‘RSS में नीचे से ऊपर तक रं**वों की फौज’, यूपी कांग्रेस चीफ अजय राय के बयान से सियासी बवाल
‘RSS में नीचे से ऊपर तक रं**वों की फौज’, यूपी कांग्रेस चीफ अजय राय के बयान से सियासी बवाल
लखनऊ: उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर अभद्र टिप्पणी करते हुए विवाद खड़ा कर दिया है। वाराणसी में मीडिया से बातचीत के दौरान राय ने कहा, “आरएसएस में नीचे से ऊपर तक रं**वों की फौज भरी हुई है।” यह बयान आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान के संदर्भ में आया, जिसमें उन्होंने देशवासियों को तीन बच्चे पैदा करने की सलाह दी थी। राय की इस टिप्पणी ने सियासी गलियारों में हंगामा मचा दिया है, और भाजपा ने इसे कांग्रेस की हताशा का प्रतीक बताते हुए कड़ी निंदा की है।
घटना गुरुवार को वाराणसी में हुई, जहां अजय राय एक कार्यक्रम के सिलसिले में पहुंचे थे। मोहन भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राय ने कहा कि आरएसएस जैसे संगठन जनसंख्या नियंत्रण और सामाजिक मुद्दों पर अपनी सलाह देने के बजाय खुद की आंतरिक संरचना पर ध्यान दें। उनकी टिप्पणी में प्रयुक्त शब्द “रं**वों की फौज” ने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी है, जहां कई यूजर्स इसे अपमानजनक बता रहे हैं। राय ने आगे कहा, “भागवत जी की सलाह अच्छी है, लेकिन उनके संगठन में जो हाल है, वह जनता के सामने आना चाहिए।” यह बयान लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस की आक्रामक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
भाजपा ने राय के बयान की कड़ी आलोचना की है। प्रदेश भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा, “यह कांग्रेस की हताशा और नफरत का नंगा रूप है। एक राष्ट्रीय संगठन के प्रमुख पर इस तरह की अभद्र भाषा का इस्तेमाल शर्मनाक है।” उन्होंने कांग्रेस आलाकमान से स्पष्टीकरण मांगते हुए अजय राय के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। आरएसएस के एक प्रवक्ता ने भी बयान को “असंवेदनशील” बताते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा से संघ को निशाना बनाती रही है, लेकिन यह उनकी नैतिक पतन को दर्शाता है। विपक्षी दलों में सपा और बसपा ने चुप्पी साध ली है, जबकि कुछ निर्दलीय विधायकों ने इसे “अनुचित” करार दिया।
अजय राय का राजनीतिक सफर विवादास्पद रहा है। वे पांच बार विधायक रह चुके हैं और 2014 व 2019 में वाराणसी से नरेंद्र मोदी के खिलाफ लड़े। 2023 में उन्हें यूपी कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया। पहले भी राय के बयानों ने सुर्खियां बटोरी हैं, जैसे राफेल डील पर नींबू-मिर्ची वाला बयान। कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन पार्टी के अंदरूनी स्रोतों का कहना है कि यह बयान अनधिकृत था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान यूपी की सियासत को और ध्रुवीकृत कर सकता है, खासकर जहां आरएसएस का प्रभाव मजबूत है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बहस हो सकती है, जो विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण साबित होगा।
