नेपाल में सोशल मीडिया बैन के खिलाफ उबाल: फेसबुक, यूट्यूब बंद करने पर हजारों युवाओं का प्रदर्शन, काठमांडू में कर्फ्यू
नेपाल में सोशल मीडिया बैन के खिलाफ उबाल: फेसबुक, यूट्यूब बंद करने पर हजारों युवाओं का प्रदर्शन, काठमांडू में कर्फ्यू
नेपाल में सरकार द्वारा फेसबुक, यूट्यूब, और एक्स सहित 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने के फैसले के खिलाफ देशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। गुरुवार, 5 सितंबर से शुरू हुए इस बैन के बाद काठमांडू में हजारों युवाओं, खासकर जेन-जेड ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने सोशल मीडिया प्रतिबंध के साथ-साथ भ्रष्टाचार और सरकारी दमन के खिलाफ भी आवाज उठाई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने आंसू गैस, रबर बुलेट और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया, जिसमें नौ लोगों की मौत और दर्जनों घायल हो गए।
प्रदर्शन का कारण और विस्तार
नेपाल सरकार ने 28 अगस्त को सोशल मीडिया कंपनियों को पंजीकरण के लिए एक सप्ताह का समय दिया था, लेकिन मेटा (फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप), अल्फाबेट (यूट्यूब), और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म्स ने पंजीकरण नहीं कराया। इसके बाद 4 सितंबर से इन साइट्स को ब्लॉक कर दिया गया। नेपाल में 1.35 करोड़ फेसबुक और 36 लाख इंस्टाग्राम यूजर्स हैं, जो मनोरंजन, समाचार और व्यवसाय के लिए इनका उपयोग करते हैं।
काठमांडू के न्यू बनेश्वर में प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन के पास प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश कर लिया और सुरक्षा बलों पर बोतलें व पेड़ की टहनियां फेंकीं। जवाब में पुलिस ने बल प्रयोग किया, जिसके बाद काठमांडू में कर्फ्यू लागू कर दिया गया। प्रदर्शन अब दमक और अन्य शहरों में भी फैल गए हैं।
प्रदर्शनकारियों की मांग
24 वर्षीय छात्र युजन राजभंडारी ने कहा, “हम सोशल मीडिया बैन के खिलाफ तो हैं ही, लेकिन यह प्रदर्शन भ्रष्टाचार के खिलाफ भी है, जो नेपाल में संस्थागत हो चुका है।” 20 वर्षीय इक्षमा तुमरोक ने सरकार के “तानाशाही रवैये” की निंदा की और कहा, “हमारी पीढ़ी बदलाव चाहती है।” टिकटॉक जैसे कुछ प्लेटफॉर्म्स, जो पंजीकृत हैं, पर वायरल वीडियो में नेताओं के बच्चों की लग्जरी लाइफ को आम लोगों की गरीबी से जोड़कर भ्रष्टाचार के खिलाफ गुस्सा व्यक्त किया जा रहा है।
सरकार का रुख
नेपाल सरकार ने बयान जारी कर कहा कि वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करती है, लेकिन सोशल मीडिया के दुरुपयोग से साइबर अपराध और सामाजिक अशांति को रोकने के लिए यह कदम जरूरी था। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के 2024 के आदेश का हवाला दिया, जिसमें सोशल मीडिया कंपनियों को पंजीकरण और स्थानीय शिकायत निवारण अधिकारी नियुक्त करने को कहा गया था।
भारत-नेपाल सीमा पर सतर्कता
प्रदर्शनों के बाद भारत-नेपाल सीमा पर सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने निगरानी बढ़ा दी है और अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात किए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आंदोलन नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है, क्योंकि यह केवल सोशल मीडिया बैन तक सीमित नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग का प्रतीक बन गया है।
