राजनीति

उपराष्ट्रपति चुनाव में क्रॉस वोटिंग का संदेह: सीपी राधाकृष्णन को 14 वोट ज्यादा, विपक्षी दलों पर उठे सवाल

उपराष्ट्रपति चुनाव में क्रॉस वोटिंग का संदेह: सीपी राधाकृष्णन को 14 वोट ज्यादा, विपक्षी दलों पर उठे सवाल

मंगलवार को हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने शानदार जीत हासिल की। उन्हें 452 वोट मिले, जबकि विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार जस्टिस (सेवानिवृत्त) बी. सुदर्शन रेड्डी को केवल 300 वोट प्राप्त हुए। कुल 767 सांसदों ने मतदान किया, जिसमें 15 वोट अमान्य घोषित किए गए और 14 सांसद अनुपस्थित रहे। यह जीत एनडीए की अपेक्षाओं से कहीं अधिक थी, जिससे क्रॉस वोटिंग के आरोपों ने जोर पकड़ लिया है।

चुनाव आयोग के अनुसार, कुल निर्वाचक मंडल में 781 सदस्य थे, जिसमें लोकसभा के 543 और राज्यसभा के 238 सदस्य शामिल थे। एनडीए के पास कागजों पर 427 वोट थे, और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के 11 सांसदों के समर्थन से यह संख्या 438 तक पहुंचनी थी। लेकिन राधाकृष्णन को 452 वोट मिलने से 14 अतिरिक्त वोटों का सवाल उठा। बीजेपी सांसद डॉ. भगवत कराड़ ने कहा, “इंडिया गठबंधन के 14 सांसदों ने क्रॉस वोटिंग की, जबकि 14 अन्य अमान्य वोट भी विपक्ष के ही थे।” केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी दावा किया कि कई विपक्षी सांसदों ने राष्ट्रीय विचारधारा के कारण एनडीए उम्मीदवार को वोट दिया।

विपक्षी दलों, खासकर आम आदमी पार्टी (आप) और अन्य इंडिया ब्लॉक सदस्यों पर क्रॉस वोटिंग के सवाल उठे हैं। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, आप के 12 सांसदों को छोड़कर इंडिया ब्लॉक के 315 सांसदों में से 15 वोटों की कमी क्रॉस वोटिंग का संकेत देती है। कुछ अमान्य वोट भी विपक्ष के हो सकते हैं, लेकिन अधिकांश विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्रॉस वोटिंग का नतीजा है। विपक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी एकजुटता बरकरार रही, लेकिन वोटों का अंतर उनकी गणना से कम होने पर आंतरिक समीक्षा की बात कही।

राधाकृष्णन, जो महाराष्ट्र के राज्यपाल रह चुके हैं, ने जीत के बाद कहा, “यह राष्ट्रवादी विचारधारा की जीत है। कुछ विपक्षी सांसदों पर इसका प्रभाव पड़ा।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें बधाई दी। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भी पत्र लिखकर शुभकामनाएं दीं। राधाकृष्णन 12 सितंबर को शपथ लेंगे।

यह चुनाव जगदीप धनखड़ के जुलाई में स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफे के बाद हुआ था। विपक्ष ने इसे लोकतंत्र की लड़ाई बताया, लेकिन वोटिंग ने उनकी एकता पर सवाल खड़े कर दिए। बीजू जनता दल (बीजेडी), भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) और शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) ने मतदान से परहेज किया, जो एनडीए के पक्ष में गया। क्रॉस वोटिंग के आरोप राजनीतिक हलकों में बहस छेड़ रहे हैं, खासकर बिहार चुनाव से पहले विपक्ष की एकता पर। राधाकृष्णन का कार्यकाल राज्यसभा की कार्यवाही को नई दिशा दे सकता है।

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