहा कि राधाकृष्णन के सार्वजनिक जीवन का व्यापक अनुभव उपराष्ट्रपति पद की शोभा और गौरव को और बढ़ाएगा। उन्होंने नए उपराष्ट्रपति के सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं देते हुए जोर दिया कि भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में यह पद देश की प्रगति और एकता के लिए महत्वपूर्ण है। यह बयान धनखड़ का इस्तीफे के बाद पहला आधिकारिक संदेश है, जो राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
बता दें कि 21 जुलाई को धनखड़ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंपा था, जिसके बाद उपराष्ट्रपति पद रिक्त हो गया। स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफे की घोषणा के समय संसद के मॉनसून सत्र के दौरान यह खबर अचानक आई थी, जिससे विपक्षी दलों में कई कयास लगे। कुछ ने राजनीतिक दबाव का हवाला दिया, तो कुछ ने स्वास्थ्य ही असली वजह बताया। लेकिन धनखड़ ने तब कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया।
उधर, मंगलवार को हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने शानदार जीत हासिल की। उन्हें प्रथम वरीयता के 452 वोट मिले, जबकि विपक्ष के बी. सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट ही प्राप्त हुए। राधाकृष्णन, जो महाराष्ट्र के राज्यपाल रह चुके हैं, 12 सितंबर को राष्ट्रपति मुर्मू द्वारा शपथ ग्रहण करेंगे। जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और अन्य नेताओं ने भी उन्हें बधाई दी। राधाकृष्णन ने कहा, “मैं देश के विकास के लिए समर्पित रहूंगा और लोकतंत्र में सत्तारूढ़ तथा विपक्ष के बीच संतुलन बनाए रखूंगा।”
धनखड़ का यह बयान न केवल उनके उत्तराधिकारी को सम्मान देने वाला है, बल्कि राजनीतिक अटकलों पर भी विराम लगाने वाला प्रतीत होता है। पूर्व उपराष्ट्रपति के रूप में उनका योगदान, खासकर राज्यसभा की कार्यवाही संचालन के दौरान, याद किया जाता रहेगा। अब सभी की नजरें नए उपराष्ट्रपति के शपथ ग्रहण और उनके एजेंडे पर हैं। यह घटना भारतीय लोकतंत्र की मजबूती को रेखांकित करती है।
